कांग्रेस नेताओं के सोरोस के साथ कथित संबंधों को लेकर राजग का राज्यसभा में हंगामा, कार्यवाही बाधित
माधव वैभव मनीषा
- 09 Dec 2024, 03:05 PM
- Updated: 03:05 PM
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सदस्यों ने कांग्रेस तथा उसके नेताओं पर विदेशी संगठनों और लोगों के माध्यम से देश की सरकार तथा अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया और इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करते हुए सोमवार को राज्यसभा में जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण उच्च सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजकर नौ मिनट पर अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे उच्च सदन की बैठक फिर शुरू होने पर सदन में पहले जैसा ही नजारा देखने को मिला। सत्ता पक्ष के सदस्य नारेबाजी कर रहे थे। हंगामे के बीच सभापति जगदीप धनखड़ ने बैकिंग संबंधित एक विधेयक को चर्चा एवं पारित कराने के लिए कहा।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक, 2024 चर्चा एवं पारित कराने के लिए सदन के पटल पर रखा। किंतु हंगामे के कारण चर्चा शुरू नहीं हो सकी।
नेता सदन जे पी नड्डा ने कहा कि जिस तरह से घटनाएं घटी हैं और जिस तरह से चर्चाएं हो रही हैं, वह ‘हमारे सदस्यों को बहुत उद्धेलित कर रही हैं।’
नड्डा ने कहा कि देश की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि खबरें आ रही हैं कि ‘फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स इन एशिया पैसेफिक’ का संबंध जिस प्रकार से जार्ज सोरोस के साथ सामने आता है, जो बहुत चिंताजनक है और ‘जिसकी सह अध्यक्षा हमारे ही सदन की एक वरिष्ठ सदस्य हैं।’
उन्होंने दावा किया कि ‘फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स इन एशिया पैसेफिक’ जम्मू कश्मीर को एक अलग सत्ता के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि चिंता की बात यह भी है कि इस फोरम का वित्तीय सहयोग तंत्र राजीव गांधी ट्रस्ट से भी जुड़ता है।
भाजपा नेता ने कहा, ‘यह (फोरम) भारत की छवि को धूमिल करता है और हमारे सुरक्षा तंत्र पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। जिस प्रकार कांग्रेस देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करती है, उससे देश चिंतित है। इसलिए हमारे लोग चाहते हैं कि इस विषय पर चर्चा हो।’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठतम नेता विदेश में जाते हैं और वहां भी वही भाषा बोलते हैं जिसे जार्ज सोरोस प्रचारित करता है। उन्होंने कहा, ‘जार्ज सोरोस के कोष से चलने वाले फोरम या फाउंडेशन जिस बात का प्रचार करते हैं, उनको कांग्रेस का वरिष्ठ नेता उठाता है और देश को अस्थिर करने के लिए उन बातों को दोहराता है’ ’
भाजपा प्रमुख ने कहा कि यह देश की भीतरी एवं बाह्य सुरक्षा से जुड़ा मामला है और इसीलिए उनकी पार्टी के सदस्य इस पर विस्तार से चर्चा चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में जिस प्रकार सरकार विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ा रही है, उससे जार्ज सोरोस और उनका फाउंडेशन काफी चिंतित है। उन्होंने कहा कि सोरोस विभिन्न संगठनों के माध्यम से भारत में अस्थिरता लाना चाहते हैं और कांग्रेस उसका टूल..शस्त्र बन रही है।।
इसके बाद सभापति धनखड़ ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का मौका दिया। खरगे कुछ बोलने को खड़े हुए किंतु सत्ता पक्ष के लोगों की नारेबाजी जारी रही।
हंगामे के बीच धनखड़ ने सदन के नेता एवं नेता प्रतिपक्ष से कहा कि दोनों उनके कक्ष में आकर उनसे मिलें ताकि सदन में उत्पन्न गतिरोध को दूर करने के बारे में विचार किया जा सके। इस बीच उन्होंने बैठक को अपराह्न तीन बजे तक स्थगित कर दिया।
हंगामे के बीच ही खरगे ने नड्डा द्वारा लगाये गये आरोपों को पूरी तरह से असत्य करार देते हुए पलटवार किया कि ये लोग खुद ‘गद्दारी’ करते हैं एवं अंग्रेजों के एजेंट हैं।
इससे पहले एक बार के स्थगन के बाद जब बैठक शुरू हुई तो सभापति ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य राधामोहन दास अग्रवाल का नाम पुकारा।
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के लोग किस प्रकार से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस की मदद से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के एजेंट बनकर इस देश में विखंडन पैदा करना चाहते हैं।
अग्रवाल जब अपनी बात रख थे तब राजग के सदस्य अपने स्थानों पर खड़े होकर हंगामा और शोरगुल कर रहे थे।
जनता दल (यूनाईटेड) के संजय झा ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट आई है कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का जॉर्ज सोरोस से संबंध है।
उन्होंने कहा कि सदन में इस मुद्दे पर जरूर चर्चा होनी चाहिए।
