प्रधानमंत्री मोदी ने 65 लाख से अधिक स्वामित्व संपत्ति कार्ड बांटे
संतोष अमित
- 18 Jan 2025, 07:49 PM
- Updated: 07:49 PM
नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को स्वामित्व योजना के तहत 65 लाख से अधिक संपत्ति कार्ड वितरित किए और कहा कि इससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा गरीबी उन्मूलन में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये कार्यक्रम को संबोधित किया और कुछ लाभार्थियों से बातचीत भी की और कहा कि इस योजना से लोगों को ऋण और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण भूमि डिजिटलीकरण ‘‘प्रौद्योगिकी और सुशासन की शक्ति का लाभ उठाकर ग्रामीण सशक्तिकरण को आगे बढ़ा रहा है।’’
ये संपत्ति कार्ड 10 राज्यों - छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख के 50,000 से अधिक गांवों के लाभार्थियों को वितरित किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज 65 लाख कार्ड वितरित किए जाने के बाद अब गांवों में लगभग 2.24 करोड़ लाभार्थियों के पास स्वामित्व संपत्ति कार्ड होंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘संपत्ति अधिकार दुनिया भर में एक बड़ी चुनौती है। कई साल पहले संयुक्त राष्ट्र ने एक अध्ययन किया था, जिसमें पता चला था कि कई देशों में लोगों के पास संपत्ति के अधिकार के लिए कानूनी दस्तावेज नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि गरीबी उन्मूलन के लिए संपत्ति अधिकार महत्वपूर्ण हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा था कि गांवों में संपत्ति एक ‘‘मृत पूंजी’’ है, क्योंकि लोग इसके साथ कुछ नहीं कर सकते और यह उनकी आय बढ़ाने में भी मदद नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत में भी इस चुनौती का असर देखने को मिला। गांवों में लोगों के पास लाखों-करोड़ों (रुपये) की संपत्ति होती है, लेकिन उनके पास उसके कागजात नहीं होते। झगड़े होते थे, संपत्ति हड़प ली जाती थी और बैंक भी उस पर ऋण नहीं देते थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछली सरकारों को इस संबंध में कुछ कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन कुछ खास नहीं किया गया।’’
मोदी ने कहा कि दलित, पिछड़े वर्ग और आदिवासी इस कानून से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
स्वामित्व योजना के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें ड्रोन का उपयोग करके गांवों में घरों और जमीनों का मानचित्रण करना और ग्रामीणों को आवासीय संपत्तियों के कानूनी दस्तावेज प्रदान करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इस योजना के लाभ अब दिखाई देने लगे हैं।
मोदी ने कहा, ‘‘भारत में छह लाख से अधिक गांव हैं, जिनमें से लगभग आधे में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कानूनी संपत्ति अधिकार मिलने के बाद लाखों लोगों ने ऋण लिया है। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपना कारोबार शुरू करने में किया है। इनमें से कई किसान हैं, जिनके लिए ये संपत्ति कार्ड वित्तीय सुरक्षा की गारंटी है।’’
मोदी ने कहा कि एक बार सभी गांवों में संपत्ति कार्ड जारी हो जाने के बाद, यह योजना 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक गतिविधियों को खोल देगी। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था में जुड़ने वाली पर्याप्त पूंजी पर जोर दिया।
यह उल्लेख करते हुए कि पहले किसानों के लिए भूमि विवाद आम थे और भूमि दस्तावेज प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण था और अक्सर कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे जिससे भ्रष्टाचार पनपता था, प्रधानमंत्री ने कहा कि इन मुद्दों से निपटने के लिए भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल किया जा रहा है।
इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि स्वामित्व और भू-आधार गांव के विकास के लिए मूलभूत प्रणालियां हैं, उन्होंने कहा कि भू-आधार भूमि को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि लगभग 23 करोड़ भू-आधार नंबर जारी किए गए हैं, जिससे भूमि भूखंडों की पहचान करना आसान हो जाता है।
मोदी ने कहा, ‘‘पिछले सात-आठ वर्षों में लगभग 98 प्रतिशत भूमि रिकॉर्ड डिजीटलीकृत हो गए हैं और अधिकांश भूमि मानचित्र अब डिजिटल रूप से उपलब्ध हैं।’’
बाद में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रामीण भूमि का डिजिटलीकरण ‘‘प्रौद्योगिकी और सुशासन की शक्ति का लाभ उठाकर ग्रामीण सशक्तीकरण को आगे बढ़ा रहा है।’’
इस कार्यक्रम में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’, केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री एस. पी. सिंह बघेल और पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज भी उपस्थित थे।
इसमें कई मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों ने डिजिटल माध्यम से भाग लिया।
संपत्ति कार्डों के भौतिक वितरण के लिए 230 से अधिक जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। उम्मीद है कि संपत्ति कार्डों के क्षेत्रीय वितरण समारोहों की देखरेख के लिए देश भर से लगभग 13 केंद्रीय मंत्री निर्दिष्ट स्थानों से भौतिक रूप से शामिल होंगे।
एसवीएएमआईटीवीए (स्वामित्व) का आशय ‘सर्वे ऑफ विलेजेस एंड मैपिंग विद इम्प्रोवाइज्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरिया’ (गांवों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ मानचित्रण) से है।
स्वामित्व योजना 2020 में नवीनतम ड्रोन तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण करके गांवों के घरों के मालिकों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ प्रदान करके ग्रामीण भारत की आर्थिक प्रगति को बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी।
भाषा संतोष