रेलवे बोर्ड ने कड़े विरोध के बीच गैर-मान्यता प्राप्त यूनियन को कुछ सुविधाएं देने की घोषणा की
पारुल अविनाश
- 22 Jan 2025, 09:05 PM
- Updated: 09:05 PM
(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) रेलवे बोर्ड ने गैर-मान्यता प्राप्त ‘भारतीय रेलवे मजदूर संघ’ को कुछ सुविधाओं का लाभ देने की घोषणा की है। बोर्ड ने अन्य गैर-मान्यता प्राप्त यूनियन और उनसे जुड़े संगठनों के कड़े विरोध के बीच यह कदम उठाया है।
रेलवे बोर्ड ने हाल ही में गुप्त मतदान कराया था, जिसमें भारतीय रेलवे मजदूर संघ (बीआरएमएस) न्यूनतम 15 फीसदी वोट हासिल करने में नाकाम रहा था, जो मान्यता हासिल करने के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है।
गुप्त मतदान में केवल ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन (एआईआरएफ) और नेशनल फेडरेशन फॉर इंडियन रेलवेमेन (एनएफआईआर) आवश्यक वोट प्रतिशत प्राप्त करने में सफल साबित हुए थे, जिससे उन्हें बोर्ड की मान्यता मिल गई।
रेलवे बोर्ड द्वारा सभी जोन को 16 जनवरी को भेजे पत्र में कहा गया है, “भारतीय रेलवे मजदूर संघ (बीआरएमएस), जो एक गैर-मान्यता प्राप्त यूनियन है और जिसे पिछले गुप्त मतदान (एसबीई-2024) में सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों (चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स और रेल कोच फैक्टरी, कपूरथला) के कुल वोट का 10.12 फीसदी हासिल हुआ था, ने अनुरोध किया था कि एसबीई-2024 में उसके प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए उसे रेलवे कर्मचारियों की शिकायतें उठाने के लिए कुछ सुविधाएं दी जा सकती हैं।”
पत्र के मुताबिक, बोर्ड ने बीआरएमएस के अनुरोध और इस तथ्य पर विचार किया कि यूनियन ने एसबीई-2024 में सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों (चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स और रेल कोच फैक्टरी, कपूरथला) में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और एआईआरएफ तथा एनएफआईआर के बाद तीसरे नंबर पर रहा।
इसमें कहा गया है कि बोर्ड ने बीआरएमएस को रेलवे से जुड़े परिसरों में “वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अनौपचारिक बैठक” और “कार्यालय” जैसी यूनियन सुविधाएं देने का फैसला किया है।
पत्र के अनुसार, “बीआरएमएस के प्रतिनिधि विशेष आमंत्रित व्यक्ति के रूप में रेलवे बोर्ड स्तर के अधिकारियों से मिल सकेंगे। हालांकि, इसके लिए बीआरएमएस प्रतिनिधियों को कोई विशेष आकस्मिक अवकाश या पास प्रदान नहीं किया जाएगा।”
इसमें कहा गया है, “बीआरएमएस को नयी दिल्ली स्थित किसी भी रेलवे कार्यालय/परिसर में दफ्तर के लिए जगह प्रदान की जा सकती है, बशर्ते यह उपलब्ध हो।”
अन्य रेलवे कर्मचारी संगठनों और यूनियन ने इस फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
भारतीय रेलवे कर्मचारी महासंघ (आईआरईएफ) के अध्यक्ष मनोज पांडे ने बोर्ड को पत्र लिखकर बीआरएमएस की तरह ही आईआरईएफ को भी मान्यता देने की मांग की है।
पांडे ने दावा किया, “डब्ल्यूसीआरडब्ल्यूयू और एआरकेयू जैसे आईआरईएफ के सदस्य संघों ने एसबीई-3, 2024 में सराहनीय प्रदर्शन किया, 15 प्रतिशत से अधिक वैध वोट हासिल किए, जिससे उन्हें दावेदारी के लिए आवश्यक अर्हता प्राप्त हुई।”
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आईआरईएफ की मांग को नजरअंदाज किया गया तो वह अदालत का रुख कर सकता है।
पूर्वोत्तर रेलवे मेन्स कांग्रेस के केंद्रीय अध्यक्ष अखिलेश पांडे ने भी बोर्ड के फैसले पर आपत्ति जताई। अखिलेश ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रेलवे बोर्ड एक यूनियन को फायदा पहुंचाने के लिए अपने ही नियमों का उल्लंघन करता है।”
वहीं, ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक मेंटेनर्स यूनियन ने भी फैसले का विरोध किया और कहा कि बोर्ड अपनी मर्जी से किसी भी संगठन को विशेष सुविधाएं देने के लिए नहीं “चुन” सकता।
भाषा पारुल