सहायता कर्मियों पर इजराइल का हमला कोई नई बात नहीं थी: अधिकार समूह
सिम्मी सुरेश
- 06 Apr 2024, 03:12 PM
- Updated: 03:12 PM
काहिरा, छह अप्रैल (एपी) इजराइल ने गाजा में उसके हमले में सहायताकर्मियों की मौत की घटना को लेकर भले ही अपनी गलती स्वीकार की हो, लेकिन अधिकार समूहों का कहना है कि सोमवार रात को हुई गलती कोई नयी घटना नहीं थी।
इजराइल की सेना के अनुसार, उसकी दो गलतियों के कारण यह घटना हुई। पहली गलती यह रही कि एक अधिकारी ने काफिले में वाहनों के विवरण वाले संदेश को नजरअंदाज कर दिया और दूसरी गलती यह रही कि एक सैन्यकर्मी ने एक कार में कुछ देखा जो संभवतः एक बैग था और उसे लगा कि यह कोई हथियार है। इसके कारण इजराइल ने हवाई हमले किए जिसमें सात सहायताकर्मियों की मौत हो गई।
अधिकार समूहों और सहायताकर्मियों का कहना है कि सोमवार रात को हुई गलती कोई असामान्य बात नहीं थी। उनका कहना है कि बड़ी समस्या सेना के नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि स्वयं नियम है।
हमास द्वारा पिछले साल सात अक्टूबर को किए गए हमलों के बाद इजराइल ने गाजा पर हमला शुरू किया था। अधिकार समूहों और सहायता कर्मियों ने कहा कि ऐसा लगता है कि सेना ने इन हमलों के दौरान खुद को यह निर्धारित करने के लिए व्यापक छूट दी है कि लक्ष्य क्या है और इन हमलों में लक्ष्यों को निशाना बनाते समय कितने आम नागरिकों की मौत की वह अनुमति देता है।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजराइल के हमले में 33,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें से लगभग दो-तिहाई महिलाएं और बच्चे हैं।
इजराइली मानवाधिकार समूह बी’त्सेलम की प्रवक्ता सरित माइकली ने कहा कि ‘वर्ल्ड सेंट्रल किचन’ के कर्मियों पर हमले ने दुनिया का ध्यान केवल इसलिए आकर्षित किया, क्योंकि इसमें विदेशी लोग मारे गए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सोचना स्थिति पर नजर रख रहे हर एक व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का अपमान होगा कि यह एक अनोखा मामला है या एक दुर्लभ घटना है।’’
उन्होंने कहा कि हमले के नियमों की व्यापक जांच की जरूरत है।
इस बीच, गाजा में इजराइली हवाई हमलों में सात सहायताकर्मियों की मौत की घटना की इजराइल के कुछ सबसे निकट सहयोगियों ने कड़ी निंदा की है तथा यूरोपीय नेता संघर्षविराम की पुरजोर अपील कर रहे हैं और कुछ नेताओं ने तो इजराइल को हथियारों की बिक्री रोके जाने की भी वकालत की है।
फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा ऑस्ट्रेलिया ने इन हमलों की निंदा की है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एसोसिएट प्रोफेसर जूली नॉर्मन ने कहा कि यूरोप में संघर्ष को लेकर असहजता पहले से ही बढ़ रही थी और सोमवार के हमले ने ‘‘उसे और बढ़ा दिया तथा इसे और अधिक सार्वजनिक कर दिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जो बातें धीरे से कही जा रही थीं, वे अब और अधिक जोर से कही जा रही हैं।’’
एपी
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