मान ने अपने खिलाफ अकाल तख्त के आदेश पर कहा : वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मैं नहीं
सुरेश
- 16 Jun 2026, 04:01 PM
- Updated: 04:01 PM
चंडीगढ़, 16 जून (भाषा) सिखों की शीर्ष धार्मिक संस्था अकाल तख्त द्वारा एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु विद्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किये जाने के एक दिन बाद उन्होंने मंगलवार को कहा कि वीडियो में नजर आ रहा व्यक्ति वह नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि धार्मिक संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारी अपने ''राजनीतिक आकाओं के इशारे पर'' उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह मामला इस साल जनवरी में अकाल तख्त द्वारा मान को तलब किये जाने से संबंधित है। 'गुरु की गोलक' (गुरुद्वारे का दान-पात्र) के बारे में कथित तौर पर टिप्पणी करने और एक वीडियो क्लिप में सिख गुरुओं तथा मारे गए चरमपंथी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ ''आपत्तिजनक गतिविधियों'' में शामिल होने को लेकर उन्हें तलब किया गया था।
मान ने मंगलवार को अपने वीडियो संदेश में कहा कि उनके खिलाफ जारी 'हुकमनामा' में दावा किया गया है कि वीडियो में नजर आ रहा व्यक्ति वही हैं और इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, ''मैं इस वीडियो को पूरी तरह खारिज करता हूं।''
मान ने कहा कि जब उन्हें पहले अकाल तख्त में बुलाया गया था, तब भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि कथित वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं। उन्होंने कहा, ''वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मेरे कद-काठी से मेल नहीं खाता।''
मान ने अकाल तख्त के जत्थेदार की ओर इशारा करते हुए कहा, "लेकिन मुझे इस बात को लेकर आश्चर्य है कि धार्मिक संस्थाओं के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोग अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर इस तरह के झूठे प्रचार कर रहे हैं।"
उन्होंने अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज का जिक्र करते हुए यह बात कही, जिन्होंने सोमवार को मुख्यमंत्री के खिलाफ फ़रमान जारी किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''ये लोग मुझे बदनाम करने का अभियान चला रहे हैं, क्योंकि मैं पानी, 'गुरबाणी', खेती और युवाओं की सुरक्षा के लिए फैसले ले रहा हूं, जो उन्हें स्वीकार नहीं है।''
मान ने कहा कि धर्म का इस्तेमाल उन्हें बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वह अकाल तख्त को सर्वोच्च संस्था मानते हैं और उसके प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहेंगे।
अकाल तख्त जत्थेदार की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए मान ने कहा, ''वहां जो राजनीतिक नियुक्तियां हुई हैं, उनके बारे में सिख संगत अच्छी तरह जानता है कि वहां किस तरह के फैसले लिये जा रहे हैं।''
मान ने कहा कि अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) पहले यह पूछ रहे थे कि बेअदबी-रोधी कानून क्यों नहीं बनाया गया।
उन्होंने जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 का जिक्र करते हुए कहा, ''जब यह कानून बनाया गया था, तो उन्होंने सवाल किया था कि उनसे सलाह क्यों नहीं ली गई और इसे मानने से इनकार कर दिया था। इससे साबित होता है कि वह हर दिन अपने फैसले बदलते रहते हैं।''
इस अधिनियम में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की किसी भी घटना के लिए कठोर सजा का प्रावधान है, जिसमें उम्रकैद भी शामिल है।
मान ने दावा किया कि अकाल तख्त का उनलोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का इरादा नहीं है, जिन्होंने उसके समक्ष बेअदबी और गोलीबारी की घटनाओं को ''स्वीकार'' किया था।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल दो दिसंबर 2024 को अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए थे। उस समय, सिख धर्मगुरुओं ने उन्हें और अन्य नेताओं को 2007 से 2017 के बीच पंजाब में पार्टी और उसकी सरकार द्वारा की गई ''गलतियों'' के लिए धार्मिक सजा सुनाई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिम फैसला जनता करेगी। उन्होंने कहा, ''मैं पंजाब के लिए फैसले लेता रहूंगा।''
अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सोमवार को अमृतसर में 'फसील' (अकाल तख्त के मंच) से मान के खिलाफ आदेश जारी करते हुए कहा था कि वायरल वीडियो की दो फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं ने पुष्टि की है और यह न तो परिवर्तित किया गया है और न ही इसे एआई की मदद से तैयार किया गया है।
अकाल तख्त ने धार्मिक बेअदबी-रोधी कानून के सिलसिले में 29 जून को राज्य के सभी सिख विधायकों (चाहे वे किसी भी पार्टी के हों) को तलब किया है।
भाषा सुभाष सुरेश
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1606 1601 चंडीगढ़