हम विकास का समर्थन करते हैं, विस्तारवाद का नहीं: प्रधानमंत्री मोदी
धीरज नेत्रपाल
- 02 Aug 2024, 12:14 AM
- Updated: 12:14 AM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) भारत और वियतनाम ने बृहस्पतिवार को अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करने के लिए एक कार्ययोजना को मंजूरी दी। दोनों देशों ने रक्षा संबंधों को बढ़ाने और चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के मद्देनजर दक्षिण चीन में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों को दोगुना करने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके वियतनामी समकक्ष फाम मिन्ह चिन्ह के बीच हुई व्यापक वार्ता में दक्षिण चीन सागर और समग्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर प्रमुखता से चर्चा हुई। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत विकास का समर्थन करता है, न कि विस्तारवाद का। उनकी इस टिप्पणी को चीन के विस्तारवादी व्यवहार की ओर परोक्ष संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि भारत वियतनाम को 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा प्रदान करेगा, ताकि मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
चिन्ह ने मीडिया को दिए वक्तव्य में कहा कि दोनों पक्ष सूचना साझा करने और दक्षिण चीन सागर को शांति, स्थिरता और मित्रता के जलक्षेत्र में बदलने के प्रयासों को दोगुना करने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष उप विदेश मंत्री स्तर की आर्थिक कूटनीति वार्ता प्रणाली स्थापित करेंगे।
दोनों पक्षों ने 2024-2028 की अवधि के दौरान व्यापक रणनीतिक साझेदारी के कार्यान्वयन के लिए ‘कार्य योजना’ सहित कुल नौ समझौतों और दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया।
चिन्ह ने कहा कि दोनों पक्ष अगले तीन से पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने पर सहमत हुए तथा अधिक ‘ठोस और प्रभावी’ व्यापार और निवेश सहयोग की वकालत की।
भारत की यात्रा पर मंगलवार को दिल्ली पहुंचे वियतनाम के प्रधानमंत्री ने बाद में एक थिंक टैंक में दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए एक दूरगामी व्यापार समझौते की वकालत की। भारत-वियतनाम के बीच मौजूदा व्यापार करीब 15 अरब अमेरिकी डॉलर है।
मोदी ने अपने मीडिया वक्तव्य में कहा, "हमारी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हमारी हिंद-प्रशांत दृष्टि में वियतनाम हमारा महत्वपूर्ण साझेदार है... हम विस्तारवाद का नहीं, विकासवाद का समर्थन करते हैं।"
उन्होंने कहा, "हम एक स्वतंत्र, खुले, नियम-आधारित और समृद्ध हिंद-प्रशांत के लिए अपना सहयोग जारी रखेंगे।"
मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा मुद्दों से निपटने के लिए सहयोग को मजबूत करने का फैसला किया है।
मोदी ने कहा, "हमारा मानना है कि 'विकसित भारत 2047' और वियतनाम के 'विजन 2045' ने दोनों देशों में विकास को गति दी है। इससे आपसी सहयोग के कई नए क्षेत्र खुल रहे हैं। और इसलिए, अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए, आज हमने एक नयी कार्ययोजना अपनायी है।"
अपने वक्तव्य में चिन्ह ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को विश्व के विकास के लिए ‘इंजन’ बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां प्रमुख शक्तियों की राजनीति उग्र रूप ले रही है।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन तथा उड़ान की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से यूएनसीएलओएस (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि) 1982 के सम्मान के आधार पर विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करेंगे।
चिन्ह ने कहा, ‘‘हमने दक्षिण चीन सागर को शांति, स्थिरता, मैत्री और सहयोग का सागर बनाने के लिए जानकारी साझा करने और साथ मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की है, जहां सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन तथा उड़ान की स्वतंत्रता कायम रहेगी।’’
मोदी और चिन्ह ने एक संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन एवं उड़ान की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व की पुष्टि की, साथ ही धमकी या बल प्रयोग का सहारा लिए बिना यूएनसीएलओएस के अनुसार विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करने का आह्वान किया।
दक्षिण चीन सागर हाइड्रोकार्बन का एक बड़ा स्रोत है जिस पर संप्रभुता के चीन के व्यापक दावों को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं। इस पर वियतनाम, फिलीपीन और ब्रुनेई सहित क्षेत्र के कई देशों के जवाबी दावे हैं।
संयुक्त वक्तव्य के मुताबिक, ‘‘दोनों नेताओं ने दावेदारों और अन्य सभी देशों द्वारा सभी गतिविधियों के संचालन में गैर-सैन्यीकरण और आत्म-संयम के महत्व को रेखांकित किया, तथा ऐसी कार्रवाइयों से बचने पर जोर दिया, जो स्थिति को और जटिल बना सकती हैं।’’
इसमें कहा गया कि मोदी और चिन्ह ने इस बात पर जोर दिया कि यूएनसीएलओएस समुद्री अधिकारों, संप्रभुता, क्षेत्राधिकार और समुद्री क्षेत्रों पर वैध हितों के निर्धारण का आधार है।
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की।
मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए नए कदम उठाए गए हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों ने ना त्रांग स्थित टेलीकम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक आर्मी सॉफ्टवेयर पार्क का डिजिटल तरीके से उद्घाटन भी किया। इसे नयी दिल्ली की विकास सहायता से बनाया गया है।
मोदी ने कहा, ‘‘30 करोड़ अमेरिकी डॉलर की स्वीकृत ऋण सुविधा वियतनाम की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस बात पर सहमत हैं कि आपसी व्यापार क्षमता को साकार करने के लिए आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते की समीक्षा जल्द से जल्द पूरी की जानी चाहिए।’’
वियतनाम आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन) का एक महत्वपूर्ण देश है।
मोदी ने कहा, ‘‘हमने हरित अर्थव्यवस्था और नयी उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। ऊर्जा और बंदरगाह विकास में एक-दूसरे की क्षमताओं का आपसी लाभ के लिए उपयोग किया जाएगा।’’
प्रधानमंत्री ने वियतनाम के लोगों को भारत के ‘बौद्ध सर्किट’ में आने का निमंत्रण भी दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘और हम चाहते हैं कि वियतनाम के युवा नालंदा विश्वविद्यालय का भी लाभ उठाएं।’’
मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले एक दशक में भारत-वियतनाम संबंधों में ‘‘विस्तार और प्रगाढ़ता’’ आई है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों में हमने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल दिया है। हमारे द्विपक्षीय व्यापार में 85 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और विकास साझेदारी में आपसी सहयोग बढ़ा है। रक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों में आपसी सहयोग ने नयी गति पकड़ी है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘पिछले एक दशक में कनेक्टिविटी बढ़ी है। और आज हमारे बीच 50 से अधिक सीधी उड़ानें हैं। इसके साथ ही पर्यटन में लगातार वृद्धि हो रही है और लोगों को ई-वीजा की सुविधा भी दी गई है।’’
वियतनाम ने माई सन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए भारत की प्रतिबद्धता तथा ए, एच और के. ब्लॉक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए कार्यों के साथ-साथ एफ ब्लॉक में आगामी परियोजना की सराहना की।
भाषा धीरज