तरुण तेजपाल के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में बचाव पक्ष ने अंतिम दलील पेश कीं
पवनेश
- 18 Jul 2026, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
पणजी, 18 जुलाई (भाषा) तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के वकील ने वर्ष 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में उन्हें (तेजपाल को) बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील के बाद शनिवार को बंबई उच्च न्यायालय में अपनी अंतिम दलीलें पेश करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता की गवाही भरोसे के लायक नहीं है और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा जाना चाहिए।
तेजपाल खुद भी अदालत में मौजूद थे। उनकी ओर से वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने दलीलें पेश कीं।
मामला तेजपाल की एक पूर्व सहकर्मी के आरोपों से जुड़ा है, जिन्होंने कहा था कि सात और आठ नवंबर 2013 को गोवा में तहलका पत्रिका के 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया था।
गोवा के मापुसा की एक अदालत ने मई 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इसके खिलाफ गोवा सरकार ने उच्च न्यायालय में अपील की थी।
शनिवार को उच्च न्यायालय की गोवा पीठ के न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसंडेकर के सामने पोंडा ने कहा कि घटना से पहले और बाद में शिकायतकर्ता का व्यवहार, उस समय के ईमेल, व्हाट्सऐप संदेश और अन्य दस्तावेज अभियोजन पक्ष के दावों से मेल नहीं खाते।
पोंडा ने शिकायतकर्ता के इस बयान पर सवाल उठाया कि उसने कथित घटना के तुरंत बाद थिंकफेस्ट कार्यक्रम नहीं छोड़ा क्योंकि उसे नौकरी जाने का डर था। उन्होंने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह घटना से पहले ही दूसरी नौकरी तलाश कर रही थी।
बचाव पक्ष के अनुसार, इनमें एक अन्य प्रकाशन के संपादक के साथ किया गया पत्राचार भी शामिल था, जिसमें शिकायतकर्ता ने लिखा था कि तहलका में उसका "समय अब समाप्त होने वाला है"। इसके अलावा, एक अन्य टेलीविजन कार्यक्रम से जुड़ा अधिक वेतन वाला नौकरी का अवसर तथा महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर पुस्तक लिखने के लिए लगभग एक लाख रुपये मासिक अनुदान वाली फेलोशिप का आवेदन भी शामिल था जिसे शिकायतकर्ता ने कथित घटना के तुरंत बाद हासिल कर लिया था।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने तुरंत आपराधिक मामला दर्ज कराने के बजाय "मामले को समाप्त करने" को लेकर बातचीत की थी।
ईमेल और व्हाट्सएप संदेशों का हवाला देते हुए पोंडा ने कहा कि इनमें तहलका से 'सेवरेंस पैकेज' (सेवा समाप्ति पर मिलने वाले भुगतान) को लेकर हुई चर्चा, परिवार के एक सदस्य की ओर से तत्काल माफी स्वीकार करने के बजाय बेहतर समझौते के लिए बातचीत करने की सलाह, कानूनी विकल्पों पर एक वरिष्ठ अधिवक्ता से परामर्श तथा 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की संभावना पर हुई बातचीत शामिल थी।
बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अब गोवा सरकार 30 जुलाई को उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत करेगी।
भाषा जोहेब पवनेश
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