न्यायालय ने सेवानिवृत्त सहायक प्रोफेसर की अवमानना याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई
देवेंद्र पवनेश
- 16 Jan 2025, 08:45 PM
- Updated: 08:45 PM
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश के एक सेवानिवृत्त सहायक प्रोफेसर द्वारा पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ जारी करने के अनुरोध संबंधी अवमानना याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की है।
डॉ. आर. बी. दुबे की याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अनुपम राजन को नोटिस जारी किया है।
इसने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाता है और इसका जवाब 18 फरवरी, 2025 को दिया जाना है। इस स्तर पर कथित अवमाननाकर्ता की व्यक्तिगत मौजूदगी की आवश्यकता नहीं है।’’
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे उपस्थित हुए।
अवमानना याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय ने 30 जुलाई, 2024 के आदेश में उन्हें पेंशन और अन्य लाभ जारी करने का निर्देश दिया था।
याचिका में कहा गया है, ‘‘हालांकि, कथित अवमाननाकर्ताओं/प्रतिवादियों ने जानबूझकर इस अदालत द्वारा पारित उक्त आदेश का उल्लंघन किया है और पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है। इस तरह वर्तमान अवमानना याचिका अवमाननाकर्ताओं/प्रतिवादियों द्वारा न्यायालय की अवमानना करने के लिए दायर की जा रही है।’’
याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयन के बाद एक अगस्त, 1980 को सहायक प्रोफेसर के पद पर तदर्थ नियुक्ति दी गई थी और उन्होंने 18 सितम्बर, 1986 को इस पद पर कार्यभार ग्रहण किया था।
दुबे ने पेंशन नियमों के नियम 42(1)(ए) के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया। अधिकारियों ने 10 मई, 2003 से इस्तीफा स्वीकार कर लिया। प्रतिवादियों ने पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना के लिए एक अगस्त, 1980 से 18 सितम्बर, 1986 तक की अवधि को नहीं गिना, जब याचिकाकर्ता तदर्थ सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत था।
प्रतिवादियों की कार्रवाई से व्यथित होकर उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
बाद में, मध्य प्रदेश राज्य ने उच्च न्यायालय के अंतिम आदेश को चुनौती देते हुए एक अपील दायर की, जिसे उच्चतम न्यायालय ने 30 जुलाई, 2024 को छह सप्ताह के भीतर देय राशि जारी करने के निर्देश के साथ खारिज कर दिया।
जब राशि का भुगतान नहीं किया गया तो दुबे ने उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की।
याचिका में कहा गया है, ‘‘छह अगस्त, 2024 को याचिकाकर्ता ने इस न्यायालय के आदेश की प्रति के साथ एक अभ्यावेदन दायर किया और पेंशन और अन्य लाभों का भुगतान करने का अनुरोध किया। छह सप्ताह की अवधि 10 अगस्त, 2024 को समाप्त हो गई। हालांकि, कथित अवमाननाकर्ताओं / प्रतिवादियों ने जानबूझकर आज तक इसका भुगतान नहीं किया है और इस तरह, इस अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है।’’
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