राम मंदिर ट्रस्ट का 'सार्वजनिक न्यास' के रूप में पुनर्गठन को लेकर न्यायालय पहुंचा निर्मोही अखाड़ा
संतोष
- 19 Jul 2026, 12:31 AM
- Updated: 12:31 AM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) निर्मोही अखाड़े ने उच्चतम न्यायालय का रुख कर अयोध्या में राम मंदिर के कामकाज का प्रबंधन करने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को ''सार्वजनिक न्यास'' के रूप में पुनर्गठित करने का केंद्र को निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है।
शीर्ष अदालत में दायर अर्जी में निर्मोही अखाड़े ने कहा कि ट्रस्ट की मौजूदा संरचना और उसका ''निजी न्यास'' के रूप में गठन राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में उच्चतम न्यायालय के नवंबर 2019 के फैसले की भावना और उद्देश्य के अनुरूप नहीं है।
यह अर्जी उस निस्तारित मामले में दाखिल की गई है जिसमें शीर्ष अदालत ने नौ नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाकर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था।
निर्मोही अखाड़े ने महंत राजा रामचंद्राचार्य अतीत गुरु रघुनाथ दास के माध्यम से यह अर्जी दायर की है।
अर्जी में केंद्र को ट्रस्ट से जुड़ी व्यवस्था में उचित बदलाव करने और उसे सार्वजनिक न्यास के रूप में पुनर्गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसमें ट्रस्ट के न्यासी मंडल के फैसलों की निगरानी के लिए रामानंदी बैरागी संप्रदाय के संतों को पर्यवेक्षण का अधिकार देने और इसके लिए उचित संस्थागत सुरक्षा उपाय करने का निर्देश दिए जाने का भी अनुरोध किया गया है।
अर्जी में केंद्र द्वारा न्यासियों की नियुक्ति के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत तय करने का अनुरोध भी किया गया है।
इसमें कहा गया, ''निर्देश दिया जाए कि राम मंदिर में सभी अनुष्ठान, सेवा, भोग, पूजा और धार्मिक कार्यक्रम रामानंदी संप्रदाय तथा विवादित स्थल के अधिग्रहण से पहले निर्मोही अखाड़े द्वारा लंबे समय से अपनाई जा रही परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार ही किए जाएं।''
अर्जी में ''पांच जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को कुर्क की गई श्री रामलला विराजमान की मूल प्रतिमाओं को गर्भगृह में पुनः स्थापित करने'' का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
इसमें कहा गया कि ट्रस्ट को मूल प्रतिमाओं को बदलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। इसमें वैकल्पिक रूप से प्रतिमाएं निर्मोही अखाड़े को लौटाने का अनुरोध किया गया है, ताकि वह उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित कर सके।
अर्जी में कहा गया कि हाल में राम मंदिर में चढ़ावे की नकदी और कीमती वस्तुओं के बड़े पैमाने पर गबन के गंभीर आरोप सामने आए, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया।
इसमें कहा गया, ''इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि ट्रस्ट के कामकाज में न तो किसी के प्रति जवाबदेही है और न ही प्रभावी निगरानी। इसी कारण सार्वजनिक धार्मिक संपत्ति की देखरेख की जिम्मेदारी निभाने में गंभीर चूक हुई है।''
शीर्ष अदालत अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का अनुरोध करने वाली अलग-अलग याचिकाओं पर 20 जुलाई को सुनवाई करेगी।
भाषा सिम्मी संतोष
संतोष
1907 0031 दिल्ली