हमें सिर्फ सफेद चादरें दिखीं, पुलिस पांच मिनट में वांगचुक को ले गई: प्रदर्शनकारी
नेत्रपाल
- 18 Jul 2026, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
(मानसी जगानी)
(तस्वीरों के साथ जारी)
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही मोबाइल फोन निकालकर वीडियो बनाने की कोशिश की लेकिन जब तक वे मंच की ओर पहुंचे, उनके सामने सफेद चादरों की दीवार खड़ी कर दी गई और इन्हीं चादरों की ओट में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को वहां से ले जाया गया। प्रदर्शनस्थल पर मौजूद लोगों ने यह जानकारी दी।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह सात से आठ बजे के बीच दिल्ली पुलिस के कई कर्मी जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और पिछले 20 दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक को अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि इन पुलिसकर्मियों में से कुछ ने सादे कपड़े पहन रखे थे।
उन्होंने बताया कि अर्धसैनिक बलों के जवानों ने बाहर से घेरा बना लिया और कुछ पुलिस अधिकारियों ने वांगचुक के गद्दे को चारों ओर से घेर लिया, जबकि अन्य कर्मियों ने बड़ी-बड़ी सफेद चादरें तान दीं ताकि भीड़ को कुछ दिखाई न दे। इसके बाद वांगचुक को उठाकर वहां खड़ी एक एम्बुलेंस में ले जाया गया।
पटना से शुक्रवार रात पहुंचे 22 वर्षीय प्रदर्शनकारी तल्हा ने कहा, ''सबकुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है।''
तल्हा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''लोग मंच की ओर दौड़ने लगे। हर कोई पुलिस को रोकने और वीडियो बनाने की कोशिश कर रहा था लेकिन हमें केवल सफेद चादरें दिखाई दे रही थीं। हमारे वहां पहुंचने से पहले ही वे उन्हें ले जा चुके थे।''
उन्होंने कहा कि वांगचुक को इस तरह ले जाते देखकर कई प्रदर्शनकारी स्तब्ध रह गए।
तल्हा ने रुंधे गले से कहा, ''जब वे उन्हें ले गए, तब मैं मंच के पास ही खड़ा था। पुलिस द्वारा 60 वर्षीय शिक्षक को इस तरह उठाकर ले जाते देखना बेहद दुखद था। ऐसा लग रहा था कि मानो उनका अपहरण किया जा रहा हो। हम सोनम वांगचुक का समर्थन करने यहां आए हैं और इससे हमारा हौसला नहीं टूटेगा। लोग डरे हुए हैं लेकिन हम प्रदर्शन जारी रखेंगे।''
कई प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस कई दिनों से प्रदर्शन स्थल पर नजर रख रही थी और उसने उस समय कार्रवाई की, जब वांगचुक के आसपास कम स्वयंसेवक मौजूद थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि शुक्रवार शाम प्रदर्शन के दौरान किसी ने वांगचुक पर कोई वस्तु फेंकी थी।
प्रदर्शन की शुरुआत से ही जंतर-मंतर पर लगभग लगातार मौजूद तेजवीर ने कहा, ''उन्हें (पुलिसकर्मियों को) पता था कि कब आना है।''
वांगचुक को ले जाए जाने के बाद तेजवीर ने स्वयं भी भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पूरी कार्रवाई करीब पांच से 10 मिनट में समाप्त हो गई।
जब वांगचुक को एम्बुलेंस की ओर ले जाया जा रहा था, तब प्रदर्शन स्थल के अलग-अलग हिस्सों से लोग वहां दौड़कर पहुंचे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों के रास्ता खाली कराने के दौरान धक्का-मुक्की हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों का दावा है कि अफरा-तफरी में कुछ स्वयंसेवकों को मामूली चोटें भी आईं।
