'चारधाम' भारत की अटूट आस्था, एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का दिव्य उत्सव : प्रधानमंत्री मोदी
मनीषा
- 22 Apr 2026, 04:04 PM
- Updated: 04:04 PM
(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को केदारनाथ मंदिर और 'चारधाम' की तीर्थयात्रा को भारत की अटूट आस्था, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का दिव्य उत्सव बताया।
उत्तराखंड स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के अवसर पर मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी तीर्थयात्राएं देश की शाश्वत विरासत और आध्यात्मिक चेतना की झलक प्रस्तुत करती हैं।
केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने को 'चारधाम यात्रा' की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
मोदी ने इस अवसर के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ''केदारनाथ मंदिर और चारधाम तीर्थयात्रा भारत की अटूट आस्था, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का एक दिव्य उत्सव है।''
प्रधानमंत्री ने चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंच रहे सभी श्रद्धालुओं के नाम एक पत्र भी लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी ओर से शुभकामनाएं व्यक्त करने के साथ ही तीर्थयात्रियों की कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना की।
चारधाम यात्रा हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थलों - बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा है।
श्रद्धालुओं को लिखे अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर पवित्र चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो चुका है।
उन्होंने कहा कि 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुल गए तथा केदारनाथ की यात्रा बुधवार से शुरू होगी, और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे।
मोदी ने कहा, ''बाबा केदारनाथ के दर्शन सहित चारों धामों की यह पवित्र तीर्थयात्रा भारत की शाश्वत सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव है। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति को एक नयी दिशा दी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगद्गुरु माधवाचार्य ने भी अपने आध्यात्मिक दर्शन को समृद्ध करने के लिए बद्रीनाथ की यात्रा की।''
मोदी ने कहा कि आज भी हिमालय की गोद में स्थित ये चारों तीर्थस्थल लोगों की शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य केंद्र हैं।
उन्होंने कहा कि हर साल विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग वहां पहुंचते हैं, जिससे 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना और मजबूत होती है, तथा इस वर्ष की यात्रा इसी परंपरा का विस्तार है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विकसित उत्तराखंड की भूमिका विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, "कुछ साल पहले बाबा केदार के प्रवेश द्वार पर मैंने कहा था कि यह दशक उत्तराखंड का होगा। आज राज्य की प्रगति उस विश्वास को वास्तविकता में बदल रही है। उत्तराखंड पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक विकास में नए रिकॉर्ड बना रहा है।"
मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में हो रहे विकास कार्यों ने चारधाम यात्रा को पहले से कहीं अधिक सुलभ, सुरक्षित और पवित्र बना दिया है, जिससे तीर्थयात्रियों, संतों तथा पर्यटकों को काफी सुविधा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों में उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित करने का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
मोदी ने कहा, "मैं उत्तराखंड आने वाले हर अतिथि से इस नए अनुभव का आनंद लेने का आग्रह करता हूं। मैं सभी यात्रियों को अपनी यात्रा के दौरान 'डिजिटल उपवास' रखने और उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को सही मायने में महसूस करने के लिए भी प्रोत्साहित करता हूं। इससे आपको एक अनूठी संतुष्टि मिलेगी।''
प्रधानमंत्री ने तीर्थयात्रियों से पांच संकल्प लेने का आग्रह किया – तीर्थस्थलों के अंदर और आसपास स्वच्छता बनाए रखना, जिसमें एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लेना शामिल है। दिव्य हिमालयी भूमि के प्रति संवेदनशील रहने में पर्यावरण में योगदान देना; सेवा, सहयोग और एकता पर जोर देना शामिल है।
अन्य दो संकल्पों में 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा देना या यात्रा बजट का कम से कम पांच प्रतिशत स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करना; और अनुशासन, सुरक्षा एवं शिष्टाचार का पालन करना, जिसमें यात्रा नियम और यातायात निर्देश शामिल हैं।
मोदी ने कहा कि हाल के वर्षों में, बड़ी संख्या में 'कंटेंट क्रिएटर्स' और 'इन्फ्लुएंसर्स' ने चारधाम का दौरा करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री ने उनसे उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और छोटी परंपराओं को आम जनता तक पहुंचाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि इन संकल्पों के साथ, आपकी यात्रा एक अद्वितीय अनुभव बन जाएगी। चारधाम यात्रा का हर चरण आपको प्रकृति की पवित्रता, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा राष्ट्र के प्रति आपके कर्तव्यों से और अधिक गहराई से जोड़ेगा।''
मोदी ने कहा, ''बाबा केदार और चारों धामों का आशीर्वाद आपके जीवन में नयी ऊर्जा, नयी प्रेरणा और नए संकल्प का संचार करे। यही मेरी कामना है। आप सभी को सफल, सुरक्षित, दिव्य और आध्यात्मिक यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।''
भाषा नेत्रपाल मनीषा
मनीषा
2204 1604 दिल्ली