बिहार: राजद नीत महागठबंधन में लौटे मुकेश सहनी, उनकी पार्टी तीन लोस सीट पर लड़ेगी चुनाव
संतोष गोला
- 05 Apr 2024, 11:08 PM
- Updated: 11:08 PM
(तस्वीरों के साथ)
पटना, पांच अप्रैल (भाषा) बिहार के विपक्षी महागठबंधन ने शुक्रवार को दावा किया कि राज्य के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की वापसी से उसे ताकत मिली है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा दरकिनार किये जाने के बाद से सहनी मुश्किलों से जूझ रहे थे।
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख सहनी का राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने गठबंधन में स्वागत किया। तेजस्वी ने बिहार में अपने कोटे की 26 सीट में से वीआईपी को तीन लोकसभा सीट की ‘सम्मानजनक’ हिस्सेदारी देने की भी घोषणा की।
यादव ने कहा, ‘‘राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने गोपालगंज, झंझारपुर और मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) सीट को वीआईपी को देने का फैसला किया है। हम मिलकर बिहार की सभी 40 सीट पर महागठबंधन की जीत सुनिश्चित करेंगे।’’
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले यादव पर ‘पीठ में छुरा घोंपने’ का आरोप लगाने के बाद महागठबंधन छोड़ने वाले सहनी ने इस प्रकरण को ‘छोटे भाई तेजस्वी के साथ टकराव’ बताकर खारिज कर दिया।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में वीआईपी को जितनी सीट मिली थी उतनी ही सीट इस बार के लोकसभा चुनाव में देने के लिए राजद नेता को धन्यवाद देते हुए सहनी ने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा ने मेरी छाती में छुरा घोंप दिया। मैंने उन्हें राज्य में सरकार बनाने में मदद की और उन्होंने मुझे कैबिनेट से बाहर कर दिया और मेरे सभी विधायकों को अपने पाले में कर लिया।
बॉलीवुड सेट डिजाइनर से नेता बने सहनी खुद को ‘मल्लाह का बेटा’ बताते हैं और ‘निषाद समाज’ के समर्थक हैं। निषाद एक व्यापक शब्द है जिसके अंतर्गत मछली पकड़ने के व्यवसाय में शामिल विभिन्न जातियां और उपजातियां आती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के अपने वादे से पीछे हट गई है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे भाइयों ने मां गंगा के नाम पर पार्टी को दंडित करने की कसम खाई है।’’
सहनी ने 2019 में खगड़िया से चुनाव लड़ा था, लेकिन यह सीट अब माकपा के पास है। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी में चर्चा के बाद इस बात पर फैसला लेंगे कि किस सीट से चुनाव लड़ना है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, ‘‘हमने न केवल लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह गठबंधन किया है, बल्कि विधानसभा चुनाव को भी ध्यान में रखा है जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बढ़ते अप्रत्याशित व्यवहार को देखते हुए उम्मीद से पहले हो सकता है।’’
जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) प्रमुख नीतीश कुमार इस साल जनवरी में राजग में लौट आए और उन्होंने 17 महीने तक चले महागठबंधन से नाता तोड़ लिया।
यादव ने बिहार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली का भी जिक्र किया और हंसते हुए कहा, ‘‘राज्य में राजग द्वारा मैदान में उतारे गए राजनीतिक वंशवाद के बारे में मेरी सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो गई है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि प्रधानमंत्री ने फिर से परिवारवाद के खिलाफ निंदा करने से परहेज किया।’’
यादव ने मोदी की उस टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई कि एलईडी बल्ब के युग ने लालटेन को अप्रचलित बना दिया है, जो राजद के चुनाव चिह्न के संदर्भ में थी।
राजद नेता ने कहा, ‘‘लालटेन का मतलब अंधेरा दूर करना है। बेहतर होगा कि वह सहयोगी जदयू के लिए अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें और उसे अपना चुनाव चिह्न तीर छोड़ने और उसकी जगह मिसाइल लाने के लिए कहें। भाजपा का अपना चुनाव चिह्न ‘फूल’ (कमल का फूल) हो सकता है, लेकिन पार्टी जनता को मूर्ख (फूल) बनाने के लिए जानी जाती है।”
इस बीच, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने सहनी की महागठबंधन में वापसी पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह घटनाक्रम विपक्षी गठबंधन में भ्रम को उजागर करता है जो अब भी यह पता लगा रहा है कि उसके सहयोगी कौन हैं। इसके विपरीत राजग ने उन सभी 40 सीट के लिए उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है जिन पर हम जीत हासिल करने के लिए तैयार हैं।’’
संयोग से सहनी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद राजग में शामिल हो गए थे। विधानसभा चुनाव में सहनी अपनी सीट जीतने में असफल रहे, लेकिन उन्हें भाजपा द्वारा मंत्री पद के लिए समर्थन दिया गया। भाजपा ने उन्हें विधान परिषद का भी सदस्य बनाया। बाद में भाजपा ने सहनी को राज्य मंत्रिमंडल से निष्कासित कर दिया था।
भाजपा ने बिहार के उन सभी चार विधायकों को भी अपने पाले में कर लिया जो वीआईपी के टिकट पर निर्वाचित हुए थे।
मौजूदा चुनाव में भाजपा ने मुजफ्फरपुर सीट से सहनी के पूर्व करीबी सहयोगी राज भूषण निषाद को मैदान में उतारा है। भाजपा ने दो बार के सांसद अजय निषाद को टिकट नहीं दिया जो बगावत कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।
भाषा संतोष