पुलिस ने हालांकि कहा कि चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की लेकिन पुलिसकर्मियों ने अत्यधिक संयम बरतते हुए कार्रवाई की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जब वांगचुक को ले जाया जा रहा था, उसी समय पुलिसकर्मियों का एक अन्य समूह पास में लगे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के उस शिविर की ओर बढ़ा जहां छात्र नेहा, आमीन और मनीष भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि मंच की ओर दौड़े लोग वापस लौटे और भूख हड़ताल कर रहे तीनों छात्रों के चारों ओर हाथों में हाथ डालकर मानव शृंखला बना ली तथा पुलिस को छात्रों तक पहुंचने से रोक दिया।
नेहा ने कहा, ''वे हमारे तंबू की ओर भी आए थे। तब तक लोग हमारे चारों ओर जमा हो गए थे।''
जंतर-मंतर के प्रवेश द्वार पर पूरे दिन कड़ी सुरक्षा रही। प्रदर्शनस्थल के आसपास कई स्तरों पर पुलिसकर्मी तैनात थे। धातु के अवरोधक लगाकर लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई और सुरक्षाकर्मी भीतर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर नजर रख रहे थे। दोपहर तक प्रदर्शन समाप्त होने के कोई संकेत नहीं थे।
जिस गद्दे पर वांगचुक पिछले तीन सप्ताह थे, वह मंच पर ही रखा था। स्वयंसेवकों ने उसके पीछे वांगचुक की श्वेत-श्याम तस्वीर रख दी।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। जुलाई की गर्मी में थोड़ी राहत देने वाले मेज पर रखे पंखे बंद हो गए और काले तिरपाल के नीचे बैठे लोग प्लास्टिक के छोटे हस्तचालित पंखों से एक-दूसरे को हवा कर रहे थे।
कई प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि पुलिस कार्रवाई के बाद करीब एक घंटे तक मोबाइल नेटवर्क ने काम करना बंद कर दिया था।
अहमदाबाद से तीन दिन पहले प्रदर्शन में शामिल होने आए संदीप ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''मैं अहमदाबाद से इसलिए आया क्योंकि अब मुझसे घर पर नहीं रहा जा रहा था। मेरी मां सुबह से फोन करके वापस आने को कह रही हैं, लेकिन अब मैं यहां से नहीं जा सकता।''
उन्होंने कहा, ''आज जो हो रहा है, वह वर्षों से प्रश्नपत्र लीक होने और युवाओं के भविष्य के साथ किए गए व्यवहार का परिणाम है। अगर हम अब नहीं खड़े हुए तो कुछ नहीं बदलेगा।''
पास ही मौजूद नागपुर से आए चिराग ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''जब पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई तो भारी अवरोधक लगाए गए और स्वयंसेवकों के साथ धक्का-मुक्की हुई। अगर अधिकारियों को वास्तव में वांगचुक के स्वास्थ्य की चिंता थी तो वे उनसे अनशन समाप्त करने का सम्मानपूर्वक अनुरोध कर सकते थे और बातचीत का भरोसा दे सकते थे। इसके बजाय वे उन्हें जबरन ले गए। सोमवार को कुछ न भी हो, तब भी प्रदर्शन जारी रहेगा।''
उन्होंने यह बात 20 जुलाई को संसद तक निकाले जाने वाले प्रस्तावित मार्च का उल्लेख करते हुए कही।
आयोजकों में शामिल एक व्यक्ति ने कहा, ''चिकित्सक हर दिन वांगचुक की जांच करते थे। हमें रोज बताया जाता था कि उनके महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों की जांच की जा रही है।''
वांगचुक के अनशन पर नजर रख रहे चिकित्सकों ने शुक्रवार को बताया था कि अनशन शुरू होने के बाद से उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है।
दोपहर तक प्रदर्शन स्थल एक बार फिर लोगों से भर गया। कई प्रदर्शनकारियों ने काली तिरपाल के नीचे एकत्र होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
भाषा सिम्मी नेत्रपाल
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