बजट में कृषि क्षेत्र के लिए छह नई योजनाएं, किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई
राजेश राजेश अजय
- 01 Feb 2025, 07:01 PM
- Updated: 07:01 PM
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कृषि-उत्पादकता और गांव के स्तर पर समृद्धि को बढ़ाने के मकसद से छह नई योजनाओं की घोषणा की तथा सब्सिडी वाले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से ऋण प्राप्त करने की सीमा को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया। इससे 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों को फायदा होगा।
ये घोषणाएं ऐसे समय में की गई हैं जब सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कृषि मंत्रालय का बजट आवंटन 2.75 प्रतिशत घटाकर 1.37 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इस कमी की भरपाई संबद्ध क्षेत्रों के लिए बढ़े हुए आवंटन से हुई है, जिसमें मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए आवंटन को 37 प्रतिशत बढ़ाकर 7,544 करोड़ रुपये और खाद्य प्रसंस्करण के लिए आवंटन को 56 प्रतिशत बढ़ाकर 4,364 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और खाद्य प्रसंस्करण के लिए कुल बजट आवंटन वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.45 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। नई योजनाओं के लिए आवंटन विस्तृत होने के बाद इसके चालू वर्ष के संशोधित अनुमान 1.47 लाख करोड़ रुपये को पार करने की उम्मीद है।
संसद में अपना आठवां बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कृषि को ‘वृद्धि का पहला इंजन’ बताया और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का प्रस्ताव किया। यह सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य कम उत्पादकता, कम फसल लेने वाले क्षेत्र (जिन स्थानों पर दो या तीन की जगह कम या केवल एक ही फसल ली जाती हो) और ऋण लेने के औसत मापदंडों से कम ऋण लेने वाले 100 कृषि-जिलों को लक्षित करना है।
राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में लागू की जाने वाली इस योजना से कृषि उत्पादकता बढ़ने, फसल विविधीकरण और कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे में सुधार के जरिये 1.7 करोड़ किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, छह वर्षीय दाल मिशन को तुअर, उड़द और मसूर उत्पादन को बढ़ाने के लिए 1,000 करोड़ रुपये मिले हैं। इस पहल के तहत नेफेड और एनसीसीएफ औपचारिक समझौतों के माध्यम से पंजीकृत किसानों से चार साल तक दालें खरीदेंगे।
बजट में सब्जियों एवं फलों पर व्यापक बागवानी कार्यक्रम तथा अतिरिक्त लम्बाई वाली किस्मों को बढ़ावा देने वाले पांच वर्षीय कपास मिशन के लिए 500-500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
बिहार के मखाना क्षेत्र के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में सुधार के लिए एक समर्पित मखाना बोर्ड की स्थापना की जाएगी। बोर्ड किसानों को एफपीओ में संगठित करेगा और सरकारी योजना के लाभ तक पहुंच सुनिश्चित करते हुए प्रशिक्षण सहायता प्रदान करेगा।
बिहार के लिए 100 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक समर्पित मखाना बोर्ड और जलवायु-अनुकूल बीजों पर केंद्रित एक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र मिशन को समान आवंटन प्राप्त हुआ।
मछली और जलीय कृषि में 60,000 करोड़ रुपये के समुद्री खाद्य निर्यात के साथ, भारत की दूसरे सबसे बड़े वैश्विक उत्पादक के रूप में स्थिति को मान्यता देते हुए, सरकार ने भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए एक स्थायी मछली पकड़ने की रूपरेखा की घोषणा की, जिसमें विशेष रूप से अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह पर ध्यान केंद्रित किया गया।
वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए सरकार ने इसके अनुरूप उत्पादों के निर्माण और निर्यात के लिए फ्रोजन फिश पेस्ट (सुरीमी) पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) को 30 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा। इसने मछली और झींगा फ़ीड के निर्माण के लिए मछली हाइड्रोलाइज़ेट पर बीसीडी को 15 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव किया है।
सहकारिता मंत्रालय को आवंटन 58.21 प्रतिशत बढ़ाकर 1,186.29 करोड़ रुपये किया गया है।
प्रमुख योजनाओं को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए आवंटन (41.66 प्रतिशत बढ़कर 8,500 करोड़ रुपये), राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (छह गुना बढ़कर 616.01 करोड़ रुपये), कृषि उन्नति योजना (12.58 प्रतिशत बढ़कर 8,000 करोड़ रुपये) और नमो ड्रोन दीदी (दो गुना बढ़कर 676.85 करोड़ रुपये) बढ़ाया गया है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का आवंटन 64.33 प्रतिशत बढ़कर 2,465 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पशुपालन और डेयरी कार्यक्रमों में यह दोगुना होकर 1,050 करोड़ रुपये हो गया है। सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के लिए पीएम-एफएमई योजना को 67 प्रतिशत अधिक आवंटन यानी 2,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ हैं।
बजट पर टिप्पणी करते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह एक दूरदर्शी बजट है, जिसमें समाज के हर वर्ग के साथ-साथ हर क्षेत्र का ध्यान रखा गया है।
बजट में कृषि और किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। चौहान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इसमें विश्वास की खुशबू है, विकास की तड़प है और विकसित भारत के निर्माण की बैचैनी है।’’
उन्होंने कहा कि बजट का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है।
सरकार ने असम के नामरूप में 12.7 लाख टन वार्षिक क्षमता वाले एक नए यूरिया संयंत्र की योजना की भी घोषणा की तथा सहकारी क्षेत्र के ऋण परिचालन के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को समर्थन बढ़ाने की घोषणा की।
भाषा राजेश राजेश