ईशा फाउंडेशन को नोटिस रद्द करने के आदेश के खिलाफ दो साल बाद याचिका पर टीएनपीसीबी को फटकार
सुरभि माधव
- 14 Feb 2025, 05:42 PM
- Updated: 05:42 PM
नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) को इस बात के लिए फटकार लगाई कि उसने पर्यावरण मानदंडों का कथित रूप से उल्लंघन करने के लिए ईशा फाउंडेशन के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करने वाले आदेश के खिलाफ दो साल बाद कदम उठाया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने टीएनपीसीबी द्वारा दायर याचिका को नौकरशाहों का‘‘दोस्ताना मैच’’ करार दिया, जो याचिका को खारिज करने पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर चाहते हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘महाधिवक्ता महोदय, अधिकारियों को समय पर अदालत आने से किसने रोका? इस याचिका को दायर करने में 637 दिनों की देरी हुई है, जो लगभग दो साल है। यह वास्तव में एक दोस्ताना मैच है, जहां नौकरशाह याचिका को खारिज करने पर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय की मुहर चाहते हैं।’’
फाउंडेशन को 2006 से 2014 के बीच अनिवार्य पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त किए बिना भवन निर्माण करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया था।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने राज्य के विधि अधिकारी से आगे कहा, ‘‘जब राज्य सरकार देरी से आती है, तो हमें संदेह होता है। हम गौर से मामले को देखना शुरू कर देते हैं। आप कैसे कह सकते हैं कि योग केंद्र एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है? अगर वे योजना के अनुसार नहीं चल रहे हैं, तो आप गैर-अनुपालन को चुनौती दे सकते हैं लेकिन आपको एक लाख गज से अधिक में निर्मित संरचना को ध्वस्त करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह किसी प्रकार की झोपड़ी नहीं है।’’
शीर्ष अदालत ने महाधिवक्ता पी. एस. रमन से कहा कि अब जब ईशा फाउंडेशन ने कोयंबटूर जिले के वेल्लियांगिरी में एक योग और ध्यान केंद्र का निर्माण कर लिया है, तो राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पर्यावरण नियमों का अनुपालन हो।
पीठ ने कहा, ‘‘अब जबकि एक योग केंद्र का निर्माण हो चुका है और आप यह नहीं कह रहे हैं कि यह खतरनाक है, तो आपकी चिंता यह सुनिश्चित करने में होनी चाहिए कि सभी पर्यावरणीय मानदंडों जैसे सूर्य की रोशनी, हरियाली, सीवेज उपचार संयंत्र का अनुपालन किया जाए। आप इन मुद्दों को उठा सकते हैं। इन मानदंडों का अनुपालन करना हर किसी का दायित्व है।’’
ईशा फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत से शिवरात्रि के बाद मामले की सुनवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक बड़ा समारोह आयोजित किया जाना है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास सभी आवश्यक स्वीकृतियां हैं। वे केवल पर्यावरण मंजूरी के बारे में बात कर रहे हैं। योग केंद्र 80 प्रतिशत पर्यावरण के अनुकूल है। यह भारत के सर्वोत्तम केंद्रों में से एक है।’’
मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि ईशा फाउंडेशन के इस दावे पर उसका दृष्टिकोण सही था कि वह शैक्षणिक केंद्र के लिए केंद्र की अधिसूचना के अंतर्गत आता है।
देरी के बारे में पूछे जाने पर रमन ने कहा कि मामला राज्य के दो विभागों के बीच फंसा हुआ है।
पीठ ने मामले में सुनवाई के लिए शिवरात्रि के बाद की तारीख तय की।
अदालत ने 14 दिसंबर, 2022 को सुनवाई के दौरान माना कि कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन द्वारा स्थापित केंद्र ‘शिक्षा’ श्रेणी में आएंगे। उच्च न्यायालय ने टीएनपीसीबी के नोटिस को खारिज कर दिया, जिसमें पूछा गया था कि 2006 और 2014 के बीच विभिन्न भवनों के निर्माण के लिए अभियोजन क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने फाउंडेशन की ओर से इसके संस्थापक जग्गी वासुदेव द्वारा प्रस्तुत याचिका को स्वीकार करते हुए 19 नवंबर, 2021 के नोटिस को रद्द कर दिया।
कारण बताओ नोटिस में कहा गया था कि फाउंडेशन ने पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त किए बिना वेल्लिंगिरी पर्वतीय क्षेत्र में इमारतों का निर्माण किया था।
केंद्र सरकार ने पहले उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि फाउंडेशन एक स्कूल चलाने के अलावा योग का प्रशिक्षण भी दे रहा है, इसलिए, यह ‘शिक्षा’ के दायरे में आएगा।
भाषा
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