सूझबूझ वाले राजकोषीय प्रबंधन से बॉन्ड प्रतिफल होगा कम, नकदी बढ़ेगी: डीईए सचिव सेठ
अजय
- 05 Feb 2025, 07:23 PM
- Updated: 07:23 PM
(अतिरिक्त सामग्री के साथ)
नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) के सचिव अजय सेठ ने कहा है कि सरकार का सूझबूझ के साथ राजकोषीय प्रबंधन करने से कंपनियों के लिए वित्तीय प्रणाली में अधिक राशि उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘देखा जाए तो हम वित्त वर्ष 2025-26 में जो उधार लेंगे, वह चालू वर्ष में ली जाने वाली कर्ज राशि से कम होगा। यहां तक कि सकल उधार भी मामूली अधिक होगा। यह संकेत देता है कि निजी क्षेत्र के लिए बाजार में पर्याप्त नकदी होगी।’’
बाजार में पर्याप्त नकदी होने का मतलब है कि कंपनियों के लिए कर्ज लेना आसान होगा और वे अपनी परियोजनाओं के लिए ऋण लेने के साथ निवेश कर सकेंगी। इससे आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए अपने उधारी अनुमान को घटाकर शुद्ध आधार पर 11.54 लाख करोड़ रुपये किया है। इसका कारण कर संग्रह में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, सकल बाजार कर्ज को अब चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 14.01 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 14.82 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
सरकार को अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए प्रतिभूतियां जारी कर उधार लेना पड़ता है।
डीईए सचिव ने कहा, ‘‘...इसीलिए मुझे लगता है कि इस साल और अगले वर्ष राजकोषीय मजबूती की रूपरेखा से बॉन्ड प्रतिफल में नरमी आनी चाहिए...।’’
दस साल साल के सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल फिलहाल 6.7 प्रतिशत के आसपास है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 की दूसरी तिमाही में भारांश औसत रिटर्न नरम होकर 6.94 प्रतिशत हो गया, जो पहली तिमाही में 7.14 प्रतिशत थी।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 4.8 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले इसके 4.9 प्रतिशत पर रहने का अनुमान रखा गया था।
संशोधित एफआरबीएम (राजकोषीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन) अधिनियम में राजकोषीय घाटे में कमी लाने के लक्ष्य के अनुरूप अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.4 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी है।
सरकार ने मार्च, 2031 तक कर्ज-जीडीपी अनुपात को वर्तमान 57.1 प्रतिशत से घटाकर लगभग 50 प्रतिशत करने के लिए एक नई रूपरेखा की घोषणा की है।
भाषा रमण अजय
अजय