दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े 'डिजिटल अरेस्ट' गिरोह का भंडाफोड़ किया
मनीषा
- 16 Jun 2026, 04:36 PM
- Updated: 04:36 PM
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) दिल्ली पुलिस ने कथित रूप से पाकिस्तान से जुड़े 'डिजिटल अरेस्ट' गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि आरोपी धोखाधड़ी से हासिल पैसे को 'म्यूल' (कमीशन पर मिलने वाले) बैंक खातों और क्रिप्टकरेंसी के जरिए इधर-उधर करने में कथित रूप से मदद करते थे।
आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के कन्नौज के रहने वाले अंकित (23), कानपुर के सैफ अंसारी (34) और दिल्ली के 24 साल के मोहम्मद नूर आलम के तौर पर हुई है।
उन्होंने बताया कि उनके पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं और धोखाधड़ी से जुड़े 1,03,142 रुपये 'फ्रीज़' कर दिए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, 19 जनवरी को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर एक शिकायत दर्ज कराई गई थी जिसमें आरोप लगाया गया कि शिकायतकर्ता को कुछ व्यक्तियों ने दूरसंचार कंपनी के कर्मचरी, पुलिस अधिकारी और सरकारी अफसर बनकर ठग लिया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसे आठ जनवरी को एक महिला ने फोन कर खुद के दूरसंचार कंपनी की कर्मचारी होने का दावा किया और उसे बताया कि उसके 'आधार' कार्ड पर जारी एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल बेंगलुरु में अवैध गेमिंग गतिविधियों में किया जा रहा है।
पुलिस ने बताया कि बाद में उसे एक वीडियो कॉल आई जिसमें व्यक्ति ने खुद को बेंगलुरु के इंदिरा नगर थाने का उपनिरीक्षक बताया। जालसाजों ने कथित तौर पर उसे बताया कि उसके नाम पर खोले गए कई बैंक खाते धन शोधन के मामले से जुड़े हैं और उनकी जांच की जा रही है।
पुलिस ने कहा कि पीड़ित को लगातार वीडियो निगरानी में रखा गया और उसे अपने बैंक खातों, सावधि जमा, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेशों के विवरण का खुलासा करने के लिए राजी किया गया। इसके बाद जालसाज़ों ने उसे अपने निवेश से पैसा निकालने और रकम को उनके द्वारा प्रदान किए गए बैंक खातों और यूपीआई आईडी में स्थानांतरित करने के लिए मना लिया और दावा किया गया कि यह आरबीआई लेखा परीक्षकों द्वारा सत्यापन के लिए आवश्यक है और बाद में पैसा वापस कर दिया जाएगा।
पुलिस के मुताबिक, नौ से 16 जनवरी के बीच पीड़ित ने विभिन्न खातों में कुल 15.31 लाख रुपये स्थानांतरित कर दिए और फिर उसे ठगे जाने का एहसास हुआ।
जांच के दौरान, पुलिस ने दो बैंक खातों का पता लगाया जिनमें ठगी के पैसे का कुछ हिस्सा भेजा गया था। तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि खातों से जुड़े मोबाइल नंबर एक ही उपकरण से संचालित हो रहे थे और फरीदाबाद में स्थित थे।
पूछताछ के दौरान, नूर आलम ने कथित तौर पर खुलासा किया कि उसने साइबर जालसाजों के लिए बैंक खातों की व्यवस्था की और वह पाकिस्तान में बैठे बिलाल नामक व्यक्ति के साथ नियमित संपर्क में था।
पुलिस ने बताया कि ठगी से हासिल पैसे को पहले उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में लाया जाता था और फिर इसे यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदल कर विदेशी में बैठे आकाओं को भेज दिया जाता था।
उसे क्रिप्टोकरेंसी में कथित तौर पर कमीशन मिलता था जिसे बाद में विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से निकाल लिया जाता था।
भाषा नोमान नोमान मनीषा
मनीषा
1606 1636 दिल्ली