पंजाब में कई जगहों पर नहीं प्रदर्शित की गई ‘इमरजेंसी’, एसजीपीसी ने किया विरोध प्रदर्शन
योगेश सुभाष
- 17 Jan 2025, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
चंडीगढ़, 17 जनवरी (भाषा) शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और सिख संगठनों द्वारा कंगना रनौत अभिनीत ‘इमरजेंसी’ के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को पंजाब के सिनेमाघरों में यह फिल्म प्रदर्शित नहीं की गई।
अभिनेत्री ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग को ‘उत्पीड़न’ करार दिया है।
शीर्ष गुरुद्वारा संस्था एसजीपीसी और कई सिख संगठनों ने राज्य भर में सिनेमाघरों, 'मल्टीप्लेक्स' और 'मॉल' के बाहर फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया।
रनौत ने 'इमरजेंसी' फिल्म पर प्रतिबंध की मांग की निंदा की और कहा कि पंजाब के कुछ हिस्सों में फिल्म का प्रदर्शन ना किया जाना कला और कलाकार का उत्पीड़न है।
फिल्म में रनौत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका निभा रही हैं। यह फिल्म 1975 से 1977 तक 21 महीनों के आपातकाल के दौरान के घटनाक्रम पर केंद्रित है। राजनीतिक पृष्ठभूमि की यह फिल्म केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से प्रमाण पत्र मिलने में देरी और सिख समुदाय का गलत चित्रण करने के आरोपों को लेकर विवादों में रही है। फिल्म की रिलीज में कई बार देरी के बाद इसे शुक्रवार को देश भर में रिलीज किया गया।
लुधियाना, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा के कई सिनेमाघरों में फिल्म नहीं दिखाई गई। राज्य में मॉल और सिनेमाघरों के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया।
अमृतसर में प्रदर्शनकारियों को काले झंडे और तख्तियां लेकर जाते देखा गया, जिन पर लिखा था ‘‘फिल्म ‘इमरजेंसी’ पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए’’ और ‘‘फिल्म ‘इमरजेंसी’ का बहिष्कार किया जाए।’’
एसजीपीसी के प्रताप सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने फिल्म की रिलीज रोकने के लिए केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से बात की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई...।’’ उन्होंने कहा कि वे रिलीज रोकने के लिए इकट्ठा हुए हैं क्योंकि फिल्म पंजाब की शांति को भंग करने के लिए बनाई गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘सिख पात्रों को आपत्तिजनक तरीके से चित्रित किया गया है।’’
उन्होंने एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी द्वारा बृहस्पतिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लिखे पत्र का भी हवाला दिया, जिसमें फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
उन्होंने कहा कि दुखद बात यह है कि पंजाब की आप सरकार जानबूझकर सिखों से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है।
उन्होंने कहा, "यह राज्य के हित में नहीं है।"
एसजीपीसी के एक अन्य सदस्य कुलवंत सिंह मनन ने कहा, ‘‘रनौत भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) की सांसद हैं और एक सांसद की कुछ जिम्मेदारी होती है। उन्हें समाज में सभी को एक साथ लाने के लिए काम करना चाहिए, लेकिन इसके बजाय वह विभाजन पैदा कर रही हैं...।’’
मनन ने भी कहा कि फिल्म में सिख पात्रों को "गलत तरीके" से चित्रित किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पंजाब सरकार ने फिल्म के प्रदर्शन को रोकने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।
पुलिस उपायुक्त शिवम अग्रवाल ने बताया कि लुधियाना में यह फिल्म चार सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।
फिल्म के विरोध को देखते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इसपर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
उन्होंने कहा, "राज्य में पहले से ही खराब कानून व्यवस्था को देखते हुए भगवंत मान सरकार को पंजाब में फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए।"
रंधावा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी जनता की भावनाओं का सम्मान करना और सांप्रदायिक सद्भाव को सुनिश्चित करना है, जो ऐसी फिल्मों के प्रदर्शन से अधिक महत्वपूर्ण है।"
हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद रनौत ने 'एक्स' परएक पोस्ट में ‘इमरजेंसी’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।
उन्होंने कहा, "यह कला और कलाकार का पूर्ण रूप से उत्पीड़न है, पंजाब के कई शहरों से खबरें आ रही हैं कि ये लोग इमरजेंसी को प्रदर्शित नहीं होने दे रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "मैं सभी धर्मों का बहुत सम्मान करती हूं और चंडीगढ़ में पढ़ाई की है और वहां पली बढ़ी हूं, मैंने सिख धर्म को करीब से देखा और उसका पालन किया है। यह पूरी तरह से झूठ है और मेरी छवि खराब करने तथा मेरी फिल्म 'इमरजेंसी' को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दुष्प्रचार किया जा रहा है।"
कंगना ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा की पोस्ट पर यह प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन्होंने उनकी फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग का समर्थन किया था।
खैरा ने कहा कि रनौत किसानों और सिखों के हमारे देश के प्रति योगदान को जाने बिना उनकी आलोचक हैं।
खैरा ने कहा, "एसजीपीसी हमारी निर्वाचित प्रतिनिधि संस्था है और भगवंत मान को इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए तत्काल कदम उठाना चाहिए, जिसमें सिखों का गलत चित्रण किया गया है तथा हमारे राज्य पंजाब और इसके लोगों को बदनाम किया गया है।"
भाषा योगेश