कल्पक्कम में 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' का 'क्रिटिकैलिटी' हासिल करना ऐतिहासिक उपलब्धि: मोदी
अमित
- 26 Apr 2026, 12:40 PM
- Updated: 12:40 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को 'कल्पक्कम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' के क्रांतिकता (क्रिटिकैलिटी) हासिल करने को एक ''ऐतिहासिक उपलब्धि'' बताया और कहा कि भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों ने देश को गौरवान्वित किया है।
मोदी ने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि भारतीय वैज्ञानिक असैन्य परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं और उनके प्रयास राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दे रहे हैं।
मोदी ने कहा कि 'क्रिटिकैलिटी' वह चरण है, जिसमें रिएक्टर पहली बार स्वत: परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया में सफलता हासिल करता है। इस चरण का मतलब है रिएक्टर का संचालन चरण में पहुंचना। भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा में यह एक ''ऐतिहासिक उपलब्धि'' है और बड़ी बात ये भी है कि परमाणु रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें मार्च 2024 में कल्पक्कम में रिएक्टर की कोर लोडिंग देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा, ''मैं उन सभी को बधाई देता हूं, जिन्होंने, भारत के परमाणु कार्यक्रम में अपना अमूल्य योगदान दिया है।''
मोदी ने कहा कि देशवासियों के जीवन को बेहतर और आसान बनाने के लिए वैज्ञानिकों के प्रयास वास्तव में सराहनीय हैं। इससे विकसित भारत के हमारे संकल्प को भी एक नयी ऊर्जा मिलेगी।
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि में, 500 मेगावाट ई के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने छह अप्रैल को सफलतापूर्वक पहली क्रिटिकैलिटी (नियंत्रित परमाणु विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया) प्राप्त कर ली है, जो दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने और स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
परमाणु रिएक्टर में 'क्रांतिकता' नाभिकीय श्रृंखला प्रतिक्रिया की वह स्थिर, स्व-पोषक अवस्था है, जिसमें न्यूट्रॉन उत्पादन न्यूट्रॉन हानि को संतुलित करता है, जिससे नियंत्रित मात्रा में विद्युत उत्पादन संभव हो पाता है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पारंपरिक थर्मल रिएक्टरों के विपरीत पीएफबीआर यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन का उपयोग करता है।
इस रिएक्टर को अंततः थोरियम-232 का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रूपांतरण प्रक्रिया के माध्यम से थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित किया जाएगा जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे चरण को ईंधन प्रदान करेगा।
भाषा
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