सुरक्षा संवर्ग कर्मियों को वेतनमान पर ध्यान दिये बिना रात्रि ड्यूटी भत्ता दिया जाये: रेलवे यूनियन
देवेंद्र माधव
- 16 Jan 2025, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दिये जाने के बाद रेलवे यूनियनों के एक वर्ग ने सरकार से रात्रि ड्यूटी भत्ते को लेकर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 13 जुलाई, 2020 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था, जिसके अनुसार अन्य शर्तों के साथ-साथ ‘‘रात्रि ड्यूटी भत्ते की पात्रता के लिए मूल वेतन की अधिकतम सीमा 43,600 रुपये प्रति माह होगी’’।
पूर्वोत्तर रेलवे मेंस कांग्रेस के सहायक महासचिव विवेक मिश्रा ने कहा, ‘‘डीओपीटी ओएम (कार्यालय ज्ञापन) के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 43,600 रुपये से अधिक है, तो उसके रात्रि ड्यूटी भत्ते (एनडीए) की गणना उसके मूल वेतन को 43,600 रुपये मानकर की जाएगी, जो अनुचित और तर्कहीन है।’’
रेलवे बोर्ड ने हालांकि 29 सितंबर, 2020 को एक निर्देश जारी किया था और कहा था कि एनडीए उन कर्मचारियों को ही दिया जायेगा, जो केवल वेतन स्तर सात तक हैं। इससे उच्च वेतन स्तर आठ और नौ के कर्मचारियों को एनडीए का कोई भी लाभ मिलने की सम्भावना समाप्त हो गई।
मिश्रा ने कहा, ‘‘रेल मंत्रालय ने भी इस तरह का प्रतिबंध लगाने के लिए कोई तर्क नहीं दिया। यह हतोत्साहित करने वाला है। क्योंकि सरकार ने आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की है, मैं डीओपीटी के साथ-साथ रेल मंत्रालय से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि वे इस पहलू पर अलग से विचार करें क्योंकि रेलवे का कामकाज अन्य सरकारी विभागों की तरह नहीं है।’’
यूनियनों के अनुसार, “2020 से पहले, सभी सरकारी कर्मचारियों को उनके पदक्रम वेतन की परवाह किए बिना रात 10 बजे से सुबह छह बजे के बीच काम करने के लिए उक्त भत्ता मिलता था। लेकिन सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद जब कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर अधिकतम सीमा तय कर दी, तो सुरक्षा विभाग के कई कर्मचारी अब एनडीए से वंचित हो गए हैं।’’
‘नॉर्दर्न रेलवे ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन’ के महासचिव सुमीर आइमा ने कहा, ‘‘एक स्टेशन मास्टर रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक आठ घंटे काम करता है और उसे एनडीए का लाभ मिलता है, क्योंकि वह वेतन स्तर सात में आता है। दूसरी ओर, यदि किसी अन्य स्टेशन मास्टर को स्तर आठ या स्तर नौ में पदोन्नत किया जाता है, तो उसे समान ड्यूटी घंटे करने के बावजूद लाभ नहीं मिलता, भले ही वह स्तर सात वाले से अधिक अनुभवी क्यों न हो।’’
अखिल भारतीय रेलगाड़ी नियंत्रक संघ (एआईटीसीए) के पूर्व सहायक महासचिव मनोज सिन्हा ने कहा, ‘‘जब वरिष्ठ अधिकारी घर पर सो रहे होते हैं तो ये कर्मचारी लोगों को सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुंचने में मदद करने के लिए अथक परिश्रम करते हैं। सरकार को रेलवे की कार्यप्रणाली को अन्य विभागों से अलग मानना चाहिए तथा उसके अनुसार ही व्यवहार करना चाहिए।’’
भाषा देवेंद्र