सवालों से बच रहे हैं प्रधानमंत्री, छात्रों से खुद माफी मांगें: विपक्ष
जोहेब
- 01 Aug 2026, 08:55 PM
- Updated: 08:55 PM
नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदर्शनकारी युवाओं को "माफ करने" की अपील किए जाने पर शनिवार को विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और आरोप लगाया कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई तथा आंदोलन से जुड़े बड़े मुद्दों पर उठ रहे सवालों से बच रहे हैं।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता का दुख सबसे बड़ा होता है और यह पीड़ा उनके साथ हमेशा बनी रहती है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसी घटनाएं देश की शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक, परीक्षाएं रद्द होने और वर्षों की तैयारी के एक पल में बर्बाद हो जाने जैसी घटनाओं के बीच छात्रों से एक ऐसे तंत्र में ईमानदारी से मेहनत करने की अपेक्षा की जाती है, जो स्वयं बेईमान है।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि किसी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि ''आपको (प्रधानमंत्री ) यह समझ आने में इतनी देर क्यों लगी।''
उन्होंने कहा, ''आपके लोगों ने किसी की मां, बहन या बेटी को नहीं छोड़ा। सभी के खिलाफ बेहद अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया गया।''
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि ''गाली, माफी और रील, ये सब ध्यान भटकाने की कोशिशें हैं।"
मोइत्रा ने कहा कि असली मुद्दा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई है।
उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''सिर्फ एक असली मुद्दा है कि पुलिस तथा सीआरपीएफ/आरएएफ की कथित बर्बरता पर अमित शाह को जवाब देना चाहिए। इससे बचा नहीं जा सकता।''
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री की माफी की अपील का अर्थ यह है कि अपशब्द कहने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, गिरफ्तारी और अदालती कार्रवाई वापस ले ली जाएगी, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या उन लोगों से भी माफी मांगने को कहा जाएगा जिन्होंने ''गाली को राजनीतिक संस्कृति, नफरत को चुनावी रणनीति और अपमान को सार्वजनिक संवाद की स्वीकार्य भाषा बना दिया है।''
वामपंथी छात्र संगठन 'आइसा' ने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश प्रदर्शनकारी युवाओं की भाषा पर केंद्रित था, लेकिन सरकार और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए व्यवहार पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।
संगठन ने आरोप लगाया कि असली ''सांस्कृतिक आघात'' तो अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी, पैलेट और गोलियां चलाना, असहमति जताने वालों के खिलाफ ऑनलाइन ट्रोलिंग, निजी जानकारी सार्वजनिक करना और धमकियां देना है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी प्रधानमंत्री की 'रील' पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या छात्रों को सिर्फ रील में माफ किया जाएगा या उनके खिलाफ दर्ज मामले भी वापस लिए जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को कहा था कि उन्हें इस बात का दुख है कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान न सिर्फ उनके, बल्कि उनकी स्वर्गीय मां के लिए भी भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने यह भी कहा था कि इन ''गुमराह बच्चों'' को माफ किए जाने की जरूरत है।
'इंस्टाग्राम' पर देर रात जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह समाज में व्याप्त आक्रोश को समझते हैं, लेकिन यह "गुमराह बच्चों" के साथ अपनापन और उन्हें सही राह दिखाने का समय है।
भाषा हक माधव जोहेब
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