न्यायालय ने शिक्षकों की मीम बनाने की वजह से निष्कासित छात्र को बोर्ड परीक्षा देने की अनुमति दी
नरेश
- 13 Feb 2026, 06:34 PM
- Updated: 06:34 PM
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने इंदौर के एक स्कूल में शिक्षकों की कथित आपत्तिजनक मीम प्रसारित करने के आरोप में निष्कासित छात्र को 10वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षा देने की अनुमति देते हुए काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) को प्रवेश पत्र जारी करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि छात्र ने परीक्षा देने के लिए पहले ही सीआईएससीई में पंजीकरण करा लिया है और यदि उसे अनुमति नहीं दी गई तो उसके शैक्षणिक वर्ष का नुकसान होगा।
पीठ ने फैसले में कहा, ''इन परिस्थितियों में, हम सीआईएससीई को निर्देश देते हैं कि वह याचिकाकर्ता के बेटे को प्रवेश पत्र/हॉल टिकट जारी करके परीक्षा में बैठने की अनुमति दे। विवाद की प्रकृति के मद्देनजर प्रतिवादी संख्या 5 (विद्यालय) याचिकाकर्ता के बेटे को अन्य छात्रों के साथ नहीं बल्कि एक अलग कमरे में परीक्षा की व्यवस्था करने के लिए स्वतंत्र है।''
शीर्ष अदालत ने कहा, '' इसके अलावा, प्रतिवादी संख्या 5/विद्यालय को शारीरिक शिक्षा और सामाजिक रूप से उपयोगी उत्पादक कार्य (एसयूपीडब्ल्यू) के लिए आंतरिक मूल्यांकन आयोजित करना होगा और मूल्यांकन अंक प्रतिवादी संख्या 6/सीआईएससीई को प्रस्तुत करने होंगे।''
पीठ ने स्कूल और सीआईएससीई को यह सुनिश्चित करने को कहा कि लड़का 17 फरवरी से शुरू होने वाली आगामी परीक्षा में शामिल हो।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की, ''उसे सुधारने के बजाय, आपने (स्कूल ने) उसे निष्कासित करने और उससे अपना संबंध तोड़ने का फैसला किया है। एक स्कूल के रूप में, आपको बच्चे को सुधारने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी, लेकिन आपने उसे केवल इसलिए निष्कासित कर दिया क्योंकि आपने कहा कि वह एक शरारती लड़का था।''
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता निपुण सक्सेना ने कहा कि यदि न्यायालय छात्र को परीक्षा देने की अनुमति नहीं देता है, तो उसके एक शैक्षणिक वर्ष का नुकसान होगा।
उन्होंने दलील दी कि छात्र को स्कूल से निष्कासित करना एक अनुचित दंड था और सुधारात्मक कदम उठाने के बजाय, स्कूल ने उसे अलग कर दिया।
उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पिछले वर्ष नवंबर के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिसमें 2024-2025 के नौंवी कक्षा के शैक्षणिक सत्र के बीच में 13 वर्षीय छात्र को स्कूल से निष्कासित करने के फैसले को बरकरार रखा गया था।
भाषा धीरज नरेश
नरेश
1302 1834 दिल्ली