अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन से संबंधित विधेयक वकीलों के अधिकार छीनने का प्रयास: सिंघवी
हक हक दिलीप
- 20 Feb 2025, 08:28 PM
- Updated: 08:28 PM
नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन से संबंधित विधेयक के मसौदे का विरोध करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि यह वकीलों के कामकाज में हस्तक्षेप करने और उनके अधिकार छीनने का प्रयास है।
सरकार ने हाल ही में प्रस्तावित विधेयक का मसौदा सामने रखा है।
विपक्षी दल ने केंद्र सरकार से इन संशोधनों को तब तक स्थगित रखने का आग्रह किया, जब तक कि राष्ट्रव्यापी परामर्श की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और संबंधित हितधारकों से इस कानून पर राय नहीं ले ली जाती।
सरकार अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में विधि व्यवसायी और विधि स्नातक की परिभाषाओं में व्यापक बदलाव करके संशोधन करने की योजना बना रही है। अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2025 के मसौदे के अनुसार, विधि स्नातक का अर्थ है वह व्यक्ति जिसने किसी विधि शिक्षा केंद्र या विधि द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय या किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध और भारतीय विधिज्ञ परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त महाविद्यालय से तीन या पांच वर्ष या निर्धारित अवधि की विधि में स्नातक की डिग्री प्राप्त की हो।
कांग्रेस के कानून विभाग के प्रमुख और वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने एक बयान में कहा, ‘‘कांग्रेस का कानून, मानवाधिकार और आरटीआई विभाग अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में नवीनतम संशोधनों का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी वकीलों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करता है।’’
उन्होंने प्रस्तावित विधेयक के कुछ बिंदुओं का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन करने वाला प्रस्तावित विधेयक न केवल खराब तरीके से तैयार किया गया कानून है, बल्कि यह कानूनी बिरादरी के सामने आने वाले प्रासंगिक मुद्दों का समाधान करने में भी विफल है।’’
उनके मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक वकीलों को अपनी शिकायतों और मुद्दों को उठाने की अनुमति देने के लिए एक उचित मंच बनाने के बजाय वैध मांगों को उठाने के वकीलों के अधिकारों को छीनने वाला है।
सिंघवी ने कहा, ‘‘प्रस्तावित विधेयक पेशेवर नियामक निकायों की संरचना, प्रैक्टिस और प्रक्रिया में अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप की अनुमति देता है, जिससे भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा बरकरार रखी गई स्व-स्वायत्तता और आत्म-स्वतंत्रता के सिद्धांत से विचलन होता है।’’
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जिस जल्दबाजी के साथ सरकार ने उचित परामर्श के बिना प्रस्तावित विधेयक को लाने का प्रयास किया है, वह सरकार द्वारा इस पेशेवर वर्ग पर नियंत्रण बढ़ाने का सबूत है।
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