उत्तराखंड में लागू यूसीसी को जमीयत उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी
नोमान नोमान अविनाश
- 27 Jan 2025, 08:22 PM
- Updated: 08:22 PM
नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने उत्तराखंड में सोमवार से लागू की गई समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को भेदभावपूर्ण और पूर्वाग्रह पर आधारित बताते हुए कहा कि इसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी जाएगी।
जमीयत के दोनों समूहों ने अलग-अलग बयान जारी कर कहा कि समान नागरिक संहिता संविधान में मौजूद धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है तथा यह मुसलमानों को “किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।”
बयान के मुताबिक, जमीयत (एएम) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने यह संहिता बनाने के उत्तराखंड सरकार के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन के वकीलों ने इस कानून के संवैधानिक और कानूनी पहलुओं की गहन जांच की है और इसका मानना है कि यह कानून भेदभावपूर्ण और पूर्वाग्रह पर आधारित है।
उन्होंने कहा, “ लिहाज़ा इसे नैनीताल उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।”
अरशद मदनी (81) ने कहा कि यूसीसी में संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है, क्योंकि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत उनके अधिकारों को सुरक्षा प्रदान की गई है ।
बुजुर्ग मुस्लिम नेता ने पूछा “हमें संविधान की अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक आज़ादी क्यों नहीं दी जा सकती है जिसमें नागरिकों के मौलिक अधिकारों को मान्यता देकर धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है। इस प्रकार देखा जाए तो समान नागरिक संहिता मौलिक अधिकारों को नकारती है।”
उन्होंने कहा कि पूरे देश में दीवानी कानून एक जैसा नहीं है तो परिवार के मामले से जुड़े कानूनों को एक समान करने पर जोर क्यों दिया जा रहा है?
अशरद मदनी ने कहा, “हमारा देश बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक है, यही उसकी विशेषता भी है, इसलिए यहां एक कानून नहीं चल सकता।”
इस बीच जमीयत (एमएम) के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने एक बयान में कहा कि संबंधित पक्षों, विशेष रूप से मुस्लिम अल्पसंख्यकों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तराखंड में यूसीसी को लागू करना इंसाफ के खिलाफ है।
राज्यसभा के पूर्व सदस्य ने दावा किया कि विधि आयोग को भेजे गए सुझावों में अधिकतर लोगों ने साफ कर दिया था कि वे इस तरह की संहिता नहीं चाहते हैं और आयोग ने इसलिए सरकार को सलाह दी थी कि यूसीसी न तो वांछनीय है और न ही इसकी कोई आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संविधान के निर्माताओं ने पर्सनल लॉ की रक्षा करने का वादा किया था और अगर सरकार इस वादे से मुकरती है तो “हम इसके विरुद्ध कानून और संविधान के दायरे में रह कर संघर्ष करेंगे।”
साल 1919 में स्थापित जमीयत ने आज़ादी के आंदोलन में भूमिका बनाई थी, लेकिन यह संगठन अब दो समूह में बंटा हुआ है। एक समूह की अगुवाई मौलाना अरशद मदनी करते हैं जबकि दूसरे समूह के अध्यक्ष उनके भतीजे महमूद मदनी हैं।
उत्तराखंड में सोमवार को सभी नागरिकों को एक समान अधिकार प्रदान करने के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी गयी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रिमोट के माध्यम से अधिसूचना जारी कर यूसीसी को लागू किया ।
भाषा नोमान नोमान