जीबी रोड पर काम करने वाली यौन कर्मी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित
नोमान माधव
- 27 Jan 2025, 08:40 PM
- Updated: 08:40 PM
(श्रुति भारद्वाज)
नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) दिल्ली के मध्य में स्थित जीबी रोड नाम से जाने जाने वाले स्वामी श्रद्धानंद मार्ग में यौनकर्मियों को बिजली, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छ रहने की स्थिति जैसी बुनियादी सुविधाओं तक हासिल के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ता है।
दिल्ली में पांच फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने कमर कस ली और अब प्रचार पर जोर पकड़ रहा है। मगर इन यौनकर्मियों को उम्मीद है कि राष्ट्रीय राजधानी में आठ फरवरी के बाद बनने वाली नयी सरकार उनके दीर्घकालिक मुद्दों का समाधान करेगी।
जीबी रोड का कुछ हिस्सा बल्लीमारान और कुछ हिस्सा मटिया महल विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है।
पिछले 30 सालों से यौन कर्मी के तौर पर काम कर रहीं सावित्री (बदला हुआ नाम) ने राजनीतिक नेताओं की ओर से ध्यान न दिए जाने पर दुख जताया।
उन्होंने कहा, "हम भी बाकी लोगों की तरह वोट डालते हैं, लेकिन हमें सबसे कम तवज्जो दी जाती है। हम एक ऐसी जिंदगी जीते हैं, जिसमें चार या पांच महिलाएं एक ही कमरे में रहती हैं। कम से कम 10 से 15 महिलाएं एक ही मंजिल पर रहती हैं, और हम सभी के लिए सिर्फ एक ही शौचालय है।"
लगभग 30 साल रेशमा (बदला हुआ नाम) ने अपर्याप्त पानी और सफाई के कारण अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों से होने वाली परेशानियों को बताया।
उन्होंने बताया कि सुबह के समय तीन से चार घंटे तक बिजली नहीं रहती और रात में भी यही स्थिति रहती है। सर्दियों में तो किसी तरह से काम चल जाता है, लेकिन गर्मियों में तो यह असहनीय हो जाता है।
उन्होंने बताया कि उनके कमरों में हवा या धूप के लिए उचित खिड़कियां भी नहीं हैं।
वेश्यालयों में तंग और बंद कमरे मिलेंगे, जिनमें एक बेड रखने के लिए भी जगह नहीं है। शौचालयों की संकरी नालियां उनके दरवाजों के ठीक बाहर बहती हैं, जिससे स्थिति और बदतर हो जाती है।
इन चुनौतियों के बावजूद, राजनीतिक नेता अपने प्रचार के दौरान शायद ही कभी जी.बी. रोड की स्थिति पर बात करते हैं।
एक दशक से अधिक समय से इस क्षेत्र में रह रही रही यौन कर्मी रानी (बदला हुआ नाम) ने कहा, "हर चुनाव में नेता आते हैं और वादे करते हैं, लेकिन कभी कुछ नहीं बदलता।"
एक अन्य यौन कर्मी ने बुनियादी अवसंरचना की कमी को लेकर दुख जताया।
उन्होंने कहा, “पानी की लाइनें तो महीने से टूटी हुई हैं, लेकिन कोई इन्हें ठीक नहीं करता है। पानी गंदा आता है, लेकिन कोई विकल्प नहीं होने की वजह से इसे ही इस्तेमाल करना पड़ता है।”
एक अन्य महिला (70) ने कहा, “ हमारे पास राशन कार्ड भी नहीं है। कई एनजीओ आते हैं और हमारी समस्याएं सुनते हैं, लेकिन कोई भी हमें यह नहीं बताता कि हम क्या कर सकते हैं या हमारी ज़िंदगी को थोड़ा बेहतर बनाने में हमारी मदद कैसे कर सकते हैं।”
दिलचस्प बात है कि स्वामी श्रद्धानंद मार्ग (जीबी रोड) पर हार्डवेयर का एशिया का सबसे बड़ा बाजार है।
आज, जी.बी. रोड पर लगभग 74 वेश्यालय हैं, जिनमें सैकड़ों महिलाएं रहती हैं, और इनमें से कई की तस्करी कर लाई गई हैं।
भाषा नोमान