न्यायालय ने जुड़वां शिशुओं को उनकी मां से अलग करने को 'सर्वोच्च क्रूरता' करार दिया
सुरेश
- 19 Feb 2026, 09:31 PM
- Updated: 09:31 PM
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को वैवाहिक विवाद में अलग हुए पति द्वारा छह महीने की उम्र में जुड़वां बच्चों को उनकी मां से अलग करने के मामले को "सर्वोच्च क्रूरता" करार दिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने डेढ़ साल के बच्चों को मां से अलग करने के लिए पति को फटकार लगाई और अलग रह रहे पति-पत्नी को अगली सुनवाई की तारीख पर अपने बच्चों के साथ न्यायाधीशों के समक्ष कक्ष में उपस्थित होने का आदेश दिया।
पीठ ने कहा, "पति ने महज छह महीने के बच्चों को उनकी मां से अलग करके घोर क्रूरता की है। बच्चों का कल्याण सर्वोपरि है। यह न्याय का घोर अपमान है। छह महीने के छोटे बच्चों को उनकी मां से अलग नहीं किया जा सकता। यह घोर क्रूरता है।"
न्यायालय अलग रह रहे पति की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पत्नी द्वारा लखनऊ में शुरू किए गए वैवाहिक मामलों को पंजाब में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
पति के वकील ने कहा कि अदालत को जुड़वां बच्चों के संबंध में यथास्थिति को नहीं बदलना चाहिए, क्योंकि यह उनके लिए हानिकारक होगा।
पीठ ने वकील से कहा कि कोई भी दाई या दादी छह महीने के बच्चों की देखभाल उतनी अच्छी तरह से नहीं कर सकती जितनी कि एक मां कर सकती है।
पति के वकील ने दावा किया कि वह (पत्नी) स्वयं वैवाहिक घर छोड़कर चली गई थी और बच्चों को अपने पास रखने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं थी।
पीठ ने वकील से कहा कि अगर उन्हें अपने जुड़वां बच्चों (लड़का और लड़की) के संरक्षण में दिलचस्पी नहीं होती, तो वह इस मामले को उच्चतम न्यायालय तक नहीं लड़तीं।
न्यायमूर्ति मेहता ने टिप्पणी की, ''वास्तव में उसे उसके बच्चों के बिना उसके ससुराल से निकाल दिया गया था। उसके बच्चों को उससे अलग करके उसे पीटा गया और उस पर अत्यधिक क्रूरता की गई।'' महिला के वकील ने कहा कि पति शराबी था और वीडियो कॉल पर भी बच्चों को दिखाने को तैयार नहीं था।
पति के वकील ने कहा कि महिला ने लखनऊ में कई मामले दर्ज कराए हैं और वह उन्हें स्थानांतरित करने का अनुरोध कर रहा है।
पीठ ने गौर किया कि महिला एक शिक्षिका थी और पति एक व्यवसायी है और उससे पूछा कि वह अपनी अलग रह रही पत्नी को कितना भरण-पोषण दे रहा है और कितना देने को तैयार है।
पीठ ने आदेश दिया, ''आप जवाब दाखिल करें और अगली तारीख यानी 26 फरवरी को आप दोनों बच्चों के साथ अदालत के कक्ष में उपस्थित हों।''
भाषा प्रशांत सुरेश
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