गुजरात में एससी/एसटी अधिनियम के तहत गठित निगरानी प्रकोष्ठ की नियमित बैठक नहीं : मेवानी
सुरेश
- 19 Feb 2026, 08:23 PM
- Updated: 08:23 PM
गांधीनगर, 19 फरवरी (भाषा) गुजरात विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस के विधायक जिग्नेश मेवानी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गठित राज्य निगरानी प्रकोष्ठ की नियमित बैठकें नहीं बुला रहे हैं। इसके बाद सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई।
विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए, मेवानी ने दावा किया कि अधिनियम के प्रावधानों के तहत मुख्यमंत्री का राज्यस्तरीय निगरानी समिति की बैठकें आयोजित करना अनिवार्य है, लेकिन ये बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जा रही हैं।
मेवानी ने उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया है कि इस तरह की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी।
कांग्रेस विधायक ने यह जानना चाहा कि क्या बैठकें वाकई नियमित रूप से आयोजित की गईं और आखिरी बैठक कब हुई थी। दलित समुदाय से आने वाले विधायक ने यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद पटेल ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराने वाले किसी पीड़ित से मुलाकात की थी या नहीं।
आरोपों का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मनीषा वकील ने सदन को बताया कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत निगरानी प्रकोष्ठ की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। उन्होंने मेवानी के आरोपों को "बेबुनियाद" बताया।
वकील ने कहा कि सरकार जरूरत पड़ने पर पीड़ितों को सहायता प्रदान करती है और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित की गईं। ये बैठकें जून 2019, सितंबर 2024 और दिसंबर 2025 में हुईं।"
मेवानी द्वारा अंतिम बैठक की तारीख स्पष्ट करने के लिए दबाव डालने पर, वकील ने कहा कि यह चार दिसंबर को हुई थी, और आगे कहा कि मेवानी स्वयं बैठक में उपस्थित नहीं थे।
कांग्रेस विधायक ने उनके इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि हालांकि समिति में दलित और आदिवासी विधायक और सांसद शामिल हैं, लेकिन उनके लिए ऐसी बैठकों में भाग लेना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा, ''लेकिन कानून के अनुसार, मुख्यमंत्री के लिए बैठक आयोजित करना अनिवार्य है।''
इस मौके पर गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने हस्तक्षेप करते हुए कांग्रेस विधायक पर प्रचार पाने के लिए यह मुद्दा उठाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "जब किसी के दावों का पर्दाफाश होता है तो मीडिया कैमरों के सामने ऐसे सवाल उठाए जाते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने बैठक बुलाई थी, लेकिन मेवानी खुद अनुपस्थित थे।
संघवी ने कहा कि सदन के अंदर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि यह मामला ध्यान आकर्षित करने के लिए उठाया जा रहा है।
इसके चलते भाजपा और कांग्रेस विधायकों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई, जिसमें विपक्षी दल के कई विधायक मेवानी के समर्थन में खड़े हो गए।
विधानसभाध्यक्ष शंकर चौधरी ने मेवानी समेत सभी सदस्यों से बार-बार अपनी सीट पर बैठने का अनुरोध किया, लेकिन जुबानी जंग काफी देर तक जारी रही। विधानसभा अध्यक्ष के कई बार हस्तक्षेप के बाद आखिरकार स्थिति शांत हुई।
प्रश्नकाल के बाद, कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने मेवानी के आचरण पर आपत्ति जताई।
वाघानी ने कहा कि अध्यक्ष द्वारा बार-बार बैठने के लिए कहे जाने के बावजूद उन्होंने (मेवानी ने) बात नहीं मानी।
कांग्रेस विधायक शैलेश परमार ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर ही मेवानी ने अपनी सीट ग्रहण कर ली थी और इस मामले को आगे बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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1902 2023 गांधीनगर