आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ीं निजी संस्थाओं को आरटीआई अधिनियम के तहत होना चाहिए: सीआईसी
जोहेब माधव
- 17 Jan 2025, 09:05 PM
- Updated: 09:05 PM
नयी दिल्ली, 17 जनवरी (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने दिल्ली सरकार को निजी अस्पतालों के लाइसेंस का पूर्वव्यापी नवीनीकरण रोकने की सलाह देते हुए कहा है कि आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने वाले निजी संस्थानों को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के राज्य-आधारित संशोधन के तहत अधिनियम के दायरे में होना चाहिये।
सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने एक आरटीआई आवेदक के मामले की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं। आरोप है कि 2023 में आवेदक की पत्नी के इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ने "अत्यधिक बिल" थमा दिया था।
आरटीआई आवेदक संजीव कुमार ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) से संपर्क कर 12-सूत्री आवेदन में आर्टेमिस अस्पताल को जारी किए गए लाइसेंस के विवरण समेत कई जानकारी मांगी गई थीं। आवेदक की पत्नी का इलाज आर्टेमिस अस्पताल में हुआ था।
अस्पताल से संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग का रुख किया।
तिवारी ने कहा, “... अपील में अपीलकर्ता का मुख्य तर्क जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) की ओर से सही व सटीक जानकारी न मिलना और आर्टेमिस अस्पताल में भर्ती होने के दौरान मनमाने तरीके से अनुचित मांगों/बिलों को बढ़ाना है। इसकी वजह यह है कि प्रतिवादी (डीजीएच) नियमित रूप से गुप्त तरीके अस्पताल के लाइसेंस का पूर्वव्यापी नवीनीकरण करता रहा है। ”
एक निजी अस्पताल होने के कारण आर्टेमिस आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आता है।
तिवारी ने कहा, “लोगों के लिए आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने वाली संस्थाओं को आरटीआई अधिनियम में राज्य-आधारित संशोधन लाकर “सार्वजनिक प्राधिकरण” की परिभाषा में शामिल किया जाना चाहिए।”
सुनवाई के दौरान, कुमार ने आरोप लगाया था कि उनके आरटीआई आवेदन के जवाब में डीजीएचएस द्वारा उन्हें प्रदान किए गए आर्टेमिस अस्पताल के एक अगस्त, 2023 के मान्यता प्रमाण पत्र से पता चलता है कि अस्पताल के पास 7-8 अप्रैल 2023 को उनकी पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने की तारीखों पर कोई वैध लाइसेंस नहीं था।
तिवारी ने बताया, “...प्रतिवादी (डीजीएचएस) के बयान से यह पता चला है कि अस्पतालों का पंजीकरण पूर्वव्यापी रूप से नवीनीकृत किया जा रहा है, जिसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि निजी अस्पतालों के पास कदाचार की वजह से पकड़े जाने पर नवीनीकरण अनुरोध वापस लेने का विकल्प है।”
उन्होंने कहा कि इस मामले के लंबित रहने के दौरान आयोग के बार-बार निर्देशों के बावजूद, डीजीएचएस ने इस तरह लाइसेंस नवीनीकृत करने का कारण बताते हुए जवाब अपलोड नहीं किया है।
तिवारी ने कहा, “आर्टेमिस अस्पताल द्वारा अत्यधिक बिल थमाए जाने के संबंध में अपीलकर्ता के आरोप को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है क्योंकि प्रतिवादी के साथ-साथ तीसरा पक्ष यानी आर्टेमिस लाइट अस्पताल अपीलकर्ता की दलीलों के खिलाफ कोई भी जवाब दाखिल करने में विफल रहा है, इसलिए मामला अपीलकर्ता के पक्ष में है।
डीजीएचएस ने दावा किया कि यह दलील कि स्वीकार्य नहीं है कि आर्टेमिस अस्पताल के पास उस समय वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं। डीजीएचएस ने कहा कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया के दौरान यह माना जाता है कि अस्पताल का पंजीकरण अब भी वैध है।
भाषा जोहेब