पूर्व बस परिचालक, बुजुर्ग वाद्ययंत्र वादक सहित 45 गुमनाम नायक पद्म श्री सम्मान के लिए चुने गए
दिलीप
- 25 Jan 2026, 10:19 PM
- Updated: 10:19 PM
(इंट्रो में सुधार के साथ)
नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क पुस्तकालय स्थापित करने वाले एक पूर्व बस परिचालक, एशिया का पहला इंसानी दूध बैंक बनाने वाली एक बाल चिकित्सक और 90 वर्षीय आदिवासी वादक उन 45 गुमनाम नायकों में शामिल हैं, जिन्हें इस वर्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चुना गया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
कभी बस परिचालक रहे अंके गौड़ा ने दुनिया का सबसे बड़ा निःशुल्क पुस्तकालय 'पुस्तक माने' स्थापित किया, जहां 20 भाषाओं में 20 लाख से अधिक पुस्तकें और दुर्लभ पांडुलिपियां हैं।
कर्नाटक में मैसूरु के नजदीक हरलाहल्ली गांव के निवासी 75 वर्षीय गौड़ा को देश भर के पाठकों को सशक्त बनाने के उनके अनूठे प्रयासों के लिए पद्म श्री से सम्मानित करने का फैसला किया गया है।
इस सूची में गौड़ा के साथ मुंबई की बाल रोग विशेषज्ञ आर्मिडा फर्नांडीज, 'कालाजार' या काला ज्वर का पता लगाने के लिए सस्ता परीक्षण विकसित करने वाले श्याम सुंदर और आनुवंशिक रक्त विकार 'हीमोफीलिया' के क्षेत्र में अपने कार्यों के लिए चर्चित अनुभवी रक्त रोग विशेषज्ञ सुरेश हंगावड़ी भी शामिल हैं।
आर्मिडा फर्नांडीज ने मां के दूध से वंचित बच्चों के लिए एशिया का ऐसा दुग्ध बैंक बनाया है, जहां पर स्तनपान कराने वाली महिलाएं दूध दान करती हैं।
इस सूची में प्राचीन तिब्बती चिकित्सा को बढ़ावा देने वाली लद्दाख की पद्मा गुरमेट, जानवरों के इलाज के लिए आधुनिक विज्ञान के साथ पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग करने वाले तमिलनाडु के पशु चिकित्सा वैज्ञानिक पुन्नियामूर्ति नटेसन, हैदराबाद के आनुवंशिकीविद् कुमारसामी थंगराज और अंगदान को प्रोत्साहित करने वाले गुजरात के 'डोनेट लाइफ' के संस्थापक नीलेश विनोदचंद्र मंडलेवाला भी शामिल हैं।
पुरस्कार के लिए चुने गये लोगों में मध्यप्रदेश के बुंदेली युद्ध कला प्रशिक्षक भगवानदास रायकवार और हथियार आधारित तमिल मार्शल आर्ट को आगे बढ़ाने वाले पुडुचेरी के के. पजानिवेल भी हैं।
आदिवासी वाद्य यंत्र तारपा (लौकी और बांस से बना एक वाद्य यंत्र) के 90 वर्षीय वादक, भीकल्या लड़क्या ढिंडा, मणिपुर के नट संकीर्तन कलाकार युमनाम जातरा सिंह (100), बिहार के लोक नर्तक विश्व बंधु, पारंपरिक वाद्य यंत्र 'भापंग' बजाने वाले राजस्थानी लोक कलाकार गफरूद्दीन मेवाती जोगी को भी इस सूची में जगह मिली है।
गुजराती मंचन कला शैली 'मानभट्ट' के विशेषज्ञ धार्मिकलाल चुनीलाल पांड्या और लुप्त हो रहे पारंपरिक वाद्य यंत्र अलगोजा के संरक्षण के लिए काम करने वाले संगीतकार तागा राम भील को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है।
ओडिशा के प्रसिद्ध सखी नट लोक रंगमंच अभिनेता सिमांचल पात्रो, नगा लोक रंगमंच गुरु संगयुसांग एस पोंगेनर और असम के मंच सज्जाकार नूरुद्दीन अहमद भी 2026 के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए चुनी गयी हस्तियों में शामिल हैं।
इस सूची में अन्य 'गुमनाम नायकों' में तमिलनाडु के भजन गायक ओथुवर थिरुथानी स्वामीनाथन, नीलगिरी की सदियों पुरानी कुरुम्बा आदिवासी कला परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले तमिलनाडु के आर कृष्णन , काबरी लोक और आधुनिक संगीत में योगदान देने वाली असम की पोकिला लेकथेपी, और ढोलक को एक प्रमुख एकल वाद्य यंत्र में बदल चुके मीर हाजीभाई कसमभाई ने अपना स्थान बनाया है।
जम्मू-कश्मीर के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता बृज लाल भट, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल स्थापित करने वाले बुदरी थाटी, बस्तर ग्रामीण स्वास्थ्य परियोजना के माध्यम से आदिवासियों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने वाले रामचंद्र और सुनीता गोडबोले, स्वच्छता के पैरोकार और प्रवर्तक पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह संधू; और निशी समुदाय की संस्कृति को संरक्षित करने के लिए काम कर रहे अरुणाचल प्रदेश के तेची गुबिन को भी पद्म श्री के लिए चुना गया है।
सूत्रों ने कहा कि असाधारण योगदान देने वाले आम भारतीयों को सम्मानित करने के सिद्धांत को जारी रखते हुए, इस वर्ष के पद्म पुरस्कार भारत के कोने-कोने के गुमनाम नायकों की एक विस्तृत शृंखला को पहचान प्रदान करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन सभी ने व्यक्तिगत स्तर पर भारी कठिनाइयों और त्रासदियों का सामना करते हुए न केवल अपने चुने हुए क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, बल्कि समाज की व्यापक सेवा में भी योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि सम्मानित किये जाने वाले लोगों में हाशिए पर रहने वाले लोग और दलित समुदायों के लोग, आदिम जनजातियों के लोग और दूरस्थ एवं दुर्गम इलाकों के लोग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ये सभी लोग वास्तव में उन आम भारतीयों का प्रतीक हैं जो चुपचाप अपनी दिनचर्या देश की सेवा में व्यतीत कर रहे हैं।
इस सूची में ओडिशा के संथाली लेखक-संगीतकार चरण हेमब्रम, 60 साल से अधिक समय से पूरे भारत में हिंदी के प्रचार प्रसार में जुटे वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत, कश्मीरी साहित्यकार शफी शौक़ और त्रिपुरा की कोकबोरोक भाषा को बढ़ावा देने में जुटे नरेश चंद्र देबबर्मा भी शामिल हैं।
इस सम्मान के लिए चुने गये लोगों में पीतल पर जटिल नक्काशी के विशेषज्ञ मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव शामिल हैं, तमिलनाडु के कांस्य कला मूर्तिकार राजस्तपति कालियाप्पा गौंडर, महिलाओं को कंथा कढ़ाई कला सिखाने वाली पश्चिम बंगाल की तृप्ति मुखर्जी, और हजारों कारीगरों को जामदानी बुनाई तकनीक सिखाने वाले हरियाणा के खेम राज सुंद्रियाल भी हैं।
केरल की 92 वर्षीय पर्यावरणविद् कोल्लाक्कयिल देवकी अम्मा जी; मेघालय में खासी लोगों की पारंपरिक वनरोपण तकनीकों को बढ़ावा देने वाले हैली वार; और मध्यप्रदेश में 75,000 से अधिक जल संरचनाएं बना चुके मोहन नागर को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है।
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