‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ साहसपूर्ण दूरदर्शिता का प्रयास, सुशासन के नये आयाम खुलेंगे: राष्ट्रपति मुर्मू
हक माधव पारुल
- 25 Jan 2025, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने संबंधी सरकार की पहल को "साहसपूर्ण दूरदर्शिता" का एक प्रयास बताया और कहा कि "एक राष्ट्र, एक चुनाव" से सुशासन को नये आयाम दिए जा सकते हैं तथा इससे शासन में निरंतरता को बढ़ावा मिल सकता है और वित्तीय बोझ को कम किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए सरकार के कई सुधारात्मक और कल्याणकारी कदमों तथा कानूनों का उल्लेख किया और कहा कि हाल के दौर में औपनिवेशिक मानसिकता को बदलने के ठोस प्रयास हमें दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सांस्कृतिक विरासत के साथ देश का जुड़ाव और गहरा हुआ है तथा प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ उस समृद्ध विरासत की प्रभावी अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है।
राष्ट्रपति ने देश के आर्थिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने वित्तीय समावेशन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और साहसिक एवं दूरदर्शी आर्थिक सुधारों के बल पर आने वाले वर्षों में तरक्की की यह रफ्तार बनी रहेगी।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले दशक में शिक्षा की गुणवत्ता, भौतिक अवसंरचना तथा डिजिटल समावेशन के आयामों में व्यापक बदलाव आया है।
मुर्मू ने कहा, "वर्ष 1947 में हमने स्वाधीनता प्राप्त कर ली थी, लेकिन औपनिवेशिक मानसिकता के कई अवशेष लंबे समय तक विद्यमान रहे। हाल के दौर में, उस मानसिकता को बदलने के ठोस प्रयास हमें दिखाई दे रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों में-भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लागू करने का निर्णय सर्वाधिक उल्लेखनीय है।
राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय शास्त्र की भारतीय परंपराओं पर आधारित इन नये अधिनियमों द्वारा दंड के स्थान पर न्याय प्रदान करने की भावना को आपराधिक न्याय प्रणाली के केंद्र में रखा गया है।
मुर्मू ने कहा कि देश में चुनावों को एक साथ संपन्न कराने के लिए संसद में पेश किया गया विधेयक एक और ऐसा प्रयास है, जिसके जरिये सुशासन को नये आयाम दिए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा, "'एक राष्ट्र एक चुनाव’ की व्यवस्था से शासन में निरंतरता को बढ़ावा मिल सकता है, नीति-निर्धारण से जुड़ी निष्क्रियता समाप्त की जा सकती है, संसाधनों के अन्यत्र खर्च हो जाने की संभावना कम हो सकती है तथा वित्तीय बोझ को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, जनहित में अनेक अन्य लाभ भी हासिल हो सकते हैं। "
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ और उससे जुड़े ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ को बीते शीतकालीन सत्र के दौरान निचले सदन में पेश किया गया था और फिर इन पर विचार के लिए संसद की 39 सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया।
संविधान के महत्व का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने पिछले 75 वर्षों में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, ''स्वाधीनता के समय देश के बड़े हिस्से में घोर गरीबी और भुखमरी की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन, हमारा आत्म-विश्वास कभी डिगा नहीं। हमने ऐसी परिस्थितियां बनाने का संकल्प लिया, जिनमें सभी को विकास करने का अवसर मिल सके।''
किसानों और मजदूरों के योगदान को रेखांकित करते राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अब वैश्विक आर्थिक रुझानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा इस परिवर्तन का आधार संविधान द्वारा स्थापित रूपरेखा है।
राष्ट्रपति ने हाल के वर्षों में लगातार उच्च आर्थिक विकास दर को रेखांकित किया, जिससे रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, किसानों और मजदूरों की आय में वृद्धि हुई है और बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
उन्होंने समावेशी विकास के महत्व और कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया, जिससे नागरिकों के लिए आवास और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकताएं सुनिश्चित हो सकें।
राष्ट्रपति ने हाशिये पर पड़े समुदायों, विशेषकर अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को सहायता प्रदान करने के प्रयासों का जिक्र किया।
