सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों ने सज्जन कुमार को कठोरतम सजा दिए जाने की मांग की
शफीक वैभव
- 12 Feb 2025, 08:11 PM
- Updated: 08:11 PM
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों और सिख नेताओं ने 1984 में हुए दंगों के दौरान हत्या के एक मामले में बुधवार को कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को दोषी ठहराए जाने के फैसले का स्वागत किया तथा कठोरतम सजा की मांग की।
दिल्ली की एक अदालत ने सज्जन कुमार को सिख विरोधी दंगों के दौरान सरस्वती विहार इलाके में दो लोगों की हत्या के मामले में बुधवार को दोषी करार दिया।
विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने सजा पर बहस की तारीख 18 फरवरी तय की।
हत्या का दोषी करार दिए जाने के बाद कुमार को अब अधिकतम मृत्युदंड या कम से कम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
फैसले के बाद, दंगा पीड़ितों और सिख नेताओं ने राहत व्यक्त की और कुमार के लिए कठोरतम सजा की मांग की। उन्होंने कहा कि 1984 में जो हुआ वह दंगा नहीं बल्कि सिख नरसंहार था।
त्रिलोकपुरी के पीड़ित सुरजीत सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘सिखों को साजिश के तहत निशाना बनाया गया और उनकी हत्या की गई। हम चाहते हैं कि 18 फरवरी को उसे मृत्युदंड दिया जाए, ताकि सभी अपराधियों को पता चले कि एक निर्दोष परिवार को जलाने की सजा केवल मृत्युदंड ही होनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे परिवार के सदस्यों को जिंदा जला दिया गया और मैं 40 साल से न्याय के लिए लड़ रहा हूं। जब यह घटना हुई, तब मैं सिर्फ 11 साल का था और दो-तीन दिन तक मैं भूखा-प्यासा रहा।’’
सुरजीत ने कहा, ‘‘आज न्याय मिलना शुरू हुआ है, लेकिन असली न्याय तब होगा जब उसे 18 फरवरी को मृत्युदंड मिलेगा। 1984 में जो हुआ वो दंगा नहीं था... वह नरसंहार था। सिखों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया और मारा गया।’’
भाजपा नेता आर पी सिंह ने सजा का स्वागत किया और विशेष जांच दल (एसआईटी) को सबूतों को सामने लाने का श्रेय दिया, जिसके कारण फैसला आया।
उन्होंने कहा, ‘‘सरस्वती विहार में एक व्यक्ति और उसके बेटे को जिंदा जला दिया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कांग्रेस नेताओं के आदेश आए थे। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को एसआईटी गठित करने के लिए धन्यवाद देते हैं, जिसने सच्चाई को सामने लाया। हमें उम्मीद है कि अदालत कुमार को मृत्युदंड से कम कुछ नहीं देगी।’’
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष आत्मा सिंह लुबाना ने याद किया कि कैसे कुमार राजनीतिक संरक्षण के कारण दशकों तक गिरफ्तारी से बचते रहे।
लुबाना ने कहा, ‘‘1990 में, जब सीबीआई ने कुमार को गिरफ्तार करने की कोशिश की, तो सत्ता में बैठे लोगों ने बचा लिया। सरकार बदलने के बाद ही लंबित मामलों को फिर से खोला गया। आज, उसे दोषी ठहराया गया है, लेकिन केवल मृत्युदंड से ही दंगा पीड़ितों को शांति मिलेगी।’’
1984 के सिख विरोधी दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद भड़के थे, जिसके कारण दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में हजारों सिख मारे गए थे।
भाषा
शफीक