झा ने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हुआ, उसमें भी सोरोस की भूमिका है।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सत्ताधारी दल के सदस्यों की ओर से हंगामा किए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि किसी सदस्य पर आरोप लगाना उचित नहीं है, खासकर तब जबकि वह सदन में उपस्थित ना हो।
भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से किसी भी सदस्य का नाम नहीं लिया गया है और नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी से पता चलता है कि उन्होंने स्वत: स्वीकार किया है कि ‘वह’ सदन में अनुपस्थित सदस्यों में से ही कोई है।
राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने कहा कि उन्हें भाजपा के सदस्यों ने सुबह ही कह दिया था कि आज सदन में जाने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि वह सदन को नहीं चलने देंगे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए सत्ताधारी दल के सदस्यों की ओर से जानबूझकर हंगामा किया जा रहा है।
कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने आसन से सवाल किया कि सत्ताधारी दल के सदस्यों को किस नियम के तहत बोलने की इजाजत दी रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ये अपनी सारी बातें रख रहे हैं। इनके माइक भी खुले रहते हैं। इनके फोटो भी (राज्यसभा टीवी पर) दिखाए जा रहे हैं। यह बिल्कुल गलत है। शोरगुल और हल्ला नहीं दिखाया जाता है लेकिन इनका दिखाया जा रहा है।’’
माकपा के जॉन ब्रिटास ने मांग की कि जॉर्ज सोरोस के साथ ही अदाणी मुद्दे पर भी सदन में चर्चा होनी चाहिए।
भाकपा के पी संदोष ने कहा कि अदाणी को बचाने के लिए सत्ता पक्ष के सदस्यों की ओर से जानबूझकर हंगामा किया जा रहा है।
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार अदाणी को बचाना चाहती है, इसलिए यह सब किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘अदाणी की चोरी को बचाने के लिए यह सब किया जा रहा है।’’
कांग्रेस के ही दिग्विजय सिंह ने सभापति पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि किस नियम के तहत उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा शुरु की है।
हंगामा न थमता देख, सभापति ने 12 बज कर 15 मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, सुबह सदन में सूचीबद्ध सभी कार्यों को नियम 267 के तहत स्थगित कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग संबंधी नोटिस खारिज किए जाने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा किया।
भाजपा के लक्ष्मीकांत बाजपेयी को शून्यकाल में बोलने का मौका दिया गया और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलना आरंभ किया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब सभापति ने नियम 267 के तहत नोटिस खारिज कर दिए हैं तो उसमें उल्लिखित मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘बहुत गलत हो रहा है। आप सभापति हैं। आप सदन के रक्षक हैं। कृपया आप पक्षकार मत बनिए।’’
इस दौरान, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने सदन चलने देने का आग्रह करते हुए कहा कि पिछले दिनों नेता सदन ने प्रस्ताव दिया था कि किसी भी सूरत में शून्यकाल और प्रश्नकाल बाधित बाधित नहीं होना चाहिए और इस पर सभी ने सहमति भी जताई।
उन्होंने हंगामा कर रहे सत्ता पक्ष के सदस्यों पर इस प्रस्ताव की अवहेलना करने का आरोप लगाया।
इस पर सभापति ने कहा कि उन्हें यह बात उस समय क्यों नहीं याद आई जब उनकी नजरों के सामने सत्र के पहले सप्ताह हंगामा होता रहा और कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि अक्सर हंगामा करने और आसन के सामने आ जाने वाले संजय सिंह की ओर से ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिाकर्जुन खरगे ने कहा, ‘‘बहुत देर से मैंने अपना हाथ उठाया हुआ था। जब सदन के नेता ने कुछ बात कही और मैं उससे सहमत नहीं था... इसलिए मैंने ऊंगली उठाकर आपका ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश की। लेकिन आपने मुझे मौका नहीं दिया। आपने मंत्री को बुला लिया। यह अच्छा नहीं है।’’
इस पर धनखड़ ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को उनके ऊपर आरोप लगाने की बजाय अपनी बात रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘...आप हर बार कहते हो कि मैं मंत्री का पक्ष लेता हूं... नेता सदन का पक्ष लेता हूं। आपके श्रीमुख से शोभा नहीं देता। आप मुद्दे पर बोलिए। मुझे आरोपित क्यों कर रहे हैं।’’
खरगे ने कहा कि नेता सदन ने कहा, ‘‘....सदन को नहीं चलाना अगर तय करके आए हैं तो आप लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं।’’
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने भी नोटिस खारिज किए जाने के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों को बोलने देने का अवसर देने पर सवाल उठाया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस हो गई, जिसके कारण सभापति को 11 बज कर 42 मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
भाषा
माधव वैभव