दिल्ली विस चुनाव: उत्तर पूर्वी दिल्ली में बेरोजगारी, गंदगी और यातायात की समस्या से जूझ रही जनता
जितेंद्र माधव
- 22 Jan 2025, 05:56 PM
- Updated: 05:56 PM
(अपर्णा बोस)
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) दिल्ली विधानसभा चुनाव में महज अब कुछ सप्ताह का समय बचा है लेकिन उत्तर-पूर्वी दिल्ली की जनता के सामने अब भी बेरोजगारी, गंदगी, यातायात जाम और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई विधानसभा क्षेत्र फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से प्रभावित हुए थे।
प्रदर्शनों में 53 लोगों की मौत हो गयी थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
एक तरफ कुछ लोगों का दावा है कि हिंसा के बाद उन्हें सरकार से राहत मिली है तो वहीं अन्य लोगों ने अधिकारियों द्वारा उपेक्षा का आरोप लगाया।
सीलमपुर, जाफराबाद और मौजपुर इलाकों में रहने वाले लोगों ने गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से अपने संघर्ष को बयां करते हुए कहा कि इन चुनौतियों ने न केवल उनके दैनिक जीवन को बाधित किया बल्कि क्षेत्र में स्थानीय व्यवसायों को भी प्रभावित किया है।
सीलमपुर के रहने वाले जावेद खान (60) ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई उन महत्वपूर्ण मुद्दों में से हैं, जो जिले में मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करेंगी। खान ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हम चाहते हैं कि सरकार युवाओं को रोजगार दे। यहां लोग भूख से मर रहे हैं। राजनेता गरीबों को लूटते दिखते हैं। हम गरीबी और बढ़ती कीमतों से तंग आ चुके हैं।”
सत्रह साल से रेहड़ी लगा रहे 45 वर्षीय नैमुद्दीन ने खान के सुर में सुर मिलाते हुए कहा, “सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन हमारी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। असहनीय महंगाई है और गरीबों के लिए कोई विकास कार्य नहीं किया जा रहा है।”
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मतदाताओं ने क्षेत्र में युवाओं के लिए शिक्षा और बेरोजगारी के मुद्दे को हल करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
सीलमपुर के रहने वाले वाहिद हुसैन ने कहा, “सरकारों को युवाओं के लिए अच्छी शिक्षा और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा वे जीवन में गलत रास्ते पर जा सकते हैं।”
जाफराबाद में लोगों का कहना है कि यातायात जाम और गंदगी इस क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं हैं।
अल्लाहनूर ने कहा, “सीलमपुर से मौजपुर तक सड़क पर सिर्फ एक कट है, जिससे दुर्घटनाएं और जाम होता है। गरीबी यहां एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है।”
जाफराबाद के रहने वाले 55 वर्षीय व्यापारी सलीम अहमद ने भी जाम के कारण व्यवसाय प्रभावित होने की बात स्वीकारी और कहा, “सड़क बंद होने से लंबा जाम लग जाता है, जिससे व्यापारी और व्यवसायी प्रभावित होते हैं। मानसून के दौरान, जलभराव, बंद नालियां और भी अधिक समस्याएं पैदा करती हैं।”
इलाके के लोगों ने चुनाव के दौरान उम्मीदवारों द्वारा किए गए ‘खोखले वादों’ पर भी निराशा व्यक्त की।
मोहम्मद नसीम (42) ने राजनेताओं की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा, “चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में आए, उन्हें बेरोजगारी, शिक्षा और स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए। राजनेता प्रचार के दौरान वादे करते हैं और चुनाव खत्म होते ही हमें भूल जाते हैं।”
मौजपुर में गंदगी और जल निकासी भी गंभीर मुद्दे बने हुए हैं।
एमके चौधरी ने नामक मतदाता ने इलाके के मुद्दों पर कहा, “संकरी सड़कें और बंद सीवर यातायात के लिए खतरा पैदा करते हैं। वादों के बावजूद, किसी भी नेता ने हमारे लिए समर्पित रूप से काम नहीं किया।”
मौजपुर के एक अन्य निवासी रेयाजुद्दीन ने कहा कि सीवर के रिसाव से पीने के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा, “हम बार-बार शिकायत करते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। मानसून के दौरान कई लोग बीमार पड़ जाते हैं।”
मौजपुर के रहने वाले 24 वर्षीय शाहजेब आलम ने कहा, “सीवर जाम होने से बीमारियां होती हैं। स्वच्छ पानी और उचित जल निकासी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
मौजपुर में नालियां बह रही हैं, सड़कें जलमग्न हैं और लोगों को गंदे पानी से लबालब गलियों से निकलने के लिए ईंटों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
तीनों इलाकों के लोगों ने मांग की है कि सरकार रोजगार, शिक्षा, उचित स्वच्छता और यातायात प्रबंधन सहित बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दे।
भाषा जितेंद्र