आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामला : अदालत ने दोषी संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई
धीरज दिलीप
- 20 Jan 2025, 04:16 PM
- Updated: 04:16 PM
कोलकाता, 20 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित सरकारी आर जी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले साल अगस्त में एक महिला चिकित्सक के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या के मामले में शनिवार को दोषी करार दिये गए संजय रॉय को सियालदह की अदालत ने सोमवार को आजीवन कारवास की सजा सुनाई।
सियालदह की अदालत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास ने शनिवार को रॉय को पिछले वर्ष नौ अगस्त को अस्पताल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक के खिलाफ किये गए जघन्य अपराध के मामले में दोषी ठहराया था। इस घटना के बाद पूरे देश में अभूतपूर्व और लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए थे।
न्यायाधीश दास ने कहा कि यह अपराध ‘‘दुर्लभ से दुर्लभतम’’ श्रेणी में नहीं आता, जिससे दोषी को मृत्युदंड दिया जा सके।
रॉय को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 (बलात्कार), 66 (मृत्यु का कारण बनने की सजा) और 103 (1) (हत्या) के तहत दोषी ठहराया गया था।
न्यायाधीश ने कहा कि धारा 64 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा रही है और 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा रहा है। न्यायाधीश ने कहा कि जुर्माना अदा न करने पर पांच महीने अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
अदालत ने कहा कि धारा 103(1) के तहत रॉय को आजीवन कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई जाती है और जुर्माना नहीं देने पर उसे पांच महीने अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि इसके अतिरिक्त धारा 66 के तहत भी उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाती है। उन्होंने कहा कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
न्यायाधीश ने फैसले में कहा, ‘‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मृत्युदंड देने का अनुरोध किया। बचाव पक्ष के वकील ने अनुरोध किया है कि मृत्युदंड के बजाय कारावास की सजा दी जाए... यह अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है।’’
अदालत ने राज्य सरकार को मृत चिकित्सक के परिवार को 17 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
न्यायाधीश दास ने कहा, ‘‘चूंकि पीड़िता की मौत उसके कार्यस्थल अस्पताल में ड्यूटी के दौरान हुई, इसलिए राज्य की यह जिम्मेदारी है कि वह चिकित्सक के परिवार को मुआवजा दे। मृत्यु के लिए 10 लाख रुपये और दुष्कर्म के लिए सात लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया जाता है।’’
न्यायाधीश ने रॉय से कहा कि उसे इस निर्णय के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है और जरूरत पड़ने पर उसे कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
न्यायाधीश ने यह सजा दोषी के अंतिम बयान, बचाव पक्ष, पीड़िता के परिवार के वकील और सीबीआई की दलीलों को सुनने के बाद सुनाई।
इससे पहले, दिन में रॉय ने अदालत में दावा किया कि वह निर्दोष है और उसे ‘‘गलत तरीके से दोषी ठहराया गया है’’।
रॉय ने मामले में सजा सुनाए जाने से पहले अदालत से कहा,‘‘मुझे फंसाया जा रहा है और मैंने कोई अपराध नहीं किया है। मैंने कुछ भी नहीं किया है और फिर भी मुझे दोषी ठहराया गया है।’’
अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील और पीड़िता के माता-पिता के वकील ने इस अपराध को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ करार देते हुए दोषी को अधिकतम सजा देने की अपील की।
भाषा धीरज