मुर्मू ने कहा, ‘‘अनुसूचित जातियों के युवाओं के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियां, राष्ट्रीय फेलोशिप, विदेशी छात्रवृत्तियां, छात्रावास और कोचिंग सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के जरिये रोजगार और आमदनी के अवसर उत्पन्न करके अनुसूचित जातियों के लोगों की गरीबी को तेजी से कम किया जा रहा है।’’
उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि अनुसूचित-जनजाति-समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए विशेष योजनाएं बनाई गई हैं, जिनमें धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) शामिल हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदायों के लिए ‘विकास एवं कल्याण बोर्ड’ का गठन किया गया है।’’
उन्होंने महाकुंभ का जिक्र करते हुए कहा, "हमारी सांस्कृतिक विरासत के साथ हमारा जुड़ाव और अधिक गहरा हुआ है। इस समय आयोजित हो रहे प्रयागराज महाकुंभ को उस समृद्ध विरासत की प्रभावी अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है।"
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि परंपराओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित करने तथा उनमें नयी ऊर्जा का संचार करने के लिए संस्कृति के क्षेत्र में अनेक उत्साहजनक प्रयास किए जा रहे हैं।
मुर्मू ने कहा कि संविधान भारतवासियों की सामूहिक अस्मिता का मूल आधार है और यह ‘‘विलक्षण ग्रंथ’’ सभी नागरिकों को एक परिवार की तरह एकता के सूत्र में पिरोता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में जो आज व्यापक परिवर्तन हुआ है, वह संविधान में निर्धारित रूपरेखा के बिना संभव नहीं हो सकता था।
मुर्मू ने कहा, ‘‘भारत के गणतांत्रिक मूल्यों का प्रतिबिंब हमारी संविधान सभा की संरचना में भी दिखाई देता है। उस सभा में देश के सभी हिस्सों और सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व था। सबसे अधिक उल्लेखनीय बात यह है कि संविधान सभा में सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, हंसाबेन मेहता और मालती चौधरी जैसी 15 असाधारण महिलाएं भी शामिल थीं।’’
उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में जब महिलाओं की समानता को एक सुदूर आदर्श समझा जाता था, तब भारत में महिलाएं, राष्ट्र की नियति को आकार देने में सक्रिय योगदान दे रही थीं।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमारा संविधान एक जीवंत दस्तावेज इसलिए बन पाया, क्योंकि नागरिकों की निष्ठा, सदियों से हमारी नैतिकता-परक जीवन-दृष्टि का प्रमुख तत्व रही है। हमारा संविधान, भारतवासियों के रूप में, हमारी सामूहिक अस्मिता का मूल आधार है, जो हमें एक परिवार की तरह एकता के सूत्र में पिरोता है।’’
उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों से संविधान ने देश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है।
मुर्मू ने कहा, ‘‘जब आज के बच्चे वर्ष 2050 की 26 जनवरी के दिन राष्ट्र-ध्वज को सलामी दे रहे होंगे, तब वे अपनी अगली पीढ़ी को यह बता रहे होंगे कि हमारे देश की गौरव यात्रा, हमारे अतुलनीय संविधान से प्राप्त मार्गदर्शन के बिना संभव न हुई होती।’’
उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ‘स्पेस डॉकिंग प्रयोग’ (स्पेडेक्स) के तहत उपग्रहों की सफल ‘डॉकिंग’ का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘इसरो ने हाल के वर्षों में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बहुत बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इस महीने, इसरो ने अपने सफल ‘स्पेस डॉकिंग’ प्रयोग से देश को एक बार फिर गौरवान्वित किया है। भारत अब विश्व का चौथा देश बन गया है, जिसके पास यह क्षमता उपलब्ध है।’’
मुर्मू ने कहा कि ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ प्रकृति के रहस्यों की खोज का एक रोचक अभियान होने के साथ ही भारतीय विज्ञान के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय भी है।
उन्होंने खेल के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र किया और कहा कि ‘‘एक राष्ट्र के रूप में हमारा बढ़ता आत्मविश्वास खेल क्षेत्र में भी दिखाई देता है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि देश भर में जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण सुविधाओं में बहुत सुधार हुआ है और इसके बल पर हमारे खिलाड़ियों ने विजयी होकर हमें गौरवान्वित किया है तथा उन्होंने अगली पीढ़ी को और भी ऊंचे लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया है।
भाष
हक माधव