राजनीति में आयु नहीं, स्वच्छ छचि मायने रखती है: कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य
अमित मनीषा
- 09 Apr 2024, 12:32 PM
- Updated: 12:32 PM
कोलकाता, नौ अप्रैल (भाषा) दो दशक बाद फिर से लोकसभा चुनाव लड़ रहे 79 वर्षीय कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि राजनीति में उम्र कोई मायने नहीं रखती बल्कि साफ छवि मायने रखती है।
कोलकाता उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, हालांकि "काफी अप्रत्याशित" हैं, लेकिन वह निश्चित रूप से आगामी चुनाव में एक कारक होंगी।
राजनीति में लगभग 50 वर्ष बिता चुके भट्टाचार्य ने कहा कि उत्तरी कोलकाता क्षेत्र ने 19वीं शताब्दी में सांस्कृतिक और सामाजिक आंदोलन देखा था और अब एक और पुनर्जागरण के लिए तैयार है।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भट्टाचार्य ने कहा, "यह सच है कि मैं काफी वृद्ध हूं। इस उम्र में घूमना-फिरना और अलग-अलग जगहों पर जाना मुश्किल होता है लेकिन राजनीतिक तौर पर मैं बहुत साफ-सुथरी छवि वाला हूं, मेरे ऊपर कोई धब्बा नहीं है। मैं कभी भी किसी भी कारण से जेल नहीं गया हूं, मुझे सीबीआई या ईडी द्वारा कभी गिरफ्तार नहीं किया गया है।”
भट्टाचार्य ने अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मौजूदा सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तापस रॉय के नाम का उल्लेख नहीं किया।
बंदोपाध्याय को पोंजी घोटाला मामले में 2017 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नगर पालिका भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में इस साल जनवरी में रॉय के आवास पर छापा मारा था। पांच बार विधायक रह चुके रॉय मार्च में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं।
भट्टाचार्य ने कहा, “मैंने एक कॉलेज शिक्षक, एक सांसद या विधायक के रूप में पैसा कमाया। मेरा मानना है कि आम लोग अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए एक साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति की तलाश में हैं।’’
उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि सुदीप बंदोपाध्याय भी 75 साल के हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वह (बंदोपाध्याय) मुझसे बहुत छोटे नहीं हैं। लेकिन हां, तापस (रॉय) निश्चित रूप से बहुत छोटे हैं। मेरा मानना है कि कोलकाता उत्तर के लोग (अपने सांसद को) राजनीतिक रूप से चुनेंगे। उन्हें बहुत स्पष्ट रूप से सोचना होगा... हम सभी जानते हैं कि ''टीएमसी का भाजपा के साथ संबंध है।''
1996 में एक बार लोकसभा के लिए चुने गए कांग्रेस नेता ने कहा कि संदेशखालि की घटनाओं ने उन्हें 19वीं सदी के समाज सुधारक राममोहन रॉय की याद दिला दी। संदेशाखालि में स्थानीय टीएमसी नेताओं पर महिलाओं के अत्याचार के आरोप लगाए गए थे।
उन्होंने कहा, "राममोहन राय ने महिलाओं के अधिकारों, विधवाओं के पुनर्विवाह और संपत्ति पर उनके अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी। संदेशखालि ने दिखाया कि यहां महिलाओं पर किस तरह अत्याचार किया जाता है। समय आ गया है कि बंगाल के लिए एक और पुनर्जागरण जरूरी है और इसकी शुरुआत उत्तरी कोलकाता से होगी।"
कोलकाता उत्तर निर्वाचन क्षेत्र में एक जून को मतदान होगा।
भाषा अमित