बदलापुर यौन उत्पीड़न मामला: हिरासत में आरोपी की मौत के लिए पांच पुलिसकर्मी जिम्मेदार ठहराए गए
राजकुमार माधव
- 20 Jan 2025, 05:24 PM
- Updated: 05:24 PM
मुंबई, 20 जनवरी (भाषा) बदलापुर स्कूल यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी अक्षय शिंदे की हिरासत में हुई मौत की मजिस्ट्रेटी जांच में पांच पुलिसकर्मियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। अब उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का रास्ता साफ हो गया है।
मजिस्ट्रेट ने सोमवार को सीलबंद लिफाफे में अपनी जांच रिपोर्ट बंबई उच्च न्यायालय को सौंपी। बंबई उच्च न्यायालय शिंदे के पिता अन्ना शिंदे की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। अन्ना शिंदे ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मार डाला।
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने रिपोर्ट पर नजर डाली और कहा कि सरकार जांच के आधार पर मामला दर्ज करने के लिए बाध्य है। खंडपीठ ने जानना चाहा कि कौन सी जांच एजेंसी मामले की जांच करेगी।
इस घटना में शामिल अधिकारियों में ठाणे अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय शिंदे, सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) नीलेश मोरे, मुख्य आरक्षी अभिजीत मोरे और हरीश तावड़े तथा एक पुलिस चालक शामिल थे।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘मजिस्ट्रेट ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में मजिस्ट्रेट इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि आरोपी अक्षय शिंदे की मौत के लिए पांच पुलिसकर्मी जिम्मेदार हैं।’’
खंडपीठ ने कहा कि कानूनन, पांचों पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और जांच की जानी चाहिए।
अदालत ने कहा, ‘‘आप (सरकार) इस मजिस्ट्रेट रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए बाध्य हैं। हमें बताएं कि कौन सी एजेंसी मामले की जांच करेगी।’’
मजिस्ट्रेट ने रिपोर्ट में कहा कि गाड़ी में अक्षय शिंदे के साथ मौजूद चार पुलिसकर्मी स्थिति को संभालने की स्थिति में थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस अधिकारियों द्वारा किया गया बल प्रयोग उचित था।
रिपोर्ट में अपराध विज्ञान विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के निष्कर्षों पर ध्यान दिया गया, जिसमें कहा गया था कि अक्षय शिंदे की उस पिस्तौल पर कोई फिंगरप्रिंट नहीं थी, जिसके बारे में कहा गया कि उसने कांस्टेबल से छीनकर उससे गोली चलाई थी।
उच्च न्यायालय ने कहा, "जहां तक एफएसएल रिपोर्ट का सवाल है, मृतक के माता-पिता द्वारा लगाए गए आरोप (कि उनके बेटे को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मार डाला) सत्य पाए गए हैं।"
खंडपीठ ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस को भविष्य में ऐसी स्थितियों में किस तरह की सावधानी बरतनी होगी।
उच्च न्यायालय ने मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट की एक प्रति अभियोजन पक्ष और अन्ना शिंदे को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हम मूल रिपोर्ट और इसके साथ संलग्न सभी दस्तावेज तथा गवाहों के बयान फिलहाल अपने पास रखेंगे। अभियोजन पक्ष को मामले की जांच के दौरान बाद में इसकी जरूरत पड़ सकती है।’’
अदालत ने सरकारी वकील हितेन वेनेगांवकर से कहा कि वह दो सप्ताह में पीठ को बताएं कि मामले की जांच कौन सी जांच एजेंसी करेगी।
अक्षय शिंदे (24) को अगस्त 2024 में बदलापुर के एक स्कूल के शौचालय के अंदर दो बच्चियों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह स्कूल में ‘अटेंडेंट’ था।
शिंदे की 23 सितंबर को तलोजा जेल से पूछताछ के लिए ले जाते समय कथित पुलिस गोलीबारी में मौत हो गई थी।
पुलिस ने दावा किया कि उसने पुलिस वाहन में मौजूद एक पुलिसकर्मी की बंदूक छीन ली, गोली चलाई और जवाबी गोलीबारी में वह मारा गया।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय शिंदे ने अक्षय को गोली मारी थी, जबकि गोलीबारी के समय गाड़ी में एपीआई नीलेश मोरे, दो कांस्टेबल और एक पुलिस चालक मौजूद थे।
अक्षय शिंदे को उसकी पत्नी द्वारा उसके खिलाफ दर्ज कराए गए एक मामले के संबंध में पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा था।
पुलिस हिरासत में किसी आरोपी की मौत के मामले में कानून के तहत मजिस्ट्रेटी जांच शुरू की जाती है।
उच्च न्यायालय ने भी यौन उत्पीड़न मामले का स्वतः संज्ञान लिया था और स्कूलों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के समाधान के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया था।
सरकारी वकील वेनेगांवकर ने सोमवार को पीठ के समक्ष राज्य शिक्षा विभाग का हलफनामा पेश किया जिसमें घटना के बाद उठाए गए कदमों के बारे में बताया गया है।
वेनेगांवकर ने कहा कि समिति की रिपोर्ट 31 जनवरी तक तैयार हो जाएगी।
भाषा राजकुमार