उप्र : महाकुंभ में बिछड़े कुछ लोग परिजनों से मिले, कई अब भी लापता
राजेंद्र मनीषा रंजन
- 30 Jan 2025, 01:56 PM
- Updated: 01:56 PM
महाकुंभ नगर, 30 जनवरी (भाषा) महाकुंभ हादसे को करीब 24 घंटे बीत चुके हैं, पर ग्वालियर से 15 लोगों के साथ आई शकुंतला देवी को अब भी उनके अपने तलाश रहे हैं.. उनके भतीजे जितेंद्र साहू बदहवास से हैं।
जितेंद्र ने रुंधे हुए गले से पीटीआई -भाषा को बताया, "कल हादसे के बाद से बुआ का कोई पता नहीं चल रहा.. बुआ के गले में परिचय पत्र है, पर उनका ना फोन लग रहा है, ना ही उन्होंने किसी से संपर्क किया.. क्या करें समझ नहीं आ रहा।"
बुधवार तड़के एक से दो बजे के बीच बेकाबू भीड़ बैरियर को ध्वस्त करते हुए उन श्रद्धालुओं पर चढ़ गई जो 144 साल बाद के बहुप्रचारित शुभ मुहूर्त में अमृत स्नान करने के लिए घाट के रास्ते पर देर रात से ही डटे हुए थे।
इस घटना के कुछ 18 घंटे बाद मेला प्रशासन ने बुधवार शाम एक संक्षिप्त प्रेस वार्ता में यह बताया कि 30 लोग भगदड़ में मारे गए हैं और 60 घायल हैं।
मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं.. पर तब से जितेंद्र जैसे ही कई लोग हैं जो अब भी अपनों को ढूंढ रहे हैं।
तब से अब तक लापता हुए लोगों में से कुछ तो अपने परिजनों से मिल गए हैं, लेकिन जितेंद्र जैसे कई लोग अब भी लापता परिजनों की तलाश में परेशान हैं। लापता लोगों में अधिक संख्या महिलाओं की है।
हमीरपुर के ढीहा डेरा गांव की फूली निषाद भी मौनी अमावस्या के दिन से ही लापता हैं।
फूली के बेटे राजेश निषाद ने बताया, “कुंभ मेले में उनकी मां, पिता जी, मामा और मौसी गंगा स्नान करने गए थे। मौनी अमावस्या के दिन शाम को स्नान करने के बाद वह भटक गईं और अब तक उनका पता नहीं चला है। घरवाले भी परेशान हैं।”
वहीं, देवरिया से 6-7 रिश्तेदारों के साथ मौनी अमावस्या पर स्नान करने आईं माया सिंह भी मेले में लापता हो गईं। उनके पति जनार्दन सिंह ने बताया, “ये सभी लोग बनारस से सहसों चौराहे पर पहुंच जहां गाड़ी पार्क कर ये सभी मेले में आए और गंगा स्नान किया।”
उन्होंने बताया, “सभी लोग स्नान करके वापस जाने के लिए सहसों चौराहे पर पहुंचे, लेकिन भीड़ अधिक होने से माया सिंह उसी चौराहे पर कहीं भटक गईं। हर जगह संपर्क करने के बावजूद अभी तक उनका पता नहीं चला।”
हालांकि, पीटीआई-भाषा को कई ऐसे लोग भी मिले जो मेले में बिछड़े पर अपने परिजनों से या तो मेला क्षेत्र में ही मिल गए या किसी तरह अपने घर पहुंच गए। ऐसे लोगों में ओड़िशा के केंद्रपाड़ा की रेनू लता नंदी हैं जो मंगलवार रात गंगा स्नान करने के बाद अपने साथ आए लोगों से बिछड़ गई थीं।
रेनू लता नंदी के बेटे अमर कुमार नंदी ने बताया, “मेरा मां परसों रात में गंगा स्नान के बाद बिछड़ गई थीं। भगदड़ की घटना के बाद से हमें उनकी बहुत अधिक चिंता थी। लेकिन आज सेक्टर 20 में गांव के ही एक आदमी से उनकी भेंट हो गई। ओड़िशा से 26 लोगों का समूह मेले में आया है और सभी अब बहुत खुश हैं।”
इसी तरह, अलीगढ़ से अकेले ही गंगा स्नान करने महाकुंभ में आईं 68 वर्षीय स्नेहलता भी मंगलवार को भटक गई थीं और मेले में उनका पर्स और सामान गुम हो गया था। हालांकि वह किसी तरह बुधवार की रात ट्रेन से अलीगढ़ पहुंच गईं।
स्नेहलता के बेटे ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि उनकी मां अकेले ही तीर्थ पर जाती हैं क्योंकि पापा के पैर में दिक्कत है। मां किसी तरह ट्रेन से कल रात घर पहुंच गईं, और उनका पर्स और सामान भी मिल गया है और वह सेक्टर चार के खोया पाया केंद्र में रखा है।
बुधवार को सेक्टर 4 स्थित भारत सेवा दल के भूले भटके शिविर का संचालन करने वाले उमेश चंद्र तिवारी ने बताया, इस बार डिजिटल खोया पाया केंद्र बनने से ज्यादातर लोग उधर ही संपर्क कर रहे हैं और डिजिटल खोया पाया केंद्र हमसे भी समन्वय स्थापित कर लोगों की तलाश में हमारी मदद ले रहा है।
डिजिटल खोया पाया केंद्र परिसर में बुधवार की शाम सैकड़ों की संख्या में लोग थकान की वजह से जहां तहां लेटे हुए आराम करते दिखे और केंद्र के लोगों से संपर्क नहीं हो सका।
भाषा राजेंद्र मनीषा