यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के निपटान की योजना से घबराने की कोई जरूरत नहीं : कैबिनेट मंत्री
हर्ष नोमान
- 30 Jan 2025, 08:51 PM
- Updated: 08:51 PM
इंदौर, 30 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के पीथमपुर की एक अपशिष्ट निपटान इकाई में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे के सुरक्षित निपटान के पक्के इंतजामों का भरोसा दिलाते हुए राज्य के काबीना मंत्री विजय शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस अपशिष्ट को नष्ट किए जाने की योजना से लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था। इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है।
भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग मंत्री शाह ने इंदौर में ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से कहा,‘‘भोपाल गैस त्रासदी को 40 साल से ज्यादा हो गए हैं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि आम तौर पर 25 साल से ज्यादा समय तक पड़े रहने पर किसी औद्योगिक अपशिष्ट का हानिकारक प्रभाव खत्म हो जाता है।’’
उन्होंने कहा कि पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के कचरे के सुरक्षित निपटान की प्रक्रिया शीर्ष अदालत, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में संपन्न होगी।
शाह ने कहा,‘‘इस प्रक्रिया से घबराने की कोई बात नहीं है।’’
कैबिनेट मंत्री ने हालांकि स्पष्ट नहीं किया कि भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने के कचरे को नष्ट किए जाने की प्रक्रिया कब शुरू होगी।
शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर ‘‘जन संवाद’’ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि लोगों में इस कचरे के निपटान की प्रक्रिया को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके।
‘‘जन संवाद’’ कार्यक्रम के दौरान बांटे जा रहे पर्चे के मुताबिक, यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे में मुख्य रूप से इस बंद पड़ी इकाई के परिसर की मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थाल अवशेष और "अर्द्ध प्रसंस्कृत अवशेष" शामिल हैं।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस पर्चे में कहा गया कि वैज्ञानिक प्रमाणों के मुताबिक इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल रसायनों का प्रभाव अब ‘‘लगभग नगण्य’’ हो चुका है।
पर्चे में कहा गया है कि फिलहाल इस कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का कोई अस्तित्व नहीं है और इसमें किसी तरह के रेडियोएक्टिव कण भी नहीं हैं।
भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने का 337 टन कचरा दो जनवरी को पीथमपुर में एक निजी कंपनी की संचालित अपशिष्ट निपटान इकाई लाया गया था। इसके बाद पीथमपुर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इंदौर के पास स्थित इस औद्योगिक क्षेत्र में हालात फिलहाल शांतिपूर्ण हैं।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने छह जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के निपटान के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए छह सप्ताह के भीतर कदम उठाए।
शाह के पास जनजातीय कार्य विभाग भी है। आदिवासियों के धर्मांतरण को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि यह उनका ‘‘व्यक्तिगत विचार’’ है कि अगर कोई व्यक्ति अपना मूल धर्म, रीति-रिवाज और परंपराएं छोड़कर अन्य धर्म अपनाता है, तो उसे उन लाभों से वंचित किया जाना चाहिए जो सरकार द्वारा उसके ‘‘मूल वर्ग’’ को दिए जाते हैं।
भाषा हर्ष