मणिपुर: भाजपा विधायकों ने कहा, नये मुख्यमंत्री के बारे में फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा
आशीष दिलीप
- 11 Feb 2025, 09:58 PM
- Updated: 09:58 PM
इंफाल, 11 फरवरी (भाषा) जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से दो दिन पहले एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद पैदा हुए नेतृत्व संकट के बीच भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को यहां राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की।
सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल के साथ करीब आधे घंटे तक बैठक हुई। बैठक के विवरण का पता नहीं चला है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा और पार्टी की प्रदेश इकाई की अध्यक्ष ए शारदा देवी ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से राजभवन में मुलाकात की।
इस बीच, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अब तक किसी ने भी सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है, जिससे भाजपा शासित मणिपुर संवैधानिक संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है।
उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणाभ चौधरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मणिपुर में विधानसभा बरकरार है...यह निलंबित अवस्था या राष्ट्रपति शासन के अधीन नहीं है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार विधानसभा सत्र आयोजित करना अनिवार्य है। जाहिर है, इससे बड़ा संवैधानिक संकट पैदा होगा।’’
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 174 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि इसे छह महीने से आगे बढ़ाया जा सकता है।
अनुच्छेद 174 में कहा गया है कि राज्यपाल समय-समय पर राज्य विधानमंडल के सदन या प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर अधिवेशन के लिए बुलाएगा, जिसे वह ठीक समझे, लेकिन एक सत्र में इसकी अंतिम बैठक और अगले सत्र में इसकी पहली बैठक के लिए नियत तिथि के बीच छह महीने का अंतर नहीं होगा।
चौधरी ने कहा कि छह महीने बीत जाने के बाद, यह संवैधानिक गतिरोध पैदा कर देगा और अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन ही एकमात्र विकल्प है।
संविधान का अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की शक्ति देता है।
संबित पात्रा के साथ बैठक करने के बाद भाजपा विधायकों सपाम केबा और के इबोम्चा ने कहा कि राज्य के नये मुख्यमंत्री के बारे में फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा।
सपाम केबा ने कहा, ‘‘सब कुछ पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। हमने पात्रा के माध्यम से केंद्र से राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के तरीके खोजने का आग्रह किया है। कुछ दिनों के भीतर केंद्र सरकार यह निर्णय लेगी कि क्या किया जाना चाहिए।’’
मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और राज्यपाल भल्ला ने इसे स्वीकार कर लिया। उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था होने तक मुख्यमंत्री से पद पर बने रहने का अनुरोध किया।
राज्यपाल ने 10 फरवरी से शुरू होने वाले 12वीं मणिपुर विधानसभा के सातवें सत्र को पहले ही रद्द कर दिया है। राज्य में विधानसभा का अंतिम सत्र 12 अगस्त, 2024 को संपन्न हुआ था।
वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता ओकराम इबोबी सिंह ने कहा कि बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद राज्य के विधायकों को विधानसभा का नेता चुनने की अनुमति दी जानी चाहिए।
तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके इबोबी सिंह ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी आलोचना की।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इस मौजूदा स्थिति (मुख्यमंत्री न होने की) से संवैधानिक संकट पैदा नहीं होना चाहिए। यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और गृह मंत्री शाह की सरासर लापरवाही है। बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद, वे एक नया मंत्रिपरिषद गठित कर सकते थे। विधायकों को एक नया नेता चुनने दें।’’
इबोबी सिंह ने कहा कि सदन का नया नेता चुनने में बस एक या दो घंटे का समय लगेगा। उन्होंने विधानसभा के बजट सत्र को रद्द करने के फैसले की भी आलोचना की, जो सोमवार से शुरू होने वाला था।
मई 2023 से इंफाल घाटी स्थित मेइती और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में बसे कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
भाषा आशीष