नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में, जल्द ही पूरी तरह समाप्त होगा : सीआरपीएफ महानिदेशक
अविनाश
- 19 Feb 2026, 06:42 PM
- Updated: 06:42 PM
(तस्वीरों सहित)
गुवाहाटी, 19 फरवरी (भाषा) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई घोषणा के अनुसार मार्च तक देश से इस समस्या को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा।
बल के महानिदेशक (डीजी) सिंह ने गुवाहाटी में बल की डीजी परेड को संबोधित करते हुए कहा कि सीआरपीएफ ने पिछले साल अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियानों में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए हैं।
उन्होंने सीआरपीएफ की 'जनरल ड्यूटी' बटालियन और कोबरा कमांडो की भूमिकाओं को रेखांकित करते हुए कहा, "नक्सलियों के खिलाफ अभियानों में हमने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियानों में निर्णायक कदम उठाए गए हैं।" सिंह ने कहा, ''नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है। जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है, उसी के अनुसार मार्च 2026 तक यह पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।''
जम्मू कश्मीर में अपने बल की भूमिका का उल्लेख करते हुए महानिदेशक ने कहा कि यह आतंकवादियों के खिलाफ संयुक्त अभियानों में शामिल है। उन्होंने भारी बर्फबारी वाले क्षेत्रों में शिविर स्थापित करने तथा उन क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कर्मियों की सराहना की।
सिंह ने पूर्वोत्तर, विशेष रूप से मणिपुर में तैनात कर्मियों की भी सराहना की, जो क्षेत्र में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा, ''हमारा बल एक निष्पक्ष एजेंसी के रूप में इस क्षेत्र के लोगों का विश्वास जीतने में सक्षम रहा है।''
महानिदेशक ने कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए जवानों को याद किया और आश्वासन दिया कि सीआरपीएफ उन बलिदानियों के परिजन के साथ खड़ा रहेगा।
इस अवसर पर सिंह ने 61 पदक, आठ ट्राफी और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।
पिछले एक वर्ष में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित अग्रिम सैन्य चौकियों में से सर्वश्रेष्ठ चौकी को भी महानिदेशक से प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुआ।
परेड की कमान कमांडेंट स्तर के अधिकारी दीपक ढौंडियाल ने संभाली।
सीआरपीएफ की 87 वर्षगांठ परेड से पहले डीजी परेड आयोजित की गई। शनिवार को आयोगिज वर्षगांठ परेड में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल होंगे। ये दोनों कार्यक्रम पहली बार पूर्वोत्तर हिस्से में आयोजित किए जा रहे हैं।
भाषा यासिर अविनाश
अविनाश
1902 1842 गुवाहाटी