पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारियों पर छोड़ देनी चाहिए : दिल्ली उच्च न्यायालय
माधव
- 18 Feb 2026, 06:39 PM
- Updated: 06:39 PM
नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के प्रत्येक पुलिस थाने में गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों के लिए एक समर्पित प्रकोष्ठ का गठन करने के लिए दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करने से बुधवार को इनकार करते हुए कहा कि पुलिसिंग का काम पुलिस अधिकारियों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
याचिका में सभी लापता व्यक्तियों के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( सीबीआई) से ऐसे सभी मामलों की गहन जांच कराने का अनुरोध किया गया था। साथ ही दिल्ली में लापता लोगों की संख्या में ''चिंताजनक वृद्धि'' की जांच के लिए 'संयुक्त कार्य बल' गठित करने और उसकी निगरानी के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक निकाय गठित करने का अनुरोध किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट द्वारा दायर जनहित याचिका में ''व्यापक' राहत का अनुरोध किया गया है। इसमें ऐसे किसी विशिष्ट उदाहरण का अभाव है जहां पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया हो।
याचिकाकर्ता के वकील ने मीडिया में आई खबरों के आधार पर कहा कि लापता व्यक्तियों के मामलों की संख्या में ''चिंताजनक वृद्धि'' एक सार्वजनिक मुद्दा है। पीठ ने याचिका पर कहा, ''पुलिस व्यवस्था कैसे की जानी चाहिए, यह पुलिस पर छोड़ देना चाहिए। कितने मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, इसका आंकड़ा कहां है? सुबह अखबार पढ़कर याचिकाएं दायर न करें। सिर्फ इसलिए कि आपको लगता है कि किसी मामले को एक विशेष तरीके से निपटाया जाना चाहिए, क्या आप परमादेश का अनुरोध कर सकते हैं?''
उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ''पुलिस संगठन के कामकाज के तरीके के बारे में निर्देश देना अदालत का काम नहीं है। दिल्ली के प्रत्येक पुलिस थाना में लापता व्यक्तियों के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ गठित करने का कार्य पुलिस अधिकारियों को सौंपा जाना चाहिए, क्योंकि यह उनके कामकाज से संबंधित है।''
अधिकारियों के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता का लापता व्यक्तियों के मामलों में ''चिंताजनक वृद्धि'' का दावा सही नहीं था।
अदालत ने एक अन्य जनहित याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। इस याचिका में पुलिस को लापता व्यक्तियों की कुल संख्या के बारे में जानकारी देने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
जयिता देब सरकार द्वारा दायर जनहित याचिका में अधिकारियों को ''लापता होने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि'' को रोकने के लिए एक व्यापक सुरक्षा तंत्र और संस्थागत सुरक्षा उपायों को तैयार करने और लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में अनुरोध किया गया है कि अदालत पिछले दशक में लगभग 53,000 'लापता' व्यक्तियों का पता लगाने और उनकी स्थिति पर एक रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दे।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में तय करते हुए कहा, ''याचिका का जवाब चार सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए।''
भाषा धीरज माधव
माधव
1802 1839 दिल्ली