एनजीओ हमारे नाम का दुरुपयोग कर रहा है, जो चिंताजनक है: एनएचआरसी
माधव
- 19 Feb 2026, 05:15 PM
- Updated: 05:15 PM
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बृहस्पतिवार को बताया कि उसने कुछ गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा ''उसके नाम और लोगो का दुरुपयोग'' किए जाने के मामले का संज्ञान लिया और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने के लिए नोटिस जारी किया है।
ये एनजीओ ऐसे नामों से पंजीकृत हैं जो एनएचआरसी के नाम से मिलते जुलते हैं और लोगों को भ्रमित करते हैं।
एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि इस तरह के ''भ्रामक नामों का जारी रहना जनता के विश्वास को कम कर सकता है, जनादेश के दुरुपयोग, धन के संभावित गबन और सरकारी संस्थाओं के लिए एनएचआरसी जैसे वैधानिक निकाय तथा गैर-सरकारी संगठनों के बीच अंतर करने में भ्रम पैदा कर सकता है।''
मानवाधिकार आयोग ने कहा कि उसने पहले भी विभिन्न मंचों के माध्यम से ''अपने नाम और लोगो के दुरुपयोग'' के संबंध में चिंता व्यक्त की थी और संबंधित अधिकारियों को ऐसे ''संदिग्ध संगठनों'' के पीछे के लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सूचित किया था।
हालांकि, बयान में कहा गया है कि उल्लंघन के मामले लगातार उसके संज्ञान में आते रहते हैं।
एनएचआरसी ने कहा कि उसे देश भर में व्यक्तिगत शिकायतकर्ताओं के साथ-साथ एनजीओ से भी मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें मिल रही हैं।
बयान में कहा गया, ''इन शिकायतों की जांच करते समय आयोग ने पाया है कि कई एनजीओ ने एनएचआरसी के नाम से भ्रामक रूप से मिलते-जुलते नामों से अपना पंजीकरण कराया है।''
बयान में कहा गया, ''हाल ही में आयोग को 'राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद (एनएचआरसी)' के नाम से पंजीकृत एक गैर-सरकारी संगठन के बारे में पता चला, जो कथित तौर पर 2022 में दिल्ली सरकार के तहत पंजीकृत है। इसकी प्रचार सामग्री में दावा किया गया है, ''नीति आयोग द्वारा पंजीकृत'', ''कंपनी मामलों के मंत्रालय द्वारा पंजीकृत'', ''भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन पंजीकृत'' और ''आंध्र प्रदेश मानवाधिकार परिषद संघ'' से संबद्ध।
बयान में कहा गया है कि उक्त संगठन से संबंधित एक 'विजिटिंग कार्ड' पर 'वेंकटेश, राज्य अध्यक्ष, कर्नाटक' भी अंकित है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है।
बयान के अनुसार, यह पाया गया है कि अपनाया गया नाम और 'अध्यक्ष' पदनाम 'भ्रामक है और भ्रम पैदा करता है''।
भाषा यासिर माधव
माधव
1902 1715 दिल्ली