अदालत अल फलाह समूह के अध्यक्ष के खिलाफ ईडी के आरोप पत्र पर 27 मार्च को करेगी विचार
संतोष
- 13 Feb 2026, 06:33 PM
- Updated: 06:33 PM
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर आरोपपत्र पर सुनवाई के लिए 27 मार्च की तारीख तय की है।
दिल्ली में लाल किले के नजदीक पिछले साल 10 नवंबर को हुए बम धमाके के बाद अल फलाह समूह एजेंसियों की जांच के दायरे में आया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने बचाव पक्ष के वकील द्वारा सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किये जाने समेत आरोपपत्र में उल्लिखित मूल दस्तावेजों की सूची मुहैया कराने की अर्जी दिये जाने के बाद स्थगन आदेश दिया।
न्यायालय ने बचाव पक्ष की अर्जी को रिकॉर्ड में दर्ज करने के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया। इसी के साथ अदालत ने सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत और 14 दिन के लिए बढ़ा दी।
ईडी ने 16 जनवरी को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की 140 करोड़ रुपये की जमीन और इमारतों को जब्त कर लिया था। एजेंसी ने सिद्दीकी और उनके धर्मार्थ न्यास के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया था।
ईडी ने पांच फरवरी को ने निजी विश्वविद्यालय के कामकाज में कथित अनियमितताओं के मामले में सिद्दीकी को जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया था।
अदालत ने सिद्दीकी को 31 जनवरी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था जिसकी मियाद समाप्त होने पर शुक्रवार को उसे न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया।
इससे पहले, नवंबर 2025 में ईडी ने सिद्दीकी को उसके अल फलाह धर्मार्थ न्यास द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों में नामांकित छात्रों के साथ धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के आरोपों में गिरफ्तार किया था।
ईडी की अल फलाह समूह के खिलाफ जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी पर आधारित है जिनमें आरोप लगाया गया है कि अल फलाह विश्वविद्यालय ने गैरकानूनी लाभ के लिए छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों को गुमराह करने के लिए नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद)और यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की मान्यता होने के बारे में झूठे और भ्रामक दावे पेश किए।
ईडी ने इससे पहले आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय ने 2018 और 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, और आय में 'तेजी से वृद्धि' का उल्लेख किया, जो समूह के घोषित वित्तीय विवरणों या उसकी संपत्ति के विस्तार के अनुरूप नहीं थी।
एजेंसी के मुताबिक छात्रों से प्राप्त शुल्क और जनता से एकत्र की गई धनराशि को व्यक्तिगत और निजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया गया और सिद्दीकी ने अल फलाह धर्मार्थ न्यास, प्रबंध न्यासी, साथ ही साथ संबद्ध संस्थाओं पर वास्तविक नियंत्रण बनाए रखा था।
एक 'सफेदपोश आतंकी' मॉड्यूल की जांच के दौरान विश्वविद्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई। इस मामले में विश्वविद्यालय से जुड़े दो चिकित्सकों मुज़म्मिल अहमद गनाई और शाहीन सईद को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़े एक अन्य चिकित्सक डॉ. उमर-उन-नबी की पहचान उस आत्मघाती हमलावर के रूप में हुई, जिसने 10 नवंबर को लाल किले के नजदीक विस्फोटकों से भरी कार में धमाका किया, जिसमें 15 लोग मारे गए थे।
भाषा धीरज संतोष
संतोष
1302 1833 दिल्ली