हम उन्हें अपनी बातों में, यादों में जिंदा रखेंगे: ब्रिगेडियर लिड्डर की बेटी
संतोष नरेश
- 08 Feb 2025, 04:46 PM
- Updated: 04:46 PM
नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटी आशना लिड्डर बमुश्किल 16 साल की थीं जब आठ दिसंबर, 2021 को उन्हें उस दुखद हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बारे में पता चला जिसमें उनके पिता ब्रिगेडियर एलएस लिड्डर की जान चली गई।
तमिलनाडु के कुन्नूर में सैन्य हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की त्रासदीपूर्ण खबर से पूरा देश स्तब्ध रह गया था और उनके परिजन सदमे में थे।
इस हादसे में देश के पहले प्रमुख रक्षाध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत कई अन्य लोगों की मौत हो गई थी।
ब्रिगेडियर लिड्डर की पत्नी और बेटी भी शुरू में सदमे की स्थिति में थीं, लेकिन अगले दिन से ही उन्होंने इस चुनौती का सामना करने के लिए असाधारण साहस और धैर्य दिखाया । हालांकि वे जानते थे कि उनके बिना जीवन कितना मुश्किल होगा।
आशना लिड्डर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘उनकी उम्र में यह सबसे अप्रत्याशित बात थी, जीवन के जिस पड़ाव पर वे (उनके माता-पिता) थे। अगले दिन से ही मेरी मां ने मुझे ट्यूशन कक्षाओं के लिए जाने को कहा और वह भी 10 दिन बाद काम पर चली गईं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी मां अगले दिन से ही हिम्मत के साथ उठ खड़ी हुईं। उन्होंने स्थिति को स्वीकार करते हुए अपने जीवन को सामान्य बना लिया।’’
दूसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर लिड्डर (मित्रों और सहकर्मियों के बीच ’टोनी लिड्डर’ के रूप में लोकप्रिय) दुर्घटना के समय सीडीएस जनरल रावत के स्टाफ में कार्यरत थे। वह 52 वर्ष के थे।
उनकी पत्नी गीतिका लिड्डर ने ‘आई एम ए सोल्जर्स वाइफ: द लाइफ एंड लव ऑफ टोनी लिड्डर’ शीर्षक से एक संस्मरण लिखा है जिसे शनिवार शाम को यहां मानेकशॉ सेंटर में जारी किया जाएगा।
इसमें उन्होंने सदमे और दुःख से उबरकर आगे बढ़ने के साहस का जिक्र किया है। उनकी बेटी का कहना है कि यह किताब एक तरह से उनके पिता को जीवित रखेगी।
आशना अब 20 साल की हो गई हैं और वह श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की डिग्री हासिल कर रही हैं। वह उस कठिन समय में परिवार को संभालने का श्रेय अपनी मां को देती हैं।
आशना ने कहा, ‘‘दरअसल, अंतिम संस्कार के समय उन्होंने (मां ने) एक सार्वजनिक टिप्पणी में कहा था - ‘मैं एक सैनिक की पत्नी हूं और मैं उन्हें मुस्कुराते हुए विदा करूंगी।’ किताब का शीर्षक यहीं से आया है।’’
चंडीगढ़ में जन्मी आशना का कहना था,‘‘जब कोई करीबी या प्रिय व्यक्ति इस तरह (दुर्घटना) चला जाता है, तो हम उनके बारे में बात नहीं करते या उनकी तस्वीरें नहीं रखते, ताकि दुखद यादें बार बार ना सताएं। लेकिन हम उन्हें अपनी यादों और भावनाओं में जीवित रखते हुए आगे बढ़ गए हैं।’’
भाषा संतोष