कई हस्तियों ने आरजी कर मामले में शामिल लोगों की पहचान नहीं कर सकने पर निराशा जताई
सुरेश माधव
- 18 Jan 2025, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
कोलकाता, 18 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में आरजी कर दुष्कर्म-सह-हत्याकांड के खिलाफ प्रदर्शनों में सबसे आगे रहने वाली कई बांग्ला फिल्म हस्तियों ने इस बात को लेकर शनिवार को निराशा व्यक्त की कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) प्रशिक्षु महिला चिकित्सक के बलात्कार और हत्या में शामिल सभी लोगों की पहचान नहीं कर सकी।
सियालदह अदालत ने शनिवार को संजय रॉय को ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या का ‘‘दोषी’’ घोषित किया। इस जघन्य अपराध के कारण देश भर में आक्रोश की लहर दौड़ गई और लंबे समय तक विरोध-प्रदर्शन हुए।
अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास ने कहा कि अदालत सोमवार को उनकी सजा की घोषणा करेगी।
आरजी कर विरोध प्रदर्शनों से करीब से जुड़ी अभिनेत्री-निर्देशिका चैती घोषाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘सीबीआई जांच में रॉय के खिलाफ आरोप-पत्र तैयार किया गया, जिसमें उसे इस भयावह घटना में एकमात्र अपराधी माना गया। घटना के 48 घंटे के भीतर कोलकाता पुलिस की जांच भी उसी निष्कर्ष पर पहुंची। इससे कई सवाल, कई पहेलियां अनुत्तरित रह जाती हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपनी न्यायिक प्रणाली पर भरोसा है, लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि जांच एजेंसी द्वारा की गई जांच पूरी तरह से की गई थी या नहीं। हम और हजारों लोग अगस्त और उसके बाद के महीनों में पीड़िता के लिए न्याय और हर महिला की सुरक्षा की मांग करते हुए सड़क पर उतरे थे। यह व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।’’
मृतका के लिए न्याय को लेकर विरोध प्रदर्शनों का एक और प्रमुख चेहरा रहीं अभिनेत्री उषाशी चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘रॉय निश्चित रूप से (अपराध में) शामिल था, लेकिन वह सिर्फ एक मोहरा है और ऐसे अन्य लोग भी हो सकते हैं जो इसमें शामिल थे, लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा उन लोगों की पहचान नहीं की गई। वे बेदाग हैं।’’
अभिनेत्री और प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर किंजल नंदा ने कहा कि मृतक चिकित्सक और उसके दुखी माता-पिता के लिए निष्पक्ष और पूर्ण न्याय के वास्ते आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि जांच एजेंसी अन्य लोगों की पहचान नहीं कर लेती।
कनिष्ठ चिकित्सकों के आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक नंदा ने कहा, ‘‘हम ‘अभया’ के माता-पिता के साथ साथी योद्धाओं की तरह रहेंगे। केवल साथी की तरह नहीं।"
लेखिका और कार्यकर्ता शताब्दी दास ने कहा कि ‘अभया मंच’ के बैनर तले 2,000 से अधिक लोगों ने सियालदह स्टेशन से मौलाली तक पैदल मार्च किया। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
इन लोगों ने मांग की कि सीबीआई बलात्कार और हत्या के अन्य सभी अपराधियों को सजा दिलाए और ‘‘नौ अगस्त की घटना को न दबाए"।
उन्होंने कहा कि समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल की मांग को लेकर जारी विरोध और आंदोलनों के हिस्से के रूप में ‘अभया मंच’ आने वाले दिनों में और अधिक विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा। इस मंच में पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट सहित आठ संगठन शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने 16 जनवरी को वेलिंगटन से रानी रासमनी एवेन्यू तक एक रैली निकाली थी। प्रशासन के प्रतिबंधों का पालन करते हुए इस तरह के और भी विरोध प्रदर्शन आगे योजना में शामिल हैं।’’
भाषा सुरेश