पेरिस समझौते पर ट्रंप का निर्णय जलवायु परिवर्तन रोधी कदमों को झटका: विशेषज्ञ
नेत्रपाल नरेश
- 21 Jan 2025, 04:59 PM
- Updated: 04:59 PM
नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) विशेषज्ञों ने मंगलवार को कहा कि पेरिस समझौते से हटने के अमेरिका के फैसले से जलवायु परिवर्तन रोधी वैश्विक प्रयास कमजोर होंगे और इसका सर्वाधिक खामियाजा विकासशील देशों को भुगतना पड़ेगा जिनकी वैश्विक उत्सर्जन में सबसे कम भूमिका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन एक दशक में दूसरी बार पेरिस समझौते से दुनिया के सबसे बड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक अमेरिका को बाहर करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।
ईरान, लीबिया और यमन के साथ अब अमेरिका भी ऐसा देश बन गया है जो 2015 के वैश्विक जलवायु समझौते का हिस्सा नहीं है। संबंधित समझौते का उद्देश्य औद्योगिक क्रांति के बाद से वैश्विक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है।
‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट’ से संबद्ध आरआर रश्मि ने कहा कि नए अमेरिकी प्रशासन के निर्णय का सर्वाधिक प्रभाव स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए वैश्विक वित्तपोषण पर दिखने की संभावना है।
जलवायु कार्यकर्ता और ‘सतत संपदा क्लाइमेट फाउंडेशन’ के संस्थापक निदेशक हरजीत सिंह ने इस कदम को वैश्विक जलवायु प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका बताया।
सिंह ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर, यह ऐसे समय में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सामूहिक लड़ाई को कमजोर करता है जब एकजुटता और तात्कालिकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। सबसे दुखद परिणाम विकासशील देशों में महसूस किए जाएंगे जिनकी वैश्विक उत्सर्जन में सबसे कम भूमिका है।’’
‘सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट’ (सीएसई) के कार्यक्रम अधिकारी त्रिशांत देव ने कहा कि प्रमुख जीवाश्म ईंधन उत्पादक के रूप में अमेरिका ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में अपनी हिस्सेदारी को पूरा करने के लिए बहुत कम काम किया है।
देव ने कहा कि ट्रंप पहले ही जलवायु वित्त को रोकने का वादा कर चुके हैं और सभी अमेरिकी विदेशी सहायता कार्यक्रमों को अस्थायी रूप से निलंबित कर चुके हैं जिसका न केवल जलवायु वित्त पर, बल्कि समग्र रूप से विकास वित्त पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
‘यूरोपियन क्लाइमेट फाउंडेशन’ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पेरिस समझौते में प्रमुख भूमिका निभाने वाली लॉरेंस टुबियाना ने कहा कि इस तरह की असफलताओं के बावजूद बहुपक्षीय जलवायु कार्रवाई मजबूत बनी हुई है।
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2017 में पहली बार पेरिस समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा की थी जिसे 2021 की शुरुआत में बाइडन प्रशासन ने पलट दिया था।
उन्होंने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान जलवायु परिवर्तन की बातों को ‘‘अफवाह’’ करार देते हुए पेरिस समझौते से अमेरिका को बाहर निकालने के अपने इरादे को दोहराया था।
ट्रंप ने सोमवार को अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिका के पेरिस समझौते से फिर बाहर होने की घोषणा की गई।
कार्यकारी आदेश में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत को पेरिस समझौते से हटने की औपचारिक लिखित अधिसूचना तुरंत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
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नेत्रपाल