निर्वाचन आयोग के बाहर धरने पर बैठे टीएमसी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया
शफीक अविनाश
- 08 Apr 2024, 09:20 PM
- Updated: 09:20 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग के प्रमुखों को बदलने की मांग को लेकर सोमवार को यहां निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मिलने के बाद धरने की घोषणा की थी।
आयोग से मुलाकात करने वाले नेताओं में शामिल राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से लोकसभा चुनाव में समान अवसर सुनिश्चित करने और विपक्षी दलों एवं इनके नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के ‘‘दुरुपयोग’’ को रोकने का आग्रह किया।
तृणमूल कांग्रेस आरोप लगा रही है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार के इशारे पर विपक्षी दलों को निशाना बना रही हैं।
धरने के दौरान घोष ने कहा, ‘‘हमने निर्वाचन आयोग से चुनावी शुचिता बनाए रखने के लिए संसदीय लोकतंत्र के नाम पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। ईडी, सीबीआई, एनआईए, आयकर विभाग को विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका जाए।’’
धरना दे रहे टीएमसी नेताओं ने अपने हाथों में तख्तियां थामी हुई थीं, जिन पर लिखा था, ‘‘एनआईए के महानिदेशक, ईडी और सीबीआई के निदेशकों को तुरंत बदला जाए।’’
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन, मोहम्मद नदीमुल हक, डोला सेन, साकेत गोखले और सागरिका घोष, विधायक विवेक गुप्ता, पूर्व सांसद अर्पिता घोष, शांतनु सेन और अबीर रंजन विश्वास और पार्टी की छात्र शाखा की पश्चिम बंगाल इकाई के उपाध्यक्ष सुदीप राहा को हिरासत में ले लिया गया।
वहीं, आयोग के प्रवक्ता ने टीएमसी के धरने पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि धरना दे रहे नेताओं को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया क्योंकि क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू है और विरोध-प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
टीएमसी द्वारा जारी एक वीडियो में घोष ने कहा, ‘‘पुलिस ने हमें जबरदस्ती उठाया, हममें से कुछ लोग गिर गए। डोला सेन के पैर में चोट लगी है, उन्हें धक्का दिया गया।’’
पार्टी द्वारा साझा किए गए एक अन्य वीडियो में गोखले ने कहा कि पुलिस ने उन्हें यह नहीं बताया है कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।
आयोग को लिखे एक पत्र में टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी 26 मार्च को कथित तौर पर एक ‘‘पैकेट’’ के साथ एनआईए के पुलिस अधीक्षक डी.आर. सिंह से मिले और लगभग एक घंटे की बैठक के बाद खाली हाथ वापस लौट गए।
टीएमसी ने पत्र में कहा, ‘‘यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को परेशान करने के लिए भाजपा और एनआईए के बीच अपवित्र सांठगांठ और समझौते का पर्याप्त सबूत है। इसका मकसद कार्यकर्ताओं को अपने चुनावी कर्तव्यों को निभाने से रोकना है।’’
पार्टी का आरोप है कि इस बैठक के दौरान भाजपा नेता ने टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं की एक सूची सौंपी ताकि उन्हें निशाना बनाया जा सके।
टीएमसी ने रविवार को चुनाव से पहले एनआईए और भाजपा के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया था। हालांकि, जांच एजेंसी ने इन आरोपों से इनकार किया और पूरे विवाद को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया था।
एनआईए की टीम शनिवार को पूर्व मेदिनीपुर जिले के भूपतिनगर में साल 2022 में हुए विस्फोट के मामले में दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार करने गई थी, लेकिन भीड़ ने जांच एजेंसी की टीम पर कथित तौर पर हमला कर दिया था। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांचकर्ताओं द्वारा ग्रामीणों पर हमला किए जाने का आरोप लगाया, जिससे राजनीतिक विवाद छिड़ गया।
भाषा शफीक