हम बाहरी नहीं हैं: राज्य के बाहर शरण लेने वाले मणिपुरी लोकसभा चुनाव में मतदान के इच्छुक
प्रशांत मनीषा
- 09 Apr 2024, 04:50 PM
- Updated: 04:50 PM
(गुंजन शर्मा)
इंफाल/नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) “हमारे साथ बाहरियों जैसा सुलूक न करें”। यह उन मणिपुरियों की भावुक अपील है जो पिछले साल जातीय झड़पें होने के बाद अपना राज्य छोड़ने के लिए मजबूर हुए।
हिंसा से बचने के लिए ये लोग देश के अन्य हिस्सों में चले गए और अब आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान करने की इच्छा रखने के बावजूद ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
संघर्ष प्रभावित मणिपुर में राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोग 19 अप्रैल से शुरू होने वाले आगामी चुनावों में मतदान कर सकेंगे। हालांकि, राज्य के बाहर रह रहे और घर लौटने में असमर्थ लोगों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि उनका मतदान संभव नहीं है। राज्य से बाहर चले गए मणिपुरी जो अब भी नहीं लौटे हैं, उन्हें लगता है कि यह अभी सुरक्षित नहीं है।
मणिपुर में परंपरागत रूप से बहुत अधिक मतदान होता है और 2019 के चुनावों में 82 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। इस बार, कई नागरिक संस्था समूहों और विस्थापित लोगों ने जातीय हिंसा से जुड़ी मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव कराने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया है।
कुकी-जो और मेइती दोनों समूहों के नेताओं ने निर्वाचन आयोग के समक्ष मुद्दा उठाया है कि जिन लोगों ने राज्य के बाहर शरण ली है उनका कहना है कि मणिपुर के भविष्य में उनका भी दावा है और यदि कोई अन्य व्यवस्था नहीं हो सकती है तो उन्हें डाक मतपत्रों के माध्यम से मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
दिल्ली में रह रहे एक मणिपुरी बीरेन चंदम कहते हैं, “मैं दिल्ली आ गया और यहां मुझे नौकरी मिल गई, जबकि मेरा परिवार पड़ोसी राज्य मिजोरम चला गया। हम अपने घर वापस जाने के लिए उत्सुक हैं जो अभी मौजूद हो या न हो लेकिन हम अपने राज्य के लिए वोट नहीं दे सकते। क्यों?”
चंदम ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “चुनाव या तो स्थगित कर देना चाहिए या हम जहां भी हों, वहां से वोट देने की कोई व्यवस्था की जानी चाहिए। हमें अपने ही गृह राज्य में बाहरी लोगों जैसा अहसास कराया जा रहा है। हमें बाहरी लोगों जैसा महसूस न कराएं।”
अब मिजोरम के एक राहत शिविर में रह रहे मणिपुर के एक आदिवासी कुमथाई ने भी उनका समर्थन किया।
उन्होंने कहा, “हमने अलग राज्य में शरण ली क्योंकि हमारा राज्य जल रहा था। ग्यारह महीने बाद भी स्थिति वापसी के लिए अनुकूल नहीं है। जब तक हम हमारे वास्ते उचित कदम उठाने के लिए सही व्यक्ति को वोट नहीं देंगे, हम इस स्थिति से कैसे बाहर आ सकते हैं।”
कुकी-जो समुदाय से संबंधित मणिपुर के दस विधायकों ने इस महीने की शुरुआत में निर्वाचन आयोग से कहा था कि राज्य के बाहर रह रहे समुदाय के विस्थापित सदस्यों को देश भर में जहां भी उन्होंने शरण ली है, वहां से मतदान करने की अनुमति दी जाए।
एक मेइती नागरिक संस्था समूह ने भी निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि राज्य के बाहर रहने वाले मणिपुर के मतदाताओं के लिए डाक मतपत्र की सुविधा दी जाए।
राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के बाहर के लोगों को वोट की सुविधा देना संभव नहीं है।
नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, “राज्य छोड़ने वाले ऐसे लोगों की कोई आधिकारिक संख्या नहीं है..कुछ इंफाल के रास्ते चले गए, कुछ मिजोरम के रास्ते चले गए...हमारे पास आंकड़ा नहीं है। तार्किक कारणों से उनके लिए मतदान की व्यवस्था करना संभव नहीं लगता।”
मिजोरम गृह विभाग का अनुमान है कि पड़ोसी राज्य मणिपुर के कम से कम 9,196 वयस्कों और बच्चों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में शरण ली है।
मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रदीप कुमार झा ने कहा कि राज्य में राहत शिविरों में रहने वाले 24,000 से अधिक विस्थापित व्यक्तियों को आगामी चुनावों में मतदान करने के लिए पात्र पाया गया है।
उन्होंने कहा कि हिंसा के बाद राज्य छोड़ने वाले लोगों के लिए मतदान की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने इस सुविधा के लिए विभिन्न हलकों से उठ रही मांगों पर कोई टिप्पणी नहीं की।
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह मणिपुर में जातीय संघर्ष के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हुए लगभग 18,000 लोगों के लिए मतदान सुविधाओं की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। भारत के प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने वकील से कहा, “मैं आपको जल्द तारीख दूंगा।”
पहाड़ी राज्य में पिछले साल तीन मई से बहुसंख्यक मेइती समुदाय और कुकी के बीच जातीय झड़पें देखी गईं, जिसके परिणामस्वरूप 200 से अधिक लोगों की जान चली गई।
मणिपुर में दो लोकसभा सीटें हैं - इनर मणिपुर और आउटर मणिपुर (आदिवासियों के लिए आरक्षित)।
मतदान के पहले चरण में 19 अप्रैल को इनर मणिपुर संसदीय क्षेत्र में मतदान होगा, और आउटर मणिपुर में दो चरणों - 19 अप्रैल और 26 अप्रैल को मतदान होगा।
भाषा प्रशांत