अब 12 लाख रुपये सालाना आय पर नहीं लगेगा कोई कर, बजट में अगली पीढ़ी के सुधारों पर जोर
रमण अजय
- 01 Feb 2025, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि को गति देने के मकसद से एक तरफ जहां मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए 12 लाख रुपये की सालाना आय पर कर छूट की घोषणा की है, वहीं दूसरी तरफ बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा बढ़ाने समेत अगली पीढ़ी के सुधारों को तेज करने का प्रस्ताव किया है।
बजट में विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चार इंजन...कृषि, एमएसएमई, निवेश और निर्यात...को चिन्हित किया गया है।
सीतारमण ने नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को पूरी तरह से आयकर से छूट देने की घोषणा की। आयकर छूट नई कर व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले आयकरदाताओं को मिलेगी।
वेतनभोगी करदाताओं के लिए 75,000 रुपये की मानक कटौती के साथ अब 12.75 लाख रुपये तक कोई कर नहीं लगेगा।
उन्होंने कर स्लैब में भी बदलाव किया है। इससे 25 लाख रुपये तक सालाना कमाने वालों को कर में 1.1 लाख रुपये की बचत होगी।
वित्त मंत्री ने बजट के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि आयकर छूट सीमा को सात लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने से एक करोड़ लोगों को कोई कर नहीं देना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कर स्लैब में बदलाव से 6.3 करोड़ लोगों यानी 80 प्रतिशत से अधिक करदाताओं को लाभ होगा।
सीतारमण ने संसद में 2025-26 का बजट पेश करते हुए कहा, ‘‘नई कर व्यवस्था में छूट के माध्यम से मध्यम वर्ग के करों में काफी कमी आएगी और उनके हाथ में अधिक पैसा बचेगा, जिससे घरेलू उपभोग, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘विकसित भारत की दिशा में लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और मांग हमारे प्रमुख समर्थक स्तंभ हैं। मध्यम वर्ग भारत की वृद्धि को ताकत प्रदान करता है...उनके योगदान को देखते हुए, हमने उनके कर के बोझ को समय-समय पर कम किया है।’’
इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज पर कर छूट सीमा को मौजूदा 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है।
सीतारमण ने लोकसभा में अपना लगातार आठवां बजट पेश करते हुए अगली पीढ़ी के सुधारों का खाका भी पेश किया। उन्होंने बीमा क्षेत्र में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेश निवेश) सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के साथ ही कर कानूनों को सरल बनाने का भी प्रस्ताव किया।
इसके साथ सामाजिक क्षेत्रों के लिए आवंटन बढ़ाने के साथ-साथ गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए उपाय किये हैं। साथ ही बुनियादी ढांचे पर खर्च जारी रखा है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस बजट का लक्ष्य पहले पांच वर्षों के दौरान छह क्षेत्रों... कराधान, बिजली क्षेत्र, शहरी विकास, खनन, वित्तीय क्षेत्र और नियामकीय क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधार शुरू करना है। ये हमारी वृद्धि क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएंगे।’’
कर मोर्चे पर सुधार के तहत सीतारमण ने आयकर प्रावधानों के नियमन संबंधी छह दशक पुराने कानून की जगह एक सरल कानून लाने का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा कि नए आयकर कानून में ‘न्याय’ की भावना होगी और यह ‘पहले विश्वास करो, बाद में जांच करो’ के सिद्धांत पर काम करेगा।
उन्होंने बजट में की गई तमाम घोषणाओं के बावजूद राजकोषीय मजबूती की राह को नहीं छोड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे के अनुमान को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य तय किया गया है।
चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए सरकार अगले वित्त वर्ष में बाजार से 11.54 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आम बजट को ‘ऐतिहासिक’ करार देते हुए कहा कि ये हर भारतीय के सपनों को पूरा करेगा, ‘विकसित भारत’ के मिशन को आगे ले जाएगा और साथ ही विकास, निवेश और उपभोग को कई गुना बढ़ाएगा।
एक वीडियो के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया में मोदी ने कहा ये बजट न केवल देश की वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है, बल्कि भविष्य की तैयारी करने में भी मदद करता है।
सीतारमण के बजट में की गयी घोषणाओं का मकसद उपभोग और निवेश दोनों को बढ़ावा देना है। इससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वृद्धि परिदृश्य को मजबूत करते हुए घरेलू आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बजट में बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर बनाए रखते हुए एमएसएमई और कृषि क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं। कुछ जीवन रक्षक दवाओं पर शुल्क में कटौती की भी घोषणा की गई।
बजट में घोषणाओं से होने वाले राजस्व नुकसान के बीच संतुलन बनाये रखने के लिए पूंजीगत व्यय में मामूली वृद्धि की गयी है और इसे 11.21 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का बजट अनुमान रखा था लेकिन संशोधित अनुमानों के मुताबिक, व्यय 10.18 लाख करोड़ रुपये रहेगा।
रिजर्व बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले लाभांश से भी राजस्व नुकसान की भरपाई में मदद मिलेगी।
यह बजट ऐसे समय आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी के बाद से अपनी धीमी गति से बढ़ रही है। नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत समेत अन्य देशों पर शुल्क लगाने की चेतावनी से भी चिंता बढ़ी है।
उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर चार साल के निचले स्तर 6.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष में इसके 6.3 से 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी है, जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक आठ प्रतिशत की वृद्धि से काफी कम है।
अन्य उपायों में दालों और कपास के उत्पादन पर विशेष ध्यान देने के साथ उच्च उपज वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन, कृषकों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के तहत कर्ज सीमा को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करना, विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मिशन की शुरूआत शामिल हैं।
सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में कुल व्यय 50.65 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वहीं शुद्ध कर प्राप्तियां 28.37 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है। उधारी को छोड़कर कुल प्राप्तियां 34.96 लाख रुपये रहने का अनुमान है।
इसके साथ, वित्त वर्ष 2024-25 में कुल व्यय का संशोधित अनुमान 47.16 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जिसमें पूंजीगत व्यय 10.18 लाख करोड़ रुपये है। कर्ज के अलावा कुल प्राप्तियों का संशोधित अनुमान 31.47 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें शुद्ध कर प्राप्तियां 25.57 लाख करोड़ रुपये हैं।
भाषा रमण