पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला का निधन, अपने कार्यकाल में कई चुनाव सुधार किये
सुभाष पवनेश
- 01 Feb 2025, 05:30 PM
- Updated: 05:30 PM
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) नवीन चावला का शनिवार को निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे।
चावला के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कई सुधार किए, जिसमें ‘तृतीय लिंग’ के मतदाताओं को ‘पुरुष’ या ‘महिला’ के रूप में मतदान करने के लिए बाध्य करने के बजाय एक नयी श्रेणी ‘अन्य’ के तहत मतदान करने का प्रावधान करना शामिल है।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि 16वें सीईसी के तौर पर चावला ने निर्वाचन आयुक्तों को हटाने की प्रक्रिया को सीईसी के समान बनाने के लिए संवैधानिक सुधारों की वकालत की थी।
बयान में कहा गया, ‘‘चुनावी प्रक्रिया के प्रति उनका नेतृत्व और प्रतिबद्धता निर्वाचन आयोग में हमें प्रेरित करती रहेगी।’’
एक अन्य पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस वाई कुरैशी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वह चावला से करीब 10 दिन पहले मिले थे, उस समय चावला ने उन्हें बताया था कि उन्हें ब्रेन सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।
कुरैशी ने कहा, ‘‘आज सुबह अपोलो अस्पताल में उनका निधन हो गया।’’ उन्होंने कहा कि जब वह आखिरी बार उनसे मिले थे, तब वह काफी खुश थे।
चावला, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश कैडर (एजीएमयूटी) कैडर के 1969 बैच के अधिकारी थे।
कुरैशी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘भारत के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।’’
पूर्व नौकरशाह चावला 2005 से 2009 के बीच निर्वाचन आयुक्त रहे थे और उसके बाद अप्रैल 2009 से जुलाई 2010 तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे।
निर्वाचन आयोग में चावला के कार्यकाल के दौरान विवाद भी सामने आए। केंद्र में तत्कालीन विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया था।
वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त एन गोपालस्वामी ने चावला को हटाने की सरकार से सिफारिश की थी। चावला उस समय निर्वाचन आयुक्त थे।
यह सिफारिश भाजपा द्वारा दायर याचिका के आधार पर की गई थी जिसमें चावला की कथित ‘‘पक्षपातपूर्ण’’ कार्यप्रणाली के खिलाफ शिकायत की गई थी। हालांकि, सरकार ने इस सिफारिश पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।
वर्ष 2006 में, लोकसभा में विपक्ष के तत्कालीन नेता लालकृष्ण आडवाणी तथा 204 सांसदों ने (तत्कालीन) राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम को एक याचिका सौंपी थी, जिसमें कथित पक्षपात के लिए चावला को निर्वाचन आयुक्त के पद से हटाने की मांग की गई थी।
भाजपा ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया था।
चावला का जन्म 30 जुलाई 1945 को हुआ और उच्च शिक्षा सेंट स्टीफंस कॉलेज में प्राप्त करने से पहले उन्होंने सनावर के लॉरेंस स्कूल से स्कूली शिक्षा हासिल की थी।
सिविल सेवा करियर के दौरान उन्हें कई जिम्मेदारियां मिलीं।
वह मुख्य रूप से दिल्ली में ही तैनात रहे, लेकिन कुछ समय के लिए उन्होंने अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में भी सेवा दी।
निर्वाचन आयुक्त नियुक्त होने से पहले वह केंद्रीय सचिव रहे और 2009 का लोकसभा चुनाव उनकी निगरानी में हुआ।
चावला को मदर टेरेसा के जीवनी लेखक के रूप में भी जाना जाता है। ‘मदर टेरेसा’ शीर्षक वाली जीवनी 1992 में ब्रिटेन में पहली बार प्रकाशित हुई और तब से इसके कई संस्करण आ चुके हैं।
उन्होंने फोटोग्राफर रघु राय द्वारा ली गई तस्वीरों के साथ ‘‘फेथ एंड कम्पैशन: द लाइफ एंड वर्क ऑफ मदर टेरेसा’’ का सह-लेखन भी किया। इसका 1997 में ब्रिटेन में प्रकाशन हुआ था।
सीईसी के रूप में चावला ने कानून मंत्रालय को एक संवैधानिक संशोधन की सिफारिश की थी, ताकि निर्वाचन आयुक्तों को हटाने की प्रक्रिया को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समान किया जा सके।
चावला ने अपने पूर्ववर्ती द्वारा उन्हें हटाने की मांग सहित दो पूर्व घटनाओं का हवाला देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा और सरकार से निर्वाचन आयुक्तों को संरक्षण देने के लिए शीघ्र संशोधन करने का आग्रह किया।
हालांकि, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों को हटाने की प्रणाली अपरिवर्तित बनी हुई है।
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