हम भाषा की राजनीति वाले 60 के दशक में नहीं हैं: मुरुगन
राखी पवनेश
- 17 Feb 2025, 03:50 PM
- Updated: 03:50 PM
मदुरै (तमिलनाडु), 17 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) को लेकर लोगों का ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोग साठ के दशक में नहीं जी रहे हैं, जहां द्रमुक भाषा के नाम पर राजनीति करे।
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी कि तमिल इस धमकी को बर्दाश्त नहीं करेंगे कि जब तक तीन भाषा नीति को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक राज्य के लिए कोई धनराशि नहीं दी जाएगी, को लेकर आलोचना करते हुए मुरुगन ने कहा कि राज्य के लोग सीखना और प्रगित करना चाहते हैं।
मुरुगन ने यहां प्राचीन श्री मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद पत्रकारों से कहा, “ मैं परसो वाराणसी में काशी तमिल संगमम कार्यक्रम में था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने तमिलनाडु के लिए कभी धन से इंकार नहीं किया।”
केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री मुरुगन ने बताया कि तमिलनाडु ने पहले केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं जैसे 'पीएम श्री' को लागू करने के लिए सहमति दी थी। इसके अंतर्गत एनईपी द्वारा परिकल्पित समतापूर्ण, समावेशी और बहुलतावादी समाज के निर्माण के लिए केंद्र, राज्य, केंद्र शासित प्रदेशों और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों का विकास किया जाना था। लेकिन वे (राज्य सरकार) 'पीएम श्री' लागू करने के लिए हस्ताक्षर करने के बाद पीछे हट गए।
उन्होंने कहा, ''किसी भी योजना के लिए धन स्वीकृत करने को लेकर हमेशा शर्तें होती हैं। 'पीएम श्री' के संबंध में केंद्र ने तमिलनाडु से एनईपी को लेकर सहयोग मांगा और बदले में राज्य को पूर्ण मदद का आश्वासन दिया।''
उन्होंने कहा, "कहीं भी यह नहीं कहा गया कि राज्य को धनराशि देने से मना कर दिया जाएगा। प्रधान ने भी यही कहा था। लेकिन मुद्दे को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। हम 1965 में नहीं रह रहे हैं। लोग, विशेषकर तमिलनाडु के लोग प्रगतिशील हैं और विकास चाहते हैं। वर्तमान परिस्थिति में उन्हें (द्रमुक को) भाषा राजनीति करने की आवश्यकता नहीं है जैसा उन्होंने 1965 में किया था।"
मुरुगन ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिल भाषा के लिए द्रमुक से ज्यादा काम किया है। वह (पीएम) तमिल लोगों से द्रमुक से ज्यादा लगाव रखते हैं।''
उन्होंने यह भी पूछा, "क्या समस्या है एनइपी को लागू करने में, जिसका उद्देश्य हमारे युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है?"
मुरुगन ने कहा, ''एनईपी ने प्राथमिक शिक्षा अपनी मातृभाषा में दिये जाने पर जोर दिया है। यह नीति 40 वर्षों के विचार-विमर्श और सभी क्षेत्रों के लोगों से परामर्श के बाद तैयार की गई है।''
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