भारत में निवेशकों के लिए लालफीताशाही नहीं बल्कि लाल कालीन: राजनाथ सिंह
रमण अजय
- 11 Feb 2025, 09:47 PM
- Updated: 09:47 PM
बेंगलुरु, 11 फरवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत निवेशकों के लिए लालफीताशाही नहीं, बल्कि लाल कालीन बिछाता है और देश में सतत आर्थिक विकास के लिए व्यापक सहमति है।
सिंह ने मंगलवार को यहां वैश्विक निवेशक सम्मेलन...इन्वेस्ट कर्नाटक-2025 का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत ने एक स्थिर और भरोसेमंद नीतिगत माहौल बनाकर नीतिगत अनिश्चितता को दूर किया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी संसद के बजट सत्र के कारण उद्घाटन में शामिल नहीं हुए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि दोनों नेता बजट पर चर्चा के कारण काफी व्यस्त थे और उन्होंने कर्नाटक सरकार को अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं।
वहीं, केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने भी संसद सत्र चलने का हवाला देते हुए कार्यक्रम में शामिल होने में असमर्थता जताई।
कार्यक्रम में सिंह ने कहा, ‘‘...आज केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकायों सहित भारत में शासन के सभी स्तरों पर इस बात पर व्यापक सहमति है कि सतत आर्थिक विकास को बाजार आधारित अर्थव्यवस्था से संचालित होना चाहिए, जिसमें निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।’’
मंत्री ने कहा कि सतत आर्थिक विकास की यह साझा प्रतिबद्धता एक स्थिर और भरोसेमंद नीतिगत परिवेश प्रदान करती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि निवेशक नीतियों पर भरोसा करते हुए निवेश कर सकें।
सिंह ने कहा कि पहले निवेशकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था और सबसे बड़ी बाधाओं में से एक लालफीताशाही थी, लेकिन अब समय बदल गया है।
मंत्री ने कहा, ‘‘आज भारत निवेशकों के सामने लालफीताशाही नहीं रखता है। इसके बजाय, हम उनके लिए लाल कालीन बिछाते हैं। निवेश को बढ़ावा देने को लेकर एक व्यापक सहमति हमारे निवेशकों के लिए अनिश्चितता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।’’
सिंह ने कहा कि निवेशकों को पूर्व में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, केंद्र और राज्य सरकारों ने उन चुनौतियों का समाधान करने के लिए सक्रिय रूप से काम किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘निवेश करने से पहले किसी भी निवेशक के लिए सबसे बड़ी चिंता अनिश्चितता होती है। निवेशकों को चिंता है कि वे आज निवेश कर सकते हैं, लेकिन बाद में उन्हें अप्रत्याशित रूप से नीतियों के मामले में बदलावों का सामना करना पड़ेगा, जो उनकी योजनाओं और मुनाफे को बाधित कर सकता है।’’
सिंह ने कहा कि अनिश्चितता का यह मुद्दा सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है जो हर जगह निवेश निर्णयों को प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि मंजूरी लेने की प्रक्रियाएं बोझिल थीं। लेकिन एकल-खिड़की व्यवस्था से चीजें बदल गयी हैं।
सिंह ने कहा कि निवेशकों को अपने उत्पादों के लिए मजबूत बाजार मांग की भी आवश्यकता है, ऐसे में जब उपभोग की बात आती है, तो भारत पहले से ही दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई आर्थिक फैसलों से मांग मजबूत होने की उम्मीद है। आरबीआई ने हाल ही में रेपो दर को 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है, जिससे कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा।
मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने इस साल के बजट में बड़े पैमाने पर आयकर में कटौती की है, इस महत्वपूर्ण कर राहत से लोगों की खर्च करने योग्य आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सिंह ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों से यहां आये निवेशकों से कहा कि कर्नाटक वह सब कुछ प्रदान करता है जो एक निवेश गंतव्य में चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी निवेश आवश्यकताएं क्या हैं, कर्नाटक विकास और सफलता के लिए एक अच्छी नींव प्रदान करता है।’’
मंत्री ने कहा, ‘‘एक निवेशक के रूप में, आप एक विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की तलाश करते हैं और कर्नाटक अगली पीढ़ी की बुनियादी सुविधाओं की पेशकश कर रहा है। यदि आपको कुशल मानव संसाधनों की आवश्यकता है, तो कर्नाटक भविष्य की जरूरतों के अनुसार अपने प्रतिभाशाली कार्यबल के साथ खड़ा है।’’
इस मौके पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, केंद्रीय खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रल्हाद जोशी, उप-मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, कर्नाटक के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल मौजूद थे।
कार्यक्रम में महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरपर्सन आनंद महिंद्रा, जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरपर्सन सज्जन जिंदल, बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ, किर्लोस्कर सिस्टम्स की चेयरपर्सन गीतांजलि किर्लोस्कर और हीरो फ्यूचर एनर्जी के चेयरपर्सन राहुल मुंजाल शामिल हुए।
इस बीच, जेएसडब्ल्यू ने सम्मेलन में 1.2 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है।
कंपनी की एक बयान में कहा, ‘‘इस्पात, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, सीमेंट और पेंट तक फैले निवेश का उद्देश्य हजारों रोजगार के अवसर पैदा करते हुए कर्नाटक के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य को मजबूत करना है।’’
भाषा